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कविता : आओ अबकी होली में

आओ अबकी होली में

रंगों की रंगोली में
साथ सभी के टोली में।
प्यार का रंग बरसातें हैं
प्रिये आओ अबकी होली में।

फागुन का खूब चढ़े खुमार
रस घोल दो ऐसी बोली में।
गिले-शिकवे भूल मिल जाएं गले
मीत आओ अबकी होली में।

हर चेहरे पे मुसकान सजे
खुशियों से हर मन महके।
इतना रंग भर दो हर झोली में
सखा आओ अबकी होली में।

जग से विषाद सारा मिट जाए
मस्ती में जहाँ सिमट जाए।
उड़े गुलाल हम नाचे-गाएँ
यारा आओ अबकी होली में।

मुकेश सिंह
सिलापथार,असम
09706838045

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