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किसानों की एकता ही उनके लिए समता व न्याय का रास्ता

नई दिल्ली। भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के बैनर तले देशभर से आये किसानों का सम्मेलन आज नई दिल्ली के मावलंकर हाल में हुआ, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के कई राष्ट्रीय नेताओं ने हिस्सा लिया। नेशनल पैंथर्स पार्टी के सुप्रीमो प्रो.भीमसिंह ने देशभर के किसानों से एकता बनाने का आह्वान किया, ताकि जवानों व किसानों की प्रगति व उन्नति हो सके। उन्होंने कहा कि दोनों जवान व किसान इस देश के 80 प्रतिशत आबादी जो कामगार वर्ग की है, से आते हैं। इस ऐतिहासिक सम्मेलन जिसकी अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के अध्यक्ष श्री श्रृषिपाल अम्बावता ने की, को सम्बोधित करते हुए पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि उन्हें इस बात से गहरा आघात होता है कि देशभर में किसानों को सरकारी नौकरियों में उनके हिस्से का एक-तिहाई भी नहीं मिला है। पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि वे स्वयं एक किसान जो कि जवान भी थे के पुत्र हैं और इस दर्द को जानते हैं। उन्होंने कहा कि वे ऊधमपुर जिले के पिछड़े गांव भुगतरियां से आते हैं, जहां से उन्हें अपने प्राइमरी स्कूल जाने के लिए पांच कि.मी. पैदल चलना पड़ता था, तब भी किसानों के बच्चों की हालत गांवों में ऐसी थी और आज भी वहीं है। वहीं दूसरी ओर पूंजीपतियों और व्यापारियों ने अपने बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूल खोले हैं, जहां से आकर वे सभी ऊंची नौकरियां और निजी क्षेत्र के ऊंचे ओहदे पा रहे हैं।
पैंथर्स सुप्रीमो ने एक किसान सम्मेलन को सम्बोंधित करते हुए कि हम किसान सीमाओं पर सेवा कर रहे हैं, देश रक्षा में प्राणों की बलि दे रहे हैं और किसानों के बच्चे पुलिस व अन्य प्रगतिकारक विभागों में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। प्रो.भीमसिंह ने कहा कि यह खेद की विषय है कि इस देश में किसान पूरी आबादी का 80 प्रतिशत है उन्हें आज तक 25 प्रतिशत किसान पुत्रों को विधानसभा या लोकसभा भेजने का मौका नहीं मिला। आज जो कानून बन रहे हैं वे पूरी तरह से व्यापार के बढ़ाने वाले और गरीब को लूटने वाले हैं, जिसके फलस्वरूप किसानों के बच्चों को समता व न्याय सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है।
किसानों का विभाजन आरक्षण के नाम पर किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप पूरा किसान समुदाय को प्रगति का रास्ता नहीं मिल रहा है।
प्रो.भीमसिंह ने किसानों से अपील की कि पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण–कन्याकुमारी से कश्मीर तक किसान एक हो जायं ताकि भारत के संविधान में वर्णित उनके मूलभूत अधिकारों की रक्षा की जा सके। किसानों ने भारत के आजादी, प्रगति व रक्षा के लिए हमेशा धर्मनिरपेक्ष रहते हुए मणिपुर से द्वारका और कन्याकुमारी से कश्मीर तक क परिचय दिया है। भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के अध्यक्ष श्री श्रृषिपाल अम्बावता ने कई राजनेताओं को स्वागत करते हुए प्रो.भीमसिंह की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) द्वारा शुरू किये गये आंदोलनों में प्रो.भीमसिंह ने हाथ से हाथ मिलाकर मजबूती देते हुए आंदोलन को सही गति व दिशा दी है।

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