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संक्रमण का शिकार हो रहे बच्चे

लंदन । विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में हर साल 30 लाख बच्चे संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। भले ही उनमें से 20 लाख बच्चों को टीके के जरिए बचाया जा रहा है पर यह संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देशों में 20 करोड़ से ज्यादा बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास पूरा नहीं होता। एक सर्वे के मुताबिक भारत में 47 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। दरअसल पेट में संक्रमण होने की वजह से जरूरी पोषक तत्व पेट से बाहर निकल जाते हैं जिसका सीधा असर बच्चे के दिमाग पर पड़ता है। बच्चे खेलते-खेलते कुछ भी खा लेते हैं। खाने से पहले हाथ न धोना, पार्क में गंदा पानी पी लेना, मिट्टी खा लेना ये सब संक्रमण की वजह बनते हैं। इससे दस्त और उलटी होती है जिससे शरीर का पानी निकल जाता है और कमजोरी आ जाती है। बिना हाथ धोए खाने से जीवाणु शरीर में चले जाते हैं और इसके बाद आंत तक पहुंच जाते हैं। फिर आंतों का इंफेक्शन शरीर के दूसरे हिस्सों पर असर डालता है। गर्मियों में कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याएं भी होती है। अगर साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए तो दिक्कत बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पसीना जमा होने से शरीर के पोर्स बंद हो जाते हैं। लगातार धूप में खेलने व साफ-सफाई का ध्यान न रखने से घमौरियां हो जाती हैं। ऐसे में बच्चे को ठंडे पानी से दिनभर में 2-3 बार नहलाएं और घमौरियों से रिलैक्स करने वाला पाउडर डालें। कई बार सफाई का ध्यान न रखने से फुंसियां और दाने हो जाते हैं। इसके लिए कोई मेडिकेटेड सोप का उपयोग करें। इस तरह के संक्रमण बच्चे के विकास पर भी असर डालते हैं। अगर आपके बच्चे को अक्सर संक्रमण हो जाता है तो इससे न केवल बच्चे की पढ़ाई पर असर पड़ता है बल्कि उसका शारीरिक और मानसिक विकास भी धीमा हो जाता है।
गर्मियों में बच्चे जब पार्क में जाकर खेलते हैं तो वहां वे दूसरों बच्चों से कई बार इन्फेक्शन की चपेट में आ जाते हैं। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि गर्मियों में बच्चे बाहर न खेलें , बल्कि उन्हें पर्सनल हाइजीन के बारे में बताएं। उन्हें बताएं कि घर आकर हाथ-पांव धोने के बाद ही बेड व सोफे पर बैठें। खाना खाने से पहले और वॉशरूम से आने के बाद बच्चे को किसी अच्छे एंटी बैक्टीरिया साबुन से हाथ धुलवाएं। गर्मी का मौसम आते ही सबसे ज्यादा जिस चीज की जरूरत होती है वह है पानी। अगर बच्चा जरूरत के मुताबिक पानी नहीं पिएगा तो लू लगने और डिडाइड्रेशन होने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। बच्चे में डेली एक्सर्साइज की आदत डालें। इससे वह संक्रमण से काफी हद तक बचा रह पाएगा। नियमित दो बार नहाने से पसीने से इकट्ठे हुए बैक्टीरिया बॉडी से बह जाते हैं और स्किन प्रॉब्ल्म्स होने के अवसर कम हो जाते हैं।

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