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दो एकड़ में फैल चुका है यह 255 साल पुराना बरगद का पेड़

शिबपुर। देश का यह 255 साल पुराना बरगद का पेड़ हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। इसका विशालकाय आकार अब और विशाल होता जा रहा है। इस पेड़ की परिधि बीते 30 साल में दो एकड़ बढ़कर फैल चुकी है। लिहाजा, इसकी देखरेख करने वालों को इसके लिए एक बड़ी बाउंड्री बनाना पड़ रही है। 1985 में जब इस पेड़ के चारों तरफ बागड़ लगाई गई तब इस काम में तीन एकड़ की जमीन लग गई थी। आज, 32 साल बाद, अतिरिक्‍त जड़ें पनप गईं हैं और इन्‍होंने यहां का पूरा पांच एकड़ का क्षेत्र ही कवर कर लिया है। इसलिए अब यहां एक नई बागड़ लगाई जाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसका काम अभी पूरा ही हुआ है। इस विशाल पेड़ की देखरेख करने वाले सीनयिर साइंटिस्‍ट को भी पक्‍का नहीं है कि यह बड़ी बागड़ कितनी उपयोगी होगी। जिस बगीचे में यह पेड़ है वह बॉटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया के अधीन है। इस विशाल बरगद का निकनेम ‘द वॉकिंग ट्री’ है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रेकार्ड्स ने भी इस पेड़ को सबसे बड़े प्राकृतिक शामियाने का दर्जा देते हुए इसकी परिधि को सबसे चौड़ी परिधि के तौर पर दर्ज किया है।
बगीचे के व्‍यवस्‍थापकों ने अब इस पेड़ की परिधि के दो एकड़ में बढ़ने के तथ्‍य को भी गिनीज बुक में दर्ज करवाने के लिए वहां के अधिकारियों से संपर्क किया है। इस विशाल बरगद के पेड़ की सहायक जड़ों की संख्‍या तकरीबन चार हजार है। इन्‍हीं से यह जिंदा है, जो कि अपने आप में एक आश्‍चर्य है। 1925 में इसके मुख्‍य तने में फंगस लग गया था, उसके बाद भी यह जीवित है।

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