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पुस्तक समीक्षा : मौसम की हर छटा बिखेरती  कविताएँ  

समीक्षक: तेज प्रताप नारायण

कवयित्री नीलम चन्द्रा सक्सेना जी के व्यक्तित्व का वितान बड़ा ही व्यापक है !  एक ओर उच्च  पद की ज़िम्मेदारियाँ  हैं ,तो दूसरी और एहसासों  की विस्तृत भूमि ! उनके 28  कविता संग्रह, कई उपन्यास, कहानी संग्रह  और बाल साहित्य की किताबें प्रकाशित हो चुकी है ! हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखने वाली कवयित्री  बढ़िया पेंटिंग भी करती हैं  ! इनकी प्रतिभा ,इनकी खूबियाँ का दिग्दर्शन इस  काव्य  संग्रह में भी किया जा सकता है !  जब मस्तिष्क के दोनों हिस्से सक्रिय हो जाते है तो तर्कों और एहसासों के संयोग  से एक ऐसा वृक्ष बनता है , जिसकी छाया  तले जिंदगी को सुकून मिलता है और अकसर कई समस्याओं का समाधान भी !

“आज बादल बन बरस जाना” कविता संग्रह की कविताएँ , तपती धरती जैसी ज़िन्दगी में एहसासों की बारिश के सदृश्य है !

“मैं कविता हूँ

मैं एक खुश रंग बदरी हूँ

मेरे पास सिर्फ मोहब्बत के रंग हैं !”

जहाँ सृजन होगा ,वहाँ  विनाश भी होता है ! यदि जन्म है तो मृत्यु है ! यदि जीवन है तो संघर्ष है  ! इसलिए मोहब्बत के रंगों को भी नकाब पोशों से सावधान रहने की ज़रूरत हैं !

“मोहब्बत के कातिल घूमते हैं बहुत

नकाबों को डाले

शराफत के नकाब

तो कहीं बनावट की नकाब ! “

अतः ये जरूरी हैं की मोहब्बत का सौदा करके सबको मोहब्बत के रंग में रंग लिया जाये और  जब मोहब्बत हो जाती हैं तो कोई और सबूत की जरूरत नहीं होती ! ऐसी मोहब्बत जिसमें आशिक़ ख़ुद को डुबो कर भी अपने व्यक्तित्व को सुरक्षित रखना चाहता हैं!

“गर मेरे पास आना हैं

तो तुम्हें भी

मुझे बिलकुल वैसे ही स्वीकारना होगा

जैसे स्वीकार लेती हूँ मैं तुम्हें

बिना किसी बंधन के  “

जब ऐसी स्वीकृति मिल जाती है तो मनुष्य अपने  हर पल को जीता है , न बीते कल का रोना होता है और न आने वाले कल की फिकर होती है ! हर पल रूमानी हो जाता है !

“सुनो कल का इंतज़ार  मत करना

चलो आज ही  थोड़ा सा

रुमानी हो जाते हैं !”

स्त्री होने के नाते स्त्रियों के दुःख –दर्द, महिलाओं की समस्याओं को बहुत करीब से कवयित्री ने महसूस किया है जो कविताओं में जगह -जगह उभर आया है, लेकिन सिर्फ दुःख बयानी ही नहीं रास्ता भी दिखाया गया है !   

“रात की स्याही है ,आओ मिटा दो इसे तुम

नदी की उदासी है ,आओ बहा दो इसे तुम  “

वस्तुतः “आज बादल बन बरस जाना” कविता संग्रह की कविताएँ एहसासों की कविताएँ  

हैं ,मोहब्बत की कविताएँ  हैं और नारी यत्ता की कविताएँ  हैं ! कविताएँ   जो साहस देती हैं आगे बढ़ने की और न हारने की प्रेरणा देती हैं !

“और धीरे  धीरे भर जाता है उसमें

एक नया जोश

जो उसे हारने नहीं देता  !  “

समीक्षक: तेज प्रताप नारायण

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