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गांधी और शास्त्री के आदर्श आज भी प्रासंगिक

आजादी के 71 वर्षों के बाद नई पीढ़ी के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि देश को शांति और अहिंसा के मार्ग पर ले जाने वाले गाँधी और शास्त्री के विचारों की हत्या किसने की। झूठी सौगंध खाने वाले लोग कौन है और उनके मनसूबे क्या है। गोडसे के नाम की ताली हम कब तक पीटते रहेंगे। आखिर देश गाँधी के बताये मार्ग से क्यों भटका। आज सम्पूर्ण विश्व भारतवासियों से पूछ रहा है कि संसार को अहिंसा का पाठ पढा़ने वाले बापू के देश में बात बात पर मार काट क्यों मच रही है। हमें इस पर गहराई से चिंतन और मनन करने की जरूरत है।
2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। दोनों महान नेताओं को हम श्रद्धा से बापू और गुदड़ी के लाल के नाम से जानते और पहचानते है। गाँधी और शास्त्री को देश उनकी जयंती पर एक बार फिर श्रद्धा से याद करेगा और उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराएगा। दोनों महापुरुषों की जयंती एक ही दिन दो अक्टूबर को आती हैै। इस दिन बिना भेदभाव के समस्त देशवासी उन्हें नमन करते है। प्रार्थना सभा ,प्रभात फेरी भजन, सभा और गोष्ठियां आयोजित की जाती है। दोनों जननायकों में एक समानता है। दोनों ही देश के लिए जिए और शहीद हुए। गाँधी को राजघाट पर गोली मारी गयी और शास्त्री की मास्को में रहस्यपूर्ण तरीके से मृत्यु हुई।
सच तो यह है कि गाँधी और शास्त्री दोनों को ही उनकी जयंती पर हम रश्मि तौर पर याद करते है। कश्मे खाते है उनके पदचिन्हों पर चलने की मगर हमारा आचरण इसके सर्वथा विपरीत होता है। आज सम्पूर्ण विश्व में अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है। अब यह भी कागजी होगया है। कश्मीर की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। पाकिस्तान छद्म युद्ध पर उतारू है और चीन की हरकतें भी जग जाहिर है। ऐसे में अहिंसा की बाते बेमानी हो गयी है। अब सवाल यह उठता है कि बड़ी बड़ी बातें छोड़ कर आखिर क्या किया जाये की दोनों महापुरुषों की जयंती भी मने और लोग हम पर थू थू भी नहीं करे। रास्ता तो आखिर हमें ही निकालना होगा।
2 अक्टूबर का दिन भारत के लिए काफी मायने रखता है। क्योंकि आज के दिन भारत के दो ऐसे महान लोगों ने जन्म लिया जिसने देश को नई पहचान दी है। भारत को जय जवान जय किसान का नारा देने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी गर्व और भावुक होकर देश याद कर रहा है। सादा जीवन और उच्च विचार वाले लाल बहादुर शास्त्री ने दुनिया को जता दिया कि अगर इंसान के अंदर आत्मविश्वास हो तो वो कोई भी मंजिल पा सकता है।
महात्मा गांधी त्याग और बलिदान की मूर्ति थे। सादा जीवन और उच्च विचार उनका आदर्श था और वे भारतीय जनमानस में सदैव प्रेरणा के स्त्रोत रहेंगें। अहिंसा और सादगी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व के प्रमुख अलंकार थे। उनके ये दोनों गुण आज भी आमजन को एक गौरवशाली जीवन की प्रेरणा देते हैं।
आज का दिन बड़ा ही महत्वपूर्ण है क्योंकि आज पूरे विश्व में गांधीजी कि प्रेरणा से ही अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है। जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री एक महान नेता थे। इन दोनों नेताओं ने अपने जीवन में आदर्श स्थापित किए है। एक गांधी जी थे जिन्होंने सत्य ओर अहिंसा का पाठ पढ़ाया, आत्मविश्वास ओर आत्मनिर्भरता से जीना सिखाया। महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री सादगी के प्रतिमूर्ति थे। आज के दिन हमें उनके बतायें मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। लाल बहादुर शास्त्री को लोग गुदड़ी के लाल के रूप में याद करते हैं। वह देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे। लेकिन उनकी पहचान उनके सादा जीवन और उच्च विचार के कारण थी। लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी महात्मा गांधी के जन्मदिन के दिन यानी 2 अक्टूबर को ही होता है। दोनों महान विभूतियों की प्रेरणादायक जीवन गाथा देश और दुनिया के लिए अनमोल धरोहर हैं ।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सादगी, सच्चाई और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश की आजादी के आंदोलन में अपनी ऐतिहासिक और निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने देश को स्वावलम्बन के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी और ग्राम स्वराज के साथ-साथ सुशासन और सुराज का भी मार्ग दिखाया। शास्त्री जी ने युध्द के कठिन हालात में देश का नेतृत्व संभाला और देशवासियों को जय जवान-जय किसान का प्रेरणादायक नारा देकर जवानों और किसानों का हौसला बढ़ाते हुए देश के सभी नागरिकों में राष्ट्रीयता का संचार किया। आज देश और दुनिया में युध्द, नक्सलवाद, आतंकवाद हिंसा और प्रतिहिंसा के बादल मंडरा रहे हैं, ऐसे युद्धोन्मादी दौर में गांधी जी और शास्त्री जी के आदर्श और सिध्दांत सबके लिए और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

 

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