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संबंध के खुलते वैकल्पिक रास्ते

कामसूत्र या सेक्स जैसे मसलों पर बात करने का मतलब विवाद का नया बखेड़ा खड़ा करना। इस विषय को लेकर आजतक कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं गढी गई इसलिए खुलकर बात करना भी भारतीय संस्कृति के खिलाफ माना जाता है। लेकिन सेक्स की बुनियादी जरूरत को पूरा करने के लिए कुछ यंत्रों यानी सेक्स से जुड़े विदेशी प्राॅडक्टस् ने भारत में दस्तक देकर कामसूत्र क्षेत्र में तहलका मचा दिया है। बाजारों में उपलब्ध तमाम सेक्शुअल प्लेजर व टाॅयज ने अब एक नई दुनिया का आगाज कर दिया है। बाजारों में महिला-पुरूष दोनों के लिए सेक्स टॉयज की बेशुमार वस्तुएं मौजूद हैं, जो इंसानों की सेक्स की कल्पनाओं को पूरा करने में मद्द कर रही हैं। हाल ही में किए गए एक सर्वे से पता चला है कि जो इन टाॅयज का इस्तेमाल करता है वह आदि हो जाता है।
सर्वे रिपोर्ट सेक्स टॉय का इस्तेमाल महिलाएं ज्यादा कर रही है ऐसा दावा करती है। हालांकि भारत में सेक्स टाॅयज प्रतिबंधित हैं वाबजूद इसके कंपनियां एक क्लीक पर आॅनलाइन खरीददारी से आसानी से उपलब्ध करा रही हैं। कई ऑनलाइन स्टोर्स हैं जो घर तक सेक्स टॉय्ाज डिलिवर कर रहे हैं। कंपनियां बेहद सीक्रेट या डिस्क्रीट पैकिंग में इन प्रॉडक्ट्स को पहुंचाने का भी इंतजाम करती हैं। दरअसल सेक्स से जुड़े सभी प्रॉडक्ट्स इंटरनेशनल होते हैं, इसलिए कस्टम ड्यूटी और टैक्स चुकाने के बाद इंटरनेशनल कुरियर उपभोक्ताओं को उनके पतों पर पहुंचाते हैं। उपभोक्ता अगर इन उपक्रमों को किसी गुप्त पिकअप पॉइंट पर मंगाना चाहें तो उसका भी इंतजाम कंपनियां करती हैं।
आईपीसी की धारा 292 के तरह अश्लील उत्पाद सामाग्री को भारत में बेचना मनाही है। हालांकि शुरुआत में ये कानून अश्लील किताबों और पैंपलेट्स के लिए था लेकिन परिभाषा में ऐसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं जिससे सेक्स टॉय्ज की बिक्री पर भी लागू है। विगत दिनों कोलकाता हवाईअड्डे पर कस्टम अधिकारियों ने एक भारतीय महिला के पास से कई सेक्स टाॅयज बरामद किए। पूछताछ में महिला ने बताया कि वह अपने पति से पिछलों दस सालों से अलग रह रही हैं, इसलिए कुछ गलत कदम न उठाए इसके वजह वह इन खिलोने से ही अपनी यौनइच्छा पूरी कर लेती हैं। यह घटना हमारे लिए उदाहरण मात्र है। इस तरह का चलन भारत में लगातार बढ़ता जा रहा है।
दरअसल हिंदुस्तान में आज भी संभोगक्रिया को अश्लीलता व अनैतिकता से जोड़कर देखा जाता है। उस लिहाज से सेक्स टॉय्ाज के प्रयोग को लेकर हमारे भीतर में जो धारणाएं बनी रहती हैं वह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। एक संस्कृति के तौर पर हम सेक्स के बारे में खुले में बात करने से भी शर्माते हैं और ये मानने से भी इनकार करते हैं कि सेक्स प्राकृतिक है। इन बातों का ही परिणाम है कि हमारे समाज में इतनी दकिया मिथ्याएं और वर्जनाएं हैं जिसे आज का बदलता समाज दूर कर रहा है। टीनेजर्स में हॉरमोंस उफान पर होता है सेक्स की इच्छा को पूरा करने में उनके भीतर ज्यादा हिचक नहीं होती। उनकी इस हिचक को गूगल ने पूरा कर दिया है। सर्वे रिपोर्टस् पर गौर करें तो भारत के अस्सी प्रतिशत से ज्यादा युवा हर रोज इंटरनेट पर सेक्स वीडियो देखता है। सेक्स पूर्ति के उपाय गूगल में खोजते हैं और अंत में उनकी दौड़ सेक्स टाॅयज पर आकर खत्म हो जाती है।
सर्वे रिपोर्ट बताती है कि यौनआपुर्ति को पूरा करने में महिलाएं बेहताशा सेक्स टाॅयज का इस्तेमाल कर रही हैं। संपन्न परिवारों की जो महिलाएं सेक्स टॉय्ाज के जरिए सेक्शुअल प्लेजर पा रही हैं उससे साफ है कि सेक्स टॉय सेक्शुअल आजादी में उनके लिए कितना योगदान दे रहा है। इससे एक बात ठीक से समझी जा सकती है कि इनके इस्तेमाल से महिलाओं कि यौनिकता पर भविष्य में ये उपक्रम प्रत्यक्षरूप से अधिकार जमा लेंगे। दरअसल अब वक्त बदल गया है इसलिए महिलाएं सेक्स संवादिक क्षेत्र को अपने तरीके से अपनाना चाहती हैं। ऐसा भी नहीं है कि सेक्स खिलौनों का प्रयोग सिर्फ मास्टरबेशन तक ही सीमित है। यानी तलाकशुदा महिलाएं या टीनेजर्स ही पंसद करती हैं। एक रिसर्च के मुताबिक सेक्स टॉय्ाज का प्रयोग करने की तादात उन महिलाओं की भी सबसे ज्यादा है जो रिलेशनशिप में हैं।
सेक्स टाॅयज के चलन को कुछ लोग इसलिए भी अच्छा बता रहे हैं कि इससे भारत में फैले प्रॉस्टिट्यूशन का बाजार कम होगा। दूसरा पहलू एक यह भी है कि मौजूदा दौर में किसी अपरिचित इंसान के साथ गलत तरीके से सेक्स करने सुकून के मुकाबले इन टाॅयज का इस्तेमाल कहीं बेहतर हो सकता है। दरअसल 18-20 का योवन एक ऐसा पड़ाव होती है, जब सेक्स की इच्छा कई बार अपने आपे से बाहर हो जाती है। लोग गलत रास्तों को खोजने लगते हैं। ऐसे में तमाम बीमारियों व अनसेफ गर्भ के खतरे से बचने के लिए वैकल्पिक तरीके से यौनइच्छा की भरपाई के लिए मस्टरबेटर, वाइब्रेटर, लेटेक्स डॉल्स, इनहैंसर, एडिबल अंडरगारमेंट्स, पेनिस बलून्स जैसी टाॅयज का प्रयोग बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। क्योंकि देखा जाए तो अनगिनत लोग सेक्स के दौरान अंॉर्गेजम तक पहुंचने में कामयाब नहीं होते। ऐसी हालत में भी ये टॉयज बेहद फायदेमंद हो सकते हैं। इनका प्रयोग गलत है या अच्छा फिलहाल हम जज नहीं कर सकते हैं। लेकिन इनके प्रयोगों के दुष्प्रमाण अभी तक सामने नहीं आए हैं। कंडोमस् की तरह अगर सेक्स टाॅयज की ब्रिकी भी आम हो जाए, तो रेप की घटनाओं में कमी आने की संभावनाएं जग सकेंगी।

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रमेश ठाकुर

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