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फीफा ने भारत में बढ़ाई फुटबाॅल की शान

फीफा ने अपना काम कर दिया, उसे जिंदा रखना अब हमारा कर्तव्य है। फीफा ने हिंदुस्तान में फुटबाॅल का बड़ा आयोजन करके क्रिकेटमय देश में भारतीय फुटबाॅल प्रेमियों को भीमकाय निंद्रा से जगाने का काम किया है। यूं कहें कि भारत में दम तोड़ रही फुटबाॅल की लोकप्रियता को फीफा ने नया आयाम देने का काम किया है। दूसरे खेलों को पंसद करने वाले भी 6 से 28 अक्टूबर के बीच हिंदुस्तान में हुए जुनियर फुटबाॅल विश्व कप के रंग में रंगे दिखाई दिए। आयोजन को लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से इस आयोजन को सफल बनाने के लिए आहवान किया। विश्व के फुटबाॅल जगत में इस समय भारत की चर्चा हो रही है। फीफा अंडर-17 फुटबॉल विश्व कप की हिंदुस्तान ने ऐतिहासिक सफल मेजबानी करके फीफा आयोजन मनमोहित किया है। गौरतलब है कि भारत में फुटबॉल का जुनून अभी तब बेगाना था, लेकिन फीफा ने यह आयोजन करके भारतीय फुटबाॅल प्रेमियों के अंदर नई किस्म की जान फूंक दी है। छह अक्टूबर से शुरू हुए इस महाकुंभ का समापन शनिवार को बेहतरीन तरीके से हुआ।
इस आयोजन में भारतीय टीम को काफी कठिन ग्रुप में रखा गया था। खिलाड़ियों ने अमेरिका, कोलंबिया और घाना के खिलाफ शानदार खेल दिखाया है, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने इन सबसे परे शानदार खेल दिखाया और उन्हें अपने प्रदर्शन पर गर्व होना चाहिए। भारत के लिए पहली बार विश्व कप में खेलना और अपने घरेलू दर्शकों के समक्ष गोल करना, महान उपलब्धि है। भारत के लिए विश्व कप में पहला गोल करने वाले खिलाड़ी जैक्सन सिंह की हर ओर तारीफ हो रही है। भारत के लिए फीफा अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी भविष्य बहुत ही अहम साबित होगी। सिलसिला अगर ऐसा ही बरकरार रहा तो विकास की सतत प्रक्रिया और खुद पर यकीन के साथ भारत निश्चित तौर पर विश्व फुटबॉल में एक अहम स्थान हासिल करेगा।
हर मैच में दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम ये दर्शाने के लिए काफी थे कि भविष्य में हिंदुस्तान के भीतर फुटबॉल का जुनून किस कदर बढ़ेगा। इस आयोजन में बेशक हमारी भारतीय टीम ज्यादा कुछ नहीं कर सकी, लेकिन आयोजन में भाग लेना ही हमारे लिए गौरव का क्षण रहा। इससे भारतीय फुटबॉल जगत को नई पहचान मिली है। फीफा फुटबॉल के सभी मैच रोमांच से भरे रहे है। मैदान में मैच किसी भी देश की टीम खेल रही थी। पर, उसमें भारतीय फुटबॉलप्रेमियों की संख्या सबसे ज्यादा रही। खैर, भारतीय फुटबॉल के लिए मक्का कहा जाने वाला हिंदुस्तान का शहर कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में शनिवार को फाइनल के लिए इंग्लैंड व स्पेन आमने-सामने थीं जिसमें इंग्लैंड ने स्पेन को धूल चटाकर पूरा जहान जीत लिया।
कोलकाता में हुए फाइनल मैच को देखने के लिए दर्शकों की दीवानगी देखने लायक थी। हर वर्ग के लोग टिकटों को हासिल करने के लिए लाइनों में लगे थे। क्या खास, क्या आम सभी मैच देखने के लिए उतावले दिखाई दिए। बंगालियों की संख्या सबसे ज्यादा थी। दरअसल बंगाल और फुटबाॅल का संबंध चोली और दामन की तरह माना जाता है। भारत में फुटबाॅल का जन्म पंश्चिम बंगाल से हुआ ही माना जाता है। फीफा अंडर-17 के इस विश्व कप के रोमांचक फाइनल में इंग्लैंड स्पेन को 5-2 के अंतर से करारी शिकस्त देकर जूनियर फुटबॉल का नया बादशाह बना। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही इंग्लैंड ने सिर्फ स्पेन के खिताब जीतने की ख्वाहिश चैथी बार तोड़ी, बल्कि इसी साल मई में हुई अंडर-17 यूरोपियन चैंपियनशिप के फाइनल में मिली हार का भी बदला ले लिया। इस जीत की सबसे बड़ी वजह यह रही कि पहली बार फाइनल में पहुंची इंग्लैंड की टीम ने पहली ही बार में बाजी मार ली।
भारत में हुए फीफा अंडर-17 फुटबॉल विश्व कप के सफल आयोजन के लिए फीफा आयोजन समीति ने भारत का शुक्रिया अदा किया है। साथ ही फुटबाॅल के लिए भविष्य की शुभकामनाएं भी दी हैं। दरअसल भारतीय फुटबाॅल के लिए यह क्षण किसी खिताब जीतने से कम नहीं है। दरअसल क्रिकेट के दीवाने भारत में फीफा का आयोजन किसी करिश्मे से कम नहीं है। इस समय क्रिकेटप्रमियों पर भी फुटबॉल को लेकर जुनून और बुखार चढ़ा हुआ है। उम्मीद है फुटबाॅल को लेकर लोगों में जुनूनियत इस तरह ही हावी रहेगी। फीफा के इस आयोजन से भारत में फुटबाॅल की लोकप्रियता नए पायदान है। तकाजा इस बात का है कि बस आगे भी बरकरार रहे।
हिंदुस्तान में क्रिकेट के अलवा दूसरे खेलों को उतनी अहमियत नहीं मिली। यही वजह है कि अब क्रिकेटमय भारत में फुटबॉल को लोकप्रिय करने की कोशिशें शुरू की जा रही हैं। फीफा आयोजन समीति के लोग भी मानते हैं कि भारत में भीमकाय स्थिति में पहुंच चुके फुटबाॅल को जगाने की बेहद जरूरत है। दरअसल उनका इशारा भारत में फुटबॉल की दीवानगी को हवा देने का है। हमारे यहां समूचे दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में फुटबॉल हमेशा से लोकप्रिय रहा है। पर, क्रिकेट पर प्रत्यक्ष रूप से इस लोकप्रियता पर ग्रहण लगने का आरोप लगता रहा है। लेकिन अब उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में फुटबॉल भारत में एक मोर्चा बनकर उभरेगा। देश में इस समय कई हिस्सों में फुटबाॅल प्रशिक्षण केंद्र खुल चुके हैं। इंग्लैंड में पूर्व कम्युनिटी कोच बिल एडम्स ने भी दिल्ली में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जिसमें इस समय करीब 200 बच्चे फुटबाॅल का ककहरा सीख रहे हैं।
एक रिसर्च पर गौर करें तो हिंदुस्तान में 8 करोड़ से ज्यादा दर्शक फुटबॉल देखते हैं और उनमें से 55 फीसदी घरेलू लीग देखना पसंद करते हैं। इस संख्या में पिछले कुछ सालों में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है। फुटबॉल जगत के लिए ये आंकड़े निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाने वाले हैं। फीफा के इस आयोजन में केंद्र सरकार व राज्य सरकारों ने अपनी अग्रणी भूमिकाएं निभाई हैं। यह फुटबाॅल जगत व खेल प्रमियों के लिए सुखद माना जाएगा। क्रिकेट व अन्य खेलों की तरह फुटबाॅल के लिए भी आईपीएल के तर्ज पर, टूर्नामेंट व आदि आयोजन किए जाने की दरकार है। यह चलन बहुत ही गलत है कि कुछ ही खेलों को बढ़ाया दिया जाता है। बाकि खेलों के साथ बेगाना व्यवहार किया जाता है। सर्व सामान सोच के साथ खेलों के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। फुटबाॅल के लिए दर्शकों में जो जुनून जन्मा है उसे मरने नहीं देना चाहिए। इसलिए सरकारी तंत्र को फुटबाॅल को हमेशा प्रतोसाहित करने की जरूरत है।

रमेश ठाकुर
संपर्कः 9350977026

 

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