ब्रेकिंग न्यूज़

देवउठनी एकादशी : एकादशी पर नही होंगे विवाह, नही है कोई शुभ मुहूर्त

पं अंकित मार्कण्डेय

31अक्टूबर मंगलवार कार्तिक शुक्ल की एकादशी को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। भगवान विष्णु इस दिन चार महीने तक सोने के बाद जागेंगे और इसी के साथ शुभ कार्यो की शुरूआत हो जाएगी। देवउठनी एकादशी के ही दिन भगवान विष्णु के एक स्वरूप शालीग्राम से तुलसी के पौधे का विवाह भी होता है। मान्यता है क‌ि तुलसी और व‌िष्‍णु के शाल‌िग्राम रूप का व‌िवाह करवाने वाले को कन्यादान का पुण्य प्राप्त होता है और अपार पुण्य की प्राप्त‌ि होती है। इसल‌िए देव प्रबोधनी एकादशी को तुलसी व‌िवाह उत्सव का द‌‌िन भी कहा जाता है। इस द‌िन को व‌िवाह का अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है यानी इस द‌िन ब‌िना पंचांग देखे व‌िवाह कार्य संपन्न क‌िया जा सकता है।
पं अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक पौराणिक मान्यता के अनुसार, राक्षस कुल में एक कन्या का जन्म हुआ जिसका नाम वृंदा रखा गया। वह बचपन से भगवान विष्णु की परम भक्त थी और हमेशा उनकी भक्ति में लीन रहती थी। जब वृंदा विवाह योग्य हुई तो उसके माता-पिता ने उसका विवाह समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए जलंधर नाम के राक्षस से कर दिया। वृंदा भगवान विष्णु की भक्त के साथ एक पतिव्रता स्त्री थी जिसके कारण उसका पति जलंधर और भी शक्तिशाली हो गया
जलंधर जब भी युद्ध पर जाता वृंदा पूजा अनुष्ठान करती, वृंदा की भक्ति के कारण जलंधर को कोई भी नहीं मार पा रहा था। जलंधर ने देवताओं पर चढ़ाई कर दी, सारे देवता जलंधर को मारने में असमर्थ हो रहे थे, जलंधर उन्हें बूरी तरह से हरा रहा था। दुःखी होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गये और जलंधर के आतंक को समाप्त करने की प्रार्थना करने लगे।
तब भगवान विष्णु ने अपनी माया से जलांधर का रूप धारण कर लिया और छल से वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट कर दिया। इससे जलंधर की शक्ति क्षीण हो गयी और वह युद्ध में मारा गया। जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर का बन जाने का शाप दे दिया।
भगवान को पत्थर का होते देख सभी देवी-देवता में हाकाकार मच गया, फिर माता लक्ष्मी ने वृंदा से प्रार्थना की तब वृंदा ने जगत कल्याण के लिये अपना शाप वापस ले लिया और खुद जलंधर के साथ सती हो गई फिर उनकी राख से एक पौधा निकला जिसे भगवान विष्णु ने तुलसी नाम दिया और खुद के एक रुप को पत्थर में समाहित करते हुए कहा कि आज से तुलसी के बिना मैं प्रसाद स्वीकार नहीं करुंगा। इस पत्थर को शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा। कार्तिक महीने में तो तुलसी जी का शालिग्राम के साथ विवाह भी किया जाता है।

शीतला माता मंदिर के पं अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक इस बार विवाह मुहूर्त नही है

आपके घर शादी है तो रुक जाये, इस माह क्यो नही होंगे विवाह ,जाने क्या कारण है,  एकादशी पर नही होंगे विवाह, नही है कोई शुभ मुहूर्त …
पं अंकित मार्कण्डेय

देवउठनी एकादशी पर नहीं बजेगी शहनाईया, शादी के लिए करना होगा लम्बा इंतजार…
पं अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक देव गुरु ब्रहस्पति के तारा अस्त होने के साथ ही इस बार देव उठनी एकादशी (ग्यारस )पर भी विवाह मुहूर्त नहीं है। साथ ही शुक्र अस्त का भी रहेगा प्रभाव ।

  • 31 अक्टूबर को देवउठनी ग्यारस (एकादशी) रहेगी, जो कि विवाह आदि मांगलिक कार्य के लिए अबूझ मुहूर्त होता है परन्तु गुरु के अस्त के पराभव से इस बार एकादशी पर विवाह नही होंगे
  • गुरु अस्त होने से यह संयोग इस बार बन रहा है। 11 अक्टूबर से 7 नवंबर तक गुरु अस्त रहने से शादियों का सिलसिला 31 अक्टूबर यानी देवउठनी एकादशी से न होकर 19 नवंबर से शुरू होगा।

गुरु तारा अस्त…

  • 11 अक्टूबर से 9 नवंबर के बीच सूर्य के निकट रहने से बृहस्पति ग्रह अस्त रहेगा। अस्त होने की वजह से बृहस्पति का प्रभाव कम हो जाएगा। जो कि विवाह के लिए सबसे महत्व पूर्ण होता है।
  • 11अक्टूबर से 7 नवम्बर तक गुरू तारा अस्त रहेगा जिसके कारण विवाह मुहूर्त नहीं रहेंगे है

शुक्र अस्त…

  • 15 दिसम्बर 2017 शुक्र अस्त
    3 फरवरी 2017 शुक्रोदय
  • 15 दिसंबर से 3 फरवरी तक शुक्रास्त एवं खरमास होने से एक बार फिर करीब डेढ़ माह के लिए शुभ मुहूर्त में शादियों का सिलसिला थमेगा।

देव प्रबोधिनी एकादशी …

  • मांगलिक कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त के रूप में मान्य देवउठनी एकादशी होती है , पर इस बार गुरु के अस्त होने के कारण मांगलिक कार्य विवाह नहीं हो सकेंगे।
  • पं अंकीत मार्कण्डेय के मुताबिक अक्षय तृतिया, बसन्त पंचमी एवं देवउठनी एकादशी अबूझ मुहूर्त माने गए हैं, जिस में कोई भी कार्य बिना मुहूर्त के कर सकते है
  • लेकिन 11 अक्टूबर से गुरु अस्त होने से इस बार देवउठनी एकादशी पर शादियों के लग्न मुहूर्त नहीं हैं।

मीन संक्रांति खरमास ….

  • पं अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक फिर 14 मार्च से मीन संक्राति एवं खरमास शुरू हो रहा है, जो 17 अप्रैल तक रहेगा। इस दौरान भी विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे।
  • पंचांगों में सुझाए गए विवाह मुहूर्त का विशेष महत्व होने से कई नवयुगल देवउठनी एकादशी पर शादी न करते हुए 11नवंबर से शुरू हो रही मांगलिक बेला में शादियां करेंगे।

पाठक कृपया ध्यान दें
विवाह शुभ मुहूर्त सन्दर्भ में अगर कोई पाठक जानकारी चाहता है तो पाठक सीधे पं अंकित मार्कण्डेय जी को मोबाइल नंबर 8109203108 पर संपर्क कर सकते है

Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Translate »
Skip to toolbar