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व्यंग्य : खिचड़ी में हिंग का तड़का ….

एक बार सागर में दो घड़े तैर रहे थे । एक मिट्टी का घड़ा और दूसरा पीतल का था । दोनों तैर तो रहे पर पानी में , पर दोनों में दोस्ती नहीं हो पा रही थी ।
तभी पीतल के घड़े ने कहा , ” तुम तो मिट्टी से बने हो , कमज़ोर हो , तुम्हें मेरे सहारे की जरूरत होगी । तुम्हें मुझसे दोस्ती कर लेनी चाहिए ।”
मिट्टी के घड़े ने बड़ी शालीनता से जबाब दिया ” वाकई तुम बहुत शक्तिशाली हो , तुम्हारे पास आते ही , टकराकर मैं टुकड़ों में बिखर जाऊँगा इसलिए तुमसे दोस्ती नहीं हो सकती । ”
सही ही कहा है अपनी कमजोरियों को पहचान कर ही दोस्ती करें तो बेहतर होता है ।
अखबार में देखा मैंने दुनिया के दूसरे और चीन के सबसे बड़े खिसकते ‘ तकलामाकन ‘ रेगिस्तान में ऑयल कंपनी के वर्कर्स ने जिंदगी ला दी है । इस रेगिस्तान को पहले ‘ सी ऑफ डेथ ‘ कहा जाता था । उस पर वर्कर्स ने 15 साल में रेगिस्तान में बनाए गए 436 किमी हाइवे के दोनों तरफ पेड़ लगाकर हरियाली ला दी । यही नहीं डोकलाम जैसा विवाद रोकने के लिए अब चीन की सेना भी हिंदी सीख रही है । चीन के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के शंघाई एकेडमी ऑफ सोशल सांइसेज के रिसर्च फेलो हू झियोंग के अनुसार ” डोकलाम विवाद के बाद गलतफहमी के कारण पैदा होने वाले समस्या से बचने के लिए बेहतर संवाद के लिए अपने सैनिकों को हिंदी सीखने की नसीहत दी है ।”
चाहे जो भी हो अपने कच्चे घड़े वाले संरचना को लेकर चीन अब अपने घड़े के ऊपर ताकत का परत चढ़ा रहा है और भारत के समीप भी रहना चाहता है पर दोस्ती नहीं करना चाहता । उसे डर है कहीं टकराने से वो टूट न जाए ।
चाहे जो भी हो अब घड़ा पीतल का है तो उसमें खिचड़ी तो पकेगी ही । भारत के जायकेदार खिचड़ी
में चाहे चीनी सामानों का दाल – चावल डाला जाय या डोकलाम विवाद का मसाला या फिर पाकिस्तानी आतंकवादी सब्जियाँ । कश्मीरी विवाद का खड़ा गरम – मसाला डाला जाय या बाहरी पड़ोसियों के लाल – मिर्च ।
कुछ भी हो भारत अपनी खिचड़ी को धीमी आँच पर पकाकर गला ही लेगा और मज़ा तो तब आयेगा जब हम भारतवासी स्नेह का छौंक लगाकर विश्व बंधुत्व की थाली में परोस कर स्वयं भी जायकेदार खिचड़ी का आनंद लेंगे ।
अब भूटान ने भारत की खिचड़ी में दोस्ती की घी डालकर स्वाद दुगुना कर दिया है । चीन चाहे जितना मिर्च डालने की कोशिश करें हमारे मास्टर सैफ खिचड़ी में सब मसालों का संतुलन सही बैठा ही लेते हैं ।

मल्लिका रुद्रा ” मलय – तापस “
बरतुंगा , चिरमिरी , छत्तीसगढ़

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