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साइबर क्राइम या ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है तो कैसे दर्ज करवाएं रिपोर्ट

भारत में हर 10 मिनट में साइबर क्राइम होता है. इस साल जनवरी से जून के बीच 27,482 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामले दर्ज किए गए हैं. पिछले साढ़े तीन सालों में 1.71 लाख से ज्यादा साइबर क्राइम हुए हैं. इन मामलों में लगातार इजाफा हो रही है. चारों तरफ ऑनलाइन धोखाधड़ी का जाल बिछा हुआ है. हालांकि यह भी सच है कि साइबर क्राइम के ज्यादातर मामले दर्ज ही नहीं हो पाते. हम आपको बता रहे हैं कि अगर आपके साथ भी साइबर क्राइम का कोई मामला या ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है तो कैसे रिपोर्ट दर्ज करवाएं और इन मामलों को कैसे हैंडल करें.

आईटी एक्ट और आईपीसी दोनों में दर्ज होते हैं मामले
साइबर क्राइम के ज्यादातर मामले इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (आईटी एक्ट) 2000 के तहत दर्ज किए जाते हैं. साल 2008 में आईटी एक्ट में संशोधन हुआ है. हालांकि कई मामलों में आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) दोनों की धाराओं में मामले दर्ज किए जाते हैं. इससे साफ है कि साइबर क्राइम के सभी मामलों को सिर्फ आईटी एक्ट ही कवर नहीं करता है. बल्कि आईपीसी में भी केस बनता है.

कैसे दर्ज कराएं रिपोर्ट
साइबर क्राइम की शिकायत भी पुलिस स्टेशन में ही कराई जाती है. प्रक्रिया दूसरे अपराधों में मामला दर्ज कराने जैसा ही है. हर थाने में साइबर क्राइम सेल होती है. अगर आपके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर क्राइम का कोई मामला हुआ है तो आप साइबर सेल के पास अपनी शिकायत लिखवा सकते हैं. ‘मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स’ भी महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले ऑनलाइन क्राइम के खिलाफ सख्त है. मिनिस्ट्री इसके लिए अपनी वेबसाइट लॉन्च करने जा रही है. अगर पुलिस शिकायत लिखने से इंकार करती है तो आप सीधे कमिश्नर और एसपी के पास कंप्लेंट लेकर जा सकते हैं.

किन मामलों में लगती है क्या धाराएं
हैकिंग, डेटा चोरी, वायरस अटैक और किसी कोड से छेड़छाड़ कर रैनसमवेयर अटैक को अंजाम देने के मामले में आईटी एक्ट के सेक्शन 66 और सेक्शन 43 के तहत केस दर्ज होता है. जबकि क्रेडिट और डेबिट की चोरी, क्लोनिंग, मोबाइल सिम कार्ड फर्जीवाड़ा और इससे जुड़े मामलों में आईपीसी की धाराओं में केस दर्ज किया जाता है. इन मामलों में आईपीसी के सेक्शन 463 और सेक्शन 471 में केस दर्ज किया जाता है.

ऑनलाइन धोखाधड़ी और चाइल्ड पोर्नोग्राफी
ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में आईटी एक्ट के सेक्शन 66डी के तहत केस दर्ज किया जाता है. इसी तरह, अश्लीलता के मामलों में आईपीसी के साथ ही आईटी एक्ट की धारा 66ई, 67 और 67 A के तहत मामले दर्ज होते हैं. पोर्नोग्राफी और चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों आईटी एक्ट की धारा 67A और 67 B में केस दर्ज होता है. इसमें बाद मों POCSO एक्ट भी लगाया जा सकता है. चाइल्ड पोर्न को पब्लिश करना, बांटना, बेचना ब्राउजिंग और डाउनलोड करना भी आईटी एक्ट के तहत क्राइम है.

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