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सर्द ऋतु में त्वचा की देखभाल

नवम्बर माह को सर्दियों का प्रारम्भ माना जाता है। अक्तूबर माह के आखिरी सप्ताह में रोजमर्रा का तापमान गिरना शुरू हो जाता है तथा दिन के अधिकतम तथा न्यूनतम तापमान में भी गिरावट आनी शुरू हो जाती है।
अक्तूबर के पहले सप्ताह में ऊंची हिमालयी पर्वत श्रख्लाओं पर सीजन की पहली बर्फबारी शुरू होती है तथा इस बर्फवारी के बाद पहाड़ों के साथ-साथ मैदानी ईलाकों में भी ठण्ड का आगाज हो जाता है। हिमालयी पर्वतीय क्षेत्रों की ठण्डी हवाओं से तापमान में गिरावट के साथ ही मौसम में नमी में कमी आ जाती है तथा ठण्डी हवाओं के झोंको से त्वचा में रूखापन तथा लालगी झलकनी शुरू हो जाती है। वातावरण में अचानक बदलाव से त्वचा खोपड़ी, होठों तथा नाखून बूरी तरह प्रभावित होते हैं। सर्द ऋतु की तेज हवाओं से त्वचा शुष्क तथा पपड़ीदार होने के साथ ही होठों का फटना भी शुरू हो जाता है।
सर्द मौसम के शुरूआती दिनों में त्वचा को क्रीम, माइस्चराईजर, फलों, पेय पदार्थो तथा उचित पोषाहार के माध्यम से नमी तथा आर्द्रता प्रदान की जानी चाहिए। सर्दियों के माह के आरम्भ में मौसम में आर्द्रता की कमी से त्वचा में खिंचाव आना शुरू हो जाता है। जैसे ही वातावरण में ही आर्द्रता कम होना शुरू होती है वैसे ही शुष्क तथा फोड़े, फुन्सी से ग्रसित त्वचा के लिए परेशानियों का सबब शुरू हो जाता है।
अगर आप अपनी रसोई तथा किचन गार्डन से कुछ पदार्थो का सही उपयोग करे तो त्वचा से सम्बन्धित सभी परेशानियों को प्राकृतिक तरीके से आसानी से उपचार किया जा सकता है।
सर्दियों में सामान्य तथा शुष्क त्वचा को सुबह तथा रात्रि में क्लीजिंग क्रीम तथा जैल से ताजे सामान्य पानी से धोना चाहिए। इस मौसम में त्वचा की आर्द्रता वातावरण में मिल जाती है तथा त्वचा को खोई हुई आर्द्रता को प्रदान करना अत्याधिक आवश्यक होता है।
त्वचा में आर्द्रता तथा नमी की लगातार कमी से त्वचा में रूखापन, पपड़ी, खुरदरापन तथा लालगी आनी शुरू हो जाती है। रात्रि में त्वचा से मेकअप तथा प्रदूषण की वजह से नमी गन्दगी को हटाने के लिए त्वचा की क्लींजिंग अत्याधिक जरूरी हो जाती है। त्वचा पर क्लींजर की मदद से हल्के से मालिश कीजिए तथा गीली काटन वूल से साफ कर दीजिए। गीली काटन वूल त्वचा से किसी भी प्रकार की नमी को नहीं सोखती जिसकी वजह से त्वचा में शुष्कता को रोकने में मदद मिलती है। सुबह सवेरे त्वचा की क्लीजिंग के बाद त्वचा को गुलाबजल आधारित स्किन टाॅनिक या गुलाब जल0 से काटनवूल की मदद से टोन कीजिए। टोनिंग की बवजह से त्वचा में रक्त संचार बढ़ता है।
सर्दियों के मौसम में दिन के समय त्वचा को धूप की किरणों से बचाने के लिए सनस्क्रीन का उपयोग कीजिए। सूर्य की तपिस की वजह से त्वचा में नमी में कमी आ जाती है। अधिकतर सनस्क्रीन में माईस्चराईजर विद्यमान होते है। माइस्चराईजर क्रीम तरल पदार्थ के रूप में उपलब्ध होते है। तरल माइस्चराईजर को फाउंडेशन लगाने से पहले प्रयोग करना चाहिए। जब भी त्वचा में रूखापन बढ़ना शुरू होता है तभी त्वचा पर द्रव्य माईस्चराईजर का प्रयोग कीजिए। रात्रि को त्वचा को नाईटक्रीम से पोषित करना चाहिए। त्वचा पर नाईटक्रीम लगाने से त्वचा चिकनी तथा मुलायम हो जाती है। जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है। त्वचा की क्लींजिंग के बाद त्वचा पर पोषक क्रीम लगाकर त्वचा के उपरी तथा नीचले हिस्सों में अच्छी तरह मालिश करनी चाहिए तथा इसके बाद क्रीम को गीली काटन वूल से साफ करना चाहिए। आंखों की बाहरी त्वचा के इर्द-गिर्द क्रीम लगाकर 10 मिनट बाद इसे गीले काटन वूल से धो डालना चाहिए। अक्सर तैलीय त्वचा को सतही तौर पर रूखेपन की समस्या से रूबरू होना पड़ता है। तैलीय त्वचा साफ करने के तुरन्त बाद रूखी बन जाती है। लेकिन अगर इस त्वचा पर क्रीम या माइस्चराईजर की मालिश की जाए तो फोड़े, फुन्सियों आदि उभर आती है।
इस त्वचा में रूखेपन की समस्या के निदान के लिए क्लीजिंग मिल्क, फेशवाश या हल्के माइस्चाराईजर लोशन का उपयोग किया जा सकता है। इस त्वचा पर तेल रहित क्रीम लगाने से भी राहत मिलती है।
तैलीय त्वचा के बाहरी रूखेपन से निपटने के लिए चेहरे पर प्रतिदिन दस मिनट तक शहद लगाकर इसे साफ ताजे पानीसे धो डालिए।
होंठों की त्वचा अत्यन्त संवेदनशील होती है तथा इस त्वचा पर तैलीय ग्रन्थियों की कमी होती है जिसमें अक्सर होंठ सूख जाते है। होंठों को साफ पानी से धोने के बाद होठों पर बादाम तेल या बादाम क्रीम की मालिश करके इससे रात्रि भर रहने दीजिए इससे होठों की त्वचा मुलायम होगी होंठों पर बाम लगाने से भी होंठ मुलायम हो जाते है।
घरेलू उपाय:
सामान्य त्वचा को मुलायम तथा कोमल बनाने के लिए प्रतिदिन दस मिनट चेहरे पर शहद लगाकर इसे साफ एवं ताजे पानी से धो डालिए। शुष्क त्वचा के लिए शहद में अण्ड़े का पीला भाग या एक चम्मच शुद्ध नारियल तेल डालकर त्वचा को मालिश कीजिए। तैलीय त्वचा के लिए शहद में अण्डे़ का सफेद हिस्सा तथा कुछ बूंदे नींबू जूस डालकर त्वचा की मालिश कीजिए। सेब के छिल्के तथा गूदा भाग को बलेंडर में पूरी तरह पीस कर लेप बना लीजिए। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर फेश मास्क की तरह लगाइए तथा इसके बाद ताजे ठण्डे पानी से धो डालिए। यह सभी प्रकार की त्वचा के लिए अत्याधिक प्रभावी स्किन टोनर साबित होता है। धृतकुमारी सबसे प्रभावकारी माइस्चराईजर है। प्रतिदिन चेहरे पर ऐलोवेरा जेल लगाकर चेहरे को 20 मिनट बाद ताजे साफ पानी से धो डालिए। यदि आपके घर आंगन में धृतकुमारी का पोधा उगा है तो आप पौधे से सीधे जैल या जूस चेहरे पर लगा सकते है।
एलोवेरा जैल पत्तियों के बाहरी भाग के बिल्कुल नीचे विद्यमान रहता है। यदि आप इसे अपने आंगन से सीधा प्रयोग में ला रहे है तो पौधे को साफ करना कतई न भूले।
आधा चम्मच शहद एक चम्मच गुलाब जल तथा एक चम्मच सुखा दूध पाउडर मिलाकर इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाकर 20 मिनट बाद इसे ताजे साफ पानी से धो डालिए।

शहनाज हुसैन, लेखिका विश्व ख्याति प्राप्त सौंदर्य विशेषज्ञ

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