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व्यंग्य : सेल्फी विद प्रदूषण

देश की राजधानी में इन दिनों फोग चल रहा है। दिल्ली ठंड के साथ प्रदूषण के कारण भी कांप रही है। प्रदूषण काल बनकर दिल्ली की सड़कों पर नंगा नाच कर रहा है। इस बीच दिल्ली में एक नये अभियान का शुभारंभ हो गया है। इस अभियान का नाम सेल्फी विद डॉटर की तर्ज पर सेल्फी विद प्रदूषण रखा गया है। जनसेवक बारी-बारी से अपनी महंगी कार से उतरकर प्रदूषण के साथ सेल्फी खींचकर दुःख जता रहे है। कुछ जनसेवक तो ऐसे भी जिन्होंने अपना बोरियां बिस्तर पहले ही पेक कर लिया है। न जाने कब जान बचाकर भागना पडे। इनसे ज्यादा सच्चा जनसेवक ओर कौन होगा ? बेचारी ! आम पब्लिक का जीना दूभर हो रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि इससे तो अच्छी गुलामी थी, खुलकर सांस तो ले सकते थे। आज तो प्रदूषण के मारे वो भी लेना हाथ की बात नहीं रही। दिल्ली में प्रदूषण इतना क्यों बढ रहा है ? इसलिए क्योंकि प्रदूषण मुक्त भारत का वायदा किसी पार्टी के मेनिफेस्टो में शामिल नहीं है।

दरअसल, नेता भी प्रदूषण के लिए कम जिम्मेदार नहीं है। जितना प्रदूषण वाहन के धुएं से नहीं होता, उतना तो प्रदूषण नेताओं के भाषणों से होता है। कितना चिल्लाते है ये लोग। इस ध्वनि प्रदूषण से ही दिल्ली बैरी हो गई है। इस कारण दिल्ली जरा ऊंचा सुनती है। प्रदूषण पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरु हो गया है। खबरिया चैनलों पर एयर कंडीशनर चैंबरों में बैठे पार्टी के प्रचारक अपने को और अपनी पार्टी को सबसे बडा पर्यावरण प्रेमी बताने में ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे है। बीजेपी वाले कह रहे है प्रदूषण तो कांग्रेस के समय से फैलता आ रहा है। हमारे मोदी जी तो विदेशों में थे, जब दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा था। तो वहीं कांग्रेस वाले कह रहे है प्रदूषण तो बीजेपी वालो की ही देन है। हमने तो इस बार पटाखे भी नहीं फोडे, फिर भी सारा दोष हम पर मढा जा रहा है। वहीं दो बिल्लियों के बीच बंदर का काम करने वाली आम आदमी पार्टी दोनों को आपस में लडाके प्रदूषण मुक्त भारत का दम भर रही है। क्योंकि ऑड इवन के जनक तो ये ही है। इन्द्रप्रस्थ नरेश अरविंद केजरीवाल इस गंभीर समस्या पर इतने गंभीर है कि उन्होंने प्रदूषण के बढते कहर को देखकर अपने गले के मफलर को मुंह पर बांध दिया है। अपना काम बनता भाड में जाएं जनता का नारा इन्होंने ही तो दिया है।

प्रदूषण के बढने के कारण बाबा रामदेव भी व्यथित दिख रहे है। बाबा जी जल्द ही पतंजलि खिचड़ी के साथ प्रदूषण मुक्त वाहन पतंजलि कार को मार्केट में लांच कर देंगे। ऐसी आशा है। जो पेट्रोल डीजल से नहीं चलकर गंगाजल से चलेगी। खैर ! आपने एक बात नोटिस की क्या ? आखिर दिल्ली में ही बार-बार प्रदूषण पेट्रोल और डीजल के भावों की तरह क्यों उछाल मार रहा है। क्योंकि दिल्ली में पाप बढ रहा है। दिल्ली पापियों की धरती हो चुकी है। यह प्रदूषण तभी मिटेगा जब पापियों की संख्या कम होंगी। इन पापियों की संख्या कम कौन करेगा ? क्या बाजार में इनके लिए भी कोई डी.डी.टी का छिडकाव उपलब्ध है ? इनका इलाज तो जनता ही कर सकती है। यदि जनता को अपनी जान बचानी है तो अगले चुनाव में ऐसे नेता को वोट दे जो प्रदूषण मुक्त का वायदा करे। जो सेल्फी प्रेमी न होकर असल मयानों में प्रकृति प्रेमी हो।

जिस ताजी हवा ने आपको प्रसन्नचित किया। आपकी प्रेमिका की जुल्फें उड़ाई और उन्हें उड़ती जुल्फों को देखकर आप शायर बने। आज वहीं हवा आपके लिए फांसी का फंदा बनती जा रही है। क्योंकि आप भी इसके लिए कम दोषी नही है। आपने भी सुबह सुबह लोटा लेकर खेत की मेढ़ पर मृदा की उवर्रक क्षमता बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की हैं।

 

देवेंद्रराज सुथार
संपर्क – गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। 343025

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