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विश्व मधुमेह दिवस, 14 नवम्बर : आधुनिक जीवनशैली की देन है शुगर की बीमारी

मधुमेह या डाइबिटीज जिसे बोलचाल की भाषा में शुगर भी कहा जाता है आखिर है क्या जिसकी चर्चा आजकल घर घर में सुनी जा रही है। बच्चे से बुजुर्ग तक हर आयु का व्यक्ति इस बीमारी का शिकार हो रहा है। अस्पतालों और जाँच केंद्रों पर मधुमेह के रोगी बड़ी संख्या में देखे जा रहे है। भारत में हर पांचवें व्यक्ति को इस बीमारी ने घेर रखा है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या सात करोड़ को पार कर चुकी है जबकि लगभग आठ करोड़ लोग प्रि डाइबिटीज है।
मधुमेह पहले अमीरों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन आज इसने हर उम्र और आय वर्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। एक दशक पहले भारत में मधुमेह होने की औसत उम्र 40 साल थी, जो अब 25-30 साल हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2016 में दुनिया में मधुमेह रोगियों की संख्या 37.1 करोड़ हो गई है और 2030 तक यह संख्या 55 करोड़ पार कर जाएगी।
भारत में 2015 में लगभग 7 करोड़ लोग इससे पीडित थे। अब गरीब तबके के लोग भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई स्वास्थ्य संगठनों ने यह अनुमान लगाया है, कि भारत में साल 2030 तक मधुमेह से पीड़ितों की संख्या लगभग 10 करोड़ और 2035 तक 10.9 करोड़ तक पहुंच सकती है।
स्वस्थ व्यक्ति में खाने के पहले ब्लड में ग्लूकोस का लेवल 70 से 100 एमजी डीएल रहता है। खाने के बाद यह लेवल 120-140 एमजी डीएल हो जाता है और फिर धीरे-धीरे कम होता चला जाता है। मधुमेह हो जाने पर यह लेवल सामन्य नहीं हो पाता और बढ़ता जाता है। मधुमेह एक गंभीर मेटाबॉलिक रोग है जो अग्नाशय द्वारा इंसुलिन कम उत्पन्न करने या इंसुलिन न उत्पन्न कर पाने की स्थिति में होती है। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन को पचाने के लिए आवश्यक है। इंसुलिन का काम ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं में पहुंचाना है। पर्याप्त इंसुलिन के बिना ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता है, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, इसे ही डायबिटीज या मधुमेह कहते हैं। बार-बार पेशाब लगना, ज्यादा प्यास और भूख लगना, जल्दी थकान और आखों की रोशनी कम होना, घावों का जल्दी नहीं भरना, अंगुलियों व पैर के अंगूठे में दर्द रहना, वजन कम होना, कमजोरी व अनिद्रा का शिकार होना आदि मधुमेह के प्रमुख लक्षण हैं।
भारत को मधुमेह की खान कहा जाता है। मधुमेह रोग वैश्विक और गैर. संचारी महामारी का रूप धारण कर चुका है। भारत में व्यस्त एवं भागमभाग वाली जिंदगी, खानपान की खराबी तनावपूर्ण जीवन, स्थूल जीवन शैली, शीतल पेय का सेवन, धूम्रपान, व्यायाम कम करने की आदत और जंक फुड का अधिक सेवन, मोटापा के कारण मधुमेह का प्रकोप बढ़ रहा है। बच्चों का अब खेलकूद के प्रति रूझान घटना और मोबाइल कंप्यूटर खेलों की तरफ बढ़ना टीवी से चिपके रहना और जंक फूड खाने से बच्चे भी इस रोग के शिकार हो रहे हैं। मधुमेह एक तरह की स्थायी बीमारी है जिसमें जीवन भर उपचार की जरूरत पड़ती है इसके कारण मरीज और उसके परिवार पर आर्थिक भार पड़ता है।
मधुमेह रोगियों की संख्या में निरन्तर हो रही वृद्धि को देखते हुए 1991 में विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं इण्टरनेशनल डायबिटीज फेडेरेशन ने प्रति वर्ष 14 नवम्बर को विश्व मधुमेह डायबिटीज , दिवस आयोजित करने का निर्णय लिया । विश्व मधुमेह दिवस प्रतिवर्ष 14 नवंबर को सर फ्रेडरिक बैंटिंग के जन्मदिवस पर मनाया जाता है । जिन्होंने अपने सहयोगी के साथ मिलकर इंसुलिन की खोज की थी तथा जिसका पहली बार मनुष्यों के ऊपर उपयोग किया गया था। यह दिवस प्रतिवर्ष सारे विश्व में मधुमेह से प्रभावित बढ़ते रोगियों में जागरूक फैलाने के लिए मनाया जाता है।
ऐसा भी नहीं कि यह बीमारी प्राचीन युग में नही थी। इस बीमारी का लिखित प्रमाण 1550 ई.पू. का मिलता है। मिस्र में ‘पापइरस कागज’ पर इस बीमारी का उल्लेख मिलता है, जिसे जार्ज इबर्स ने खोजा था। इस दस्तावेज को ‘इबर्स पपाइरस’ भी कहते हैं। दूसरा प्राचीन प्रमाण ‘कैपाडोसिया के एरीटीयस द्वारा दूसरी सदी का मिलता है। एरीटीयस ने सर्वप्रथम ‘डायाबिटिज’ शब्द का प्रयोग किया, जिसका ग्रीक भाषा में अर्थ होता है ‘साइफन’। उनका कहना था कि इस बीमारी में शरीर एक साइफन का काम करता है और पानी, भोजन, कुछ भी शरीर में नहीं टिकता ओर पेशाब के रास्ते से निकल जाता है, बहुत अधिक प्यास लगती है। 400-500 ई.पू. के काल में भारतीय चिकित्सक चरक एवं सुश्रुत ने भी इस बीमारी का जिक्र अपने ग्रन्थों में किया है। संभवतः उन्होंने सर्वप्रथम इस तथ्य को पहचाना कि इस बीमारी में मूत्र मीठा हो जाता है। उन्होंने इसे ‘मधुमेह’ नाम दिया। उन्होंने देखा कि इस रोग से पीड़ित व्यक्ति के मूत्र पर चीटियाँ एकत्रित होने लगती हैं। उन्होंने दो प्रकार के मेह की चर्चा की है-उदक (जल) मेह और इक्षु (गन्ना) मेह जिसे आजकल हम ‘डायबिटीज इनसीपीडस’ और ‘डायबिटिज मेलाइट्स’ के नाम से जानते हैं।
मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिससे गरीब और अमीर सभी वर्गों के व्यक्ति सामान रूप से प्रभावित है। मगर इसकी मार गरीबों पर सबसे ज्यादा पड़ती है। मधुमेह को खत्म तो नहीं किया जा सकता है पर उसे नियंत्रित अवश्य किया जा सकता है। इसके लिए कई इलाज है पर प्राकृतिक इलाज सबसे बेहतर है, जिसमे योग की बड़ी महत्ता है। रोज सुबह उठकर प्राणायाम, व्यायाम व आसन करने से इस पर नियंत्रण किया जा सकता है।

– बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी-32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

 

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