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व्यंग्य : माता – पिता बना रहें हैं . …….मिक्स वेज

आज विद्यालय में प्रत्येक विदयार्थियों के माता – पिता को आमंत्रित किया गया था । मैं भी येन-केन प्रकारेण काम-काज निपटा कर विद्यालय जा पहुँची और मुझे देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि दुनियाभर की व्यस्तता सिर्फ़ मुझे ही है । गौर किया तो पाया वहाँ उपस्थित सभी माता -पिता नामक विचित्र प्रजाति सभी व्यस्तता नामक तथ्य से पीड़ित हैं और वो सब भी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यस्त इंसान हैं । कुछ देर जब हम विद्यालय में बैठे तो विभिन्न माता – पिता के प्रजाति से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ ।

न्यूटन प्रजाति …
इस प्रकार के माता – पिता अपने 4 साल के नन्हे से बच्चे को महान वैज्ञानिक मानते हैं । कहते हैं ” मेरा बेटा का दिमाग तो न्युटन की तरह तेज़ है बस पढ़ता ही नहीं है । ”

भूल-भूलैया प्रजाति….
बड़े शान से इस प्रकार के मात-पिता के प्रजाति को कहते सुना है – अरे क्या बताऊँ बहन मेरा बेटा तो रात – दिन पढ़ – पढ़ एक कर रहा है । दिमाग तो न्युटन की तरह तेज़ है । बस वो भूल जाता है । बाकी तो सब ठीक है ।

तारे ज़मी पे प्रजाति…
इस प्रकार के प्रजाति के माता – पिता अपने बच्चे को धोनी , सिंघम , लता , चाचा चौधरी , इंजीनियर , डॉ , प्रोफेसर सब समझते है । कहते नहीं थकते मेरा बच्चा तारे ज़मी की तरह बच्चा है बस इंतज़ार कर रहे है सही वक्त का जब दिमाग खुल जाये । हमने भी कह दिया भाई – साहब आप तो बस आमिर खान ही हो , लगे रहो ।

कम्प्यूटरिकृत प्रजाति…
इस तरह के प्रजाति के माता – पिता बड़े ही खास स्वभाव के होते हैं । मैंने पूछा ही लिया क्यों शर्मा जी आपका कम्प्यूटर ठीक हो गया ? आपने फारमेटिंग करवा ली होगी ? तपाक से बहन जी जबाब दिया ” अरे नहीं बहन जी , शर्मा जी दुकान जा ही नहीं पाये । मेरे 3 साल के बेटे ने चुटकी बजा कर ठीक भी कर दिया । क्या बताऊँ आजकल के बच्चे कम्प्यूटर सीख कर पैदा होते हैं । पूछने पर पता चला बेटा महज 4 साल का है । न हँसते बने न रोते । क्या करती मैंने भी सहर्ष हामी भर दी ।

सपना प्रजाति …
इस प्रकार के माता – पिता से बात करने में आनंद की अनुभूति होती है । ऐसे माता – पिता सारा दिन सपना ही देखते हैं । अभी – अभी वर्मा जी मेरे बाजू में आकर बैठे । बैठे ही थे कि श्रीमती जी भी आकर अपना जगह बना कर बैठ गई । फिर क्या था सपनों का एपिसोड शुरू । मेरा बेटा डॉक्टर बनेगा , इंजीनियर भी बन सकता । सारा दिन खिलौने तोड़कर जोड़ता रहता है । तपाक से वर्मा जी बोले , अरे नहीं वो तो नासा में जायेगा । मैंने सारा प्रबंध कर रखा है । नहीं तो गुगुल का सी. ई. ओ तो बनना निश्चित है । मैं भी उनके सपनों में खो ही गई ।

अनदेखा प्रजाति ….
ऐसे प्रजाति के माता – पिता भी अनोखे ढंग के होते हैं । चलते – चलते मैंने साहू जी पूछ लिया , ” और क्या चल रहा , श्रीमती जी कैसी हैं ? ” बस कहा ही था कि बिना रोक – टोक शुरू हो गये । ” मुझे तो समय ही नहीं मिलता । काम में व्यस्त रहता हूँ । बच्चे को देख नहीं पाता । जो करता है अपने से ही करता है । बहुत अच्छा नंबर लाता है । ” श्रीमती जी भी अपना दुखड़ा लेकर बैठ गई , मौका भी था और दस्तुर भी । ” क्या बताऊँ बहन जी , दिन भर घर के काम – काज में , खाना बनाने में समय चला जाता है । मैं तो पढ़ा ही नहीं पाती । मेरा बेटा सब स्वयं ही करता है । अब सब भगवान भरोसे है । मैंने मन ही मन कहा अनदेखा बच्चा तो भगवान भरोसे ही पलते हैं ।

बीमार प्रजाति ….
ऐसे माता – पिता बस रोते – गाते नज़र आते हैं । अब अपने पड़ोसी तिवारी जी को ही देख लो । आज बैठक में आये हैं । साथ में पूरी मेडिकल रिपोर्ट मुँह जुबानी याद भी है । कहते नहीं थकते , हम तो शुगर की बीमारी से परेशान हैं । कमर में भी दर्द रहता है । घुटने में दर्द तो पुरानी है । अभी तो बी . पी भी हो गया है । सर्दी – खाँसी तो बारह महीनों लगा रहता है । कल ही हॉस्पिटल से लौटे हैं । पर बच्चा , सबमें नंबर वन । वाह रे नमूने ।

सिद्धांतवादी प्रजाति…
इनकी तो बात ही निराली होती है । ऐसे माता – पिता तो अपने बच्चों को केला और चॉकलेट चम्मच से काटकर खाना सिखाते हैं । समयसारणी के अनुसार बच्चों के क्रियाकलापों का निर्धारण किया जाता है । घड़ी के काँटे की तरह इनका रह निर्देश बदलता रहता है । जैसे बच्चा न हुआ रिमोट से चलने वाले खिलौने हो गये ।

रोबोटिक प्रजाति ….
ऐसे माता – पिता तो रोबोटिक बच्चे तैयार करना चाहते है । अब मिश्रा जी को ही देख लो । सभी काम एक दम सही तरीके से करवाना इनका मकसद होता है । प्रशंसा करते नहीं थकते मेरा बेटा तो आज्ञाकारी पुत्र है । कितनी सुंदर लिखावट है , छक्के ही लगाता है क्रिकेट में , शतरंज की बाजी तो चुटकियों में जीत लेता है । फलाना और ढिकाना । बाप रे! बाप !

निंदक प्रजाति ...
तिवारी जी को ही ले लीजिए । जब भी मिलते हैं , कुशल क्षेम पुछने के वजाय पूरे मोहल्ले के बच्चों और उनके माता – पिता और ट्यूशन टीचर तक को नहीं छोड़ते । निंदा रस को मखमली चादर में लपेट कर दे मारते है दूसरों की झोली में । दुनियाभर के बच्चों में केवल इन साहब का ही बच्चा है जो हर क्षेत्र में अव्वल है । बाकी तो सब निकम्मे हैं । निंदा रस का पान करने में ये अपना शान समझते हैँ ।
अपने बाग में तथाकथित माता – पिता बच्चों को कारोबारी सामना समझते है ।

कुदरत ने जब हमारे बगीचे में जैसमीन फूल से बहार लायी है तो क्यों हम उसे तोड़ – मरोड़ कर गुलाब बनाना चाहते हैं ? क्यों हम जैसमीन को उसके खुशबू को साथ अपने जीवन में नहीं ला पाते ? हम भूल जाते हैं कि जैसमीन जो हमारी बगीया महकायेगा , दुनियाभर की आडंबरों में दिखावों में फूल को कुचलने की कोशिश में फूल से ही हाथ धो बैठ सकते हैं । हम दूसरे फूलों को न देखकर यदि अपने फूलों को ध्यान से परवरिश करें तो अपना बगीया हमेशा महकता रहेगा  बच्चों को अपने ख्वाहिशों के तवे में न सेंके वल्कि उन्हें खुले आकाश में उनके जहाँ में जीने दे । जिंदगी उनकी है हमारी नहीं । न ही वो रोबोट हैं जिसे हम अपने रिमोट से चलाएँ । बच्चों को उनके बचपने से मरहूम न किया जाय वल्कि उन्हें उनकी ही बगिया में खिलने दिया जाय । मेरे देश को अब स्वस्थ भविष्य की आवश्यकता है । कुपोषित वर्तमान से हम स्वस्थ भविष्य की नींव नहीं रख सकते । बेहतर है हम माता – पिता अब चेत जाए ।
ज्यादा पाने की कोशिश में हम उनका भविष्य अंधकारमय बनाते जा रहें हैं । कड़ाही में गोभी डाल कर आप भींडी तो बाहर नहीं निकाल सकते है । कहीं सारी सब्जियों को मिलाते – मिलाते मिक्स वेज न बन जाये आपके बच्चे । मिक्स वेज की जायकेदार रेसिपी कुछ इस तरह है । पहले सुबह उठते ही बच्चों के कढ़ाही में योगा क्लास , वहीं से खाली पेट कोचिंग क्लास से लौटते हुए स्कूल । वहीं स्कूल से लौटने के बाद , बैडमिंटन कोचिंग , डांस क्लास , ड्राइंग क्लास , फिर ट्यूशन अंत में रोज मिक्स वेज । सिंधु , सानिया , सचिन , इंजीनियर , डॉक्टर , प्रोफेसर , सब बनना है बच्चों को । ऐसा मिक्स वेज आजकल के माता – पिता हर दिन बनाते हैं । ऐसे सँवार रहे कुछ माता -पिता नामक प्रजाति । कल कहीं आपसे हम न पूछ बैठे ” क्या पक रहा है शर्मा जी ” । तब आप ये कहेंगे , ” जाने क्या पक रहा है । ” अपने असीमित ख्वाहिशों को बच्चों के वर्तमान में डालकर पकाया जाय तो मिक्स वेज बनना तो तय ही है और इक्कीसवीं सदी में बच्चों का भविष्य हम इस तरह ताक पर नहीं रख सकते ।

मल्लिका रुद्रा ” मलय – तापस “
बरतुंगा , चिरमिरी , छत्तीसगढ़

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