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हैवानियतः मासूमों की ले रहे जान, जन्मदाता बन रहे हैं हैवान

कहते हैं कि बंदर अपने मरे हुए बच्चे को उस समय तक अपने सीने से चिपटाए रखता है जब तक कि वह बिल्कुल ही सूख न जाए।चिडिया व मोर भी अपने बच्चों को जिस प्यार से पालते हैं उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन दुख होता है उस इन्सान को देखकर जो अपने को जानवरों और पक्षियों से श्रेष्ठ तो समझता है पर काम जानवरों से भी बदतर करता है। यह एक कडवी सच्चाई है कि कुछ मां-बाप अपनी औलाद के दुश्मन बन चुके है और वे उनकी जान लेने से भी नहीं हिचकते उन्हे घर में ही खतरा होता है। एक दर्दनाक घटना सीतापुर में घटित हुई थी जहां सीतापुर में एक बाप ने अपनी तीन बच्चियों को ट्रेन से फैंक दिया था उन अबोध बच्चीयों का क्या कसूर था कि बाप ने उन्हे चलती ट्रेन से फैंक दिया जिससे एक की दर्दनाक मौत हो गई थी और दो बच्चियां अस्पताल में जीवन व मृत्यु के बीच संर्घष कर रही थी।देश में हर रोज ऐसे रौगटे खडे कर देने वाले समाचार हो रहे है कहीं जहर देकर मौत की सौगात दी जा रही है तो कहीं मां बच्चे को मार देती है तो कहीं बाप हैवान बनकर बच्चो की जान ले रहे हैं।रावण व कंस को अनाचारी व अत्याचारी बताकर राक्षस की संज्ञा दी गई थी लेकिन किसी ग्रन्थ में यह उल्लेख नहीं आया है कि रावण या कंस ने अपने बच्चों को मार दिया हो। राजा मोरध्वज का एक ही उदाहरण मिलता है,जिसकी परीक्षा भगवान ने ली थी और उसने अपने पुत्र को आरे से चिरवा दिया था लेकिन भगवान ने उसे जीवित कर दिया था। इसके अलावा कोई उदाहरण नहीं मिलता है। कहने का तात्पर्य यह है कि आज का मानव राक्षस की श्रेणी में भी नहीं आता और राक्षस भी आज मानव से श्रेष्ठ था। गत वर्षो में पठानकोट व कौशाम्बी में ऐसी अनहोनी वारदातें घटित हो चुकी है। ऐसी घटनाएं मानवीय मूल्यों के पतन की कहानी बयां कर रही है कि ऐसे कौन से कारण रहे होगें कि बाप बच्चों को मौत देने पर उतारु हो रहे हैं। , बाप द्वारा किया गया है यह जघन्य अपराध बहुत ही संगीन मामला है।कैसी बिडम्वना है कि जन्मदाता ही यमराज बन रहे है देश में प्रतिदिन ऐसी खौफनाक वारदातें हो रही है कि रुह कांप उठती है।गत वर्ष कौशाम्बी में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी व तीन बेटियों पर पैट्रोल छिड़क कर आग लगा कर जिन्दा जला दिया था जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी इस जल्लाद ने घटना को अंजाम तब दिया जब यह चारों सो रही थी जो इसने इन पर पैट्रोल डालकर आग लगा दी और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया चारों के शव बुरी तरह झुलस गए थे इनमें जलकर मारी गई तीनों बच्चियां केवल बारह ,नौ व छह साल की थी जबकि उसकी पत्नी की उम्र 35 साल थी ।इन मासूमों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उनका पिता ही बेरहमी से उनकी हत्या कर देगा तथा पत्नी ने भी नहीं सोचा होगा जिसके साथ सात फेरे लिए थे वही उसका कातिल बन जाएगा और जिन्दा जला देगा । विगत वर्ष समाचार पत्रों में एक खबर के अनुसार पंजाब के पठानकोट में एक बाप द्वारा अपने दो नन्हे बच्चों को दूध में छिपकली डालकर उस दूध को बच्चों को पिलाकर मौत के घाट उतार दिया था। इस रौगटें खडे कर देने वाली घटना से प्रत्येक इन्सान स्तव्ध था कि जिस बाप के साये में बच्चे सुरक्षित होते है अगर वही उनका बेरहमी से जहर देकर मार देता है तो ऐसे बाप से तो अनाथ रहना ही अच्छा है। आज मानव इस सभ्यता के युग में इतना असभ्य हो चुका है कि जानवरों से भी उसकी तुलना करने में शर्म आती है।, बाप द्वारा किया गया है यह जघन्य अपराध बहुत ही संगीन मामला है। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों व आंकडों के मुताबिक 31 जुलाई 2013 को गुजरात के अहमदाबाद शहर में एक बाप ने अपनी दो बच्चियों पर पैट्रोल छिडकर जिन्दा जला डाला यह हैवान आटोरिक्शा में बच्चियों को स्कूल छोडने जा रहा था मगर रास्ते में उसने दोनों बेटियों पर पैट्रोल डालकर मार दिया जिससे घटनास्थल पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। स्कूल जा रही इन मासूमों ने कल्पना भी नहीें की होगी कि जिस बाप के साथ वे स्कूल जा रही है , वह उनको मौत देने ले जा रहा है । 2012 में हिमाचल के मंडी जिला की तहसील करसोग में भी एक हत्यारे बाप ने अपने बच्चे को पहाडी से फैंककर मौत के घाट उतार दिया था। 2009 में उतर प्रदेश के गाजियाबाद में एक बाप ने अपने पांच बच्चों को मौत के घाट उतार दिया था। नोएडा में भी एक बाप ने अपनी दो बच्चियो जिनकी उम्र अभी दो और तीन साल थी इनके बाप ने रात को गला रेतकर इन अबोध को मौत की नींद सुला दिया। गाजियाबाद जिलें के मुरादनगर कस्बें में एक बाप ने अपनी दो मासूम बच्चियों को नहर में फैंक दिया था जिससे उनकी मौत हो गई मगर उन बच्चियों की लाशें तक बरामद नहीं हो सकी थी। यह कलयुग का घेार पतन है कि बाप अपने लाडलो व जिगर के टुकडों को बेरहमी से जानवरों की तरह काट रहे है। समाज में फैल रही ऐसी बारदातों को अविलम्ब रोकना होगा क्योकि इन मामलो से एक अराजक माहौल के पनपने का अदेशा लग रहा है कि यदि बाप के पास ही बच्चे सुरक्षित नहीं है तो कहां सुरक्षित रहेगें। यह एक यक्ष प्रशन बनता जा रहा है।ज्यादातर मामलों में बच्चियों को मौत के घाट उताराजा रहा है क्योकि आज भी लडकी केे जन्म पर मातम मनाया जाता है गत वर्ष पंजाब में एक हैवान बाप ने शराब के नशे में अपनी नवजात बच्ची को मारने की कोशिश की तो बच्ची की मां ने जान पर खेलकर उस नवजात को छुडाया था।ऐसे कौन से कारण है कि बाप अपने ही चिरागों के खून के प्यासे हो रहे है। जल्लाद बनकर मौत बांट रहे है यह समाज का पतन है कि जन्मदाता ही मृत्युदाता बन रहे है।समाज में घ्टित इन घटनाओं से विश्वास का कत्लेआम हुआ है क्योकि इन वारदातों से विश्वास करना बहुत ही मुश्किल हो गया है। समाज को इन पर विचार मंथन करना होगा इन घटनाओं के कारण ढूढने होगें । समाज के लोगेंा को आगे आना होगा। ऐसे हत्यारे व बीमार मानसिकता के शिकार लोगों को समाज से बाहर करना होगा ।अगर समाज ने इन जल्लादों को सबक न सिखाया तो कल को यह लोग अन्य बच्चों को भी अपना शिकार बना सकते है । ऐसे लोग बाप के नाम पर कलंक है इन्हे तो सरेआम फांसी पर लटकाना चाहिए।ऐसे लोग समाज का कोढ है जिनकी बजह से समाज प्रदूषित हो रहा है। समाज को इस घटनाओं को अनदेखा नहीं करना चाहिए। अब देर नहीं करनी चाहिए ऐसे लोगों का खात्मा करने का समय आ गया है ।कानून के रखवालों को भी ऐसे कसाईयों को दण्ड देना होगा इन्हे काल कोठरियों में कैद करना चाहिए ताकि वहां अपने बरे कर्मों का पश्चाताप कर सके और तिल-तिल मर सके। समाज को शीघ्र कदम उठाने होगें ताकि आने वाले दिनों में ऐसी दिल दहला देने वाली वारदातों पर प्रतिबन्ध लग सके।यह समाज व देशहित में बेहद जरूरी है।

नरेन्द्र भारती, वरिष्ठ स्तंभकार, पत्रकार-09459047744

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