ब्रेकिंग न्यूज़

व्यंग्य : डेंगू का डंक

भगवान भले ही मरीज बनाएं पर डेंगू का मरीज किसे को ना बनाएं ! डेंगू के इलाज में जिंदगी की सारी जमापूंजी निकल जाती है। यहां तक की देह से जान भी निकल जाती है। लेकिन, डेंगू है कि ससुरा निकलना का नाम ही नहीं लेता। डेंगू है कि भ्रष्टाचार जो हठधर्मी को होकर सिर पर मौत का ताडंव करता है। ऐसे में तथाकथित भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों का सिर घूम जाएं तो फिर इस डेंगू का डंक मरीज के साथ-साथ परिवार वालों को भी ले डूबता है। गुरुग्राम के फोर्टिंस अस्पताल में सात साल की डेंगू से पीड़ित बच्ची को डेंगू ने जितना नहीं सताया होगा, उससे कई अधिक डॉक्टरों ने लाखों का बिल थमाकर उसे मरने के लिए मजबूर किया होगा। डॉक्टर को यमराज का दुश्मन कहा जाता था। लेकिन, अब लगता है कि डॉक्टरों ने यमराज के साथ गठबंधन कर लिया है। यहीं कारण है कि एक तो 16 लाख का बिल थमाने के बाद भी बच्ची को नहीं बचा पायें। दूसरी बात बच्ची की पहले ही मौत गई थी। यह बात परिवार वालों से छिपाई गई। परिवार वालों को धोखे में रखकर गर्भवती मां को झूठी तसल्ली देकर ठगते रहे। फिर जब अंत में मौत की बात कहने पडी तो इस खबर से गर्भवती मां का गर्भ भी गिर गया। यानि कि दो जनों की हत्या के दोषी है डॉक्टर। देश में भ्रष्टाचार का मच्छर हर जगह घूम रहा है। जो गरीबों के खून को बडे ही मजे लेकर चूस रहा है। इस मच्छर का डंक जिसे भी लगता है उसका इलाज भगवान ही कर सकता है। इसलिए साहब ! डेंगू से डर नहीं लगता, बिल और भ्रष्टाचार के मच्छर से लगता है। कफन बेचने वाले अस्पतालों की भारत में कोई कमी नहीं है। इन अस्पतालों का किडनी, आंख बेचने से मन नहीं भरा तो अब इन्होंने नया धंधा कफन बेचने का भी शुरू कर दिया है। निजी अस्पतालों में लूटमारी की पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ये अस्पताल लूटने का कीर्तिमान रच चुके है। सोचने की बात तो यह भी है कि किसी को सरकारी अस्पताल में अपना इलाज कराने के लिए मजबूर क्यों होना पडता है ? क्योंकि सरकारी अस्पताल के अच्छे दिन अब तक नहीं आये है। सरकार और सरकारी चीजों के उपर से लोगों का विश्वास किस कदर साफ हुआ है जैसे दूध में मलाई साफ होती है। फ्री इलाज का दावा करने वाली सरकारों का फ्री इलाज कुल 16 लाख रूपये का पडता है। ऐसा फ्री का इलाज किसी को फ्री में भी नसीब न हो। देश का स्वास्थ्य बिगडता जा रहा है। कुछ लोग दवा पर जिंदा है तो कुछ लोग दारू पर। दोनों ही चीजें आदमी को कंगाल करके छोड रही है। अब तो लोगों को पुलिस थाने से ज्यादा अस्पतालों से डर लगने लगा है। पुलिस थाने से तो चार-पांच फटके खाने के बाद भी घर वापस लौटने की गारंटी है। अस्पताल से वापसी की कोई गारंटी अब नजर नहीं आ रही है।

देवेंद्रराज सुथार
संपर्क – गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। 343025

Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Translate »
Skip to toolbar