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देश के कालेजों में बढती रेैगिगं की घटनाएं ?

माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने देश के शिक्षण सस्थानों में रैगिंग पर पूर्ण प्रतिबंध का कानून लागू किया है मगर देश में रैगिग के बढते मामलों से यह कानून मजाक बनता जा रहा हैै।सर्वोच्च न्यायलय की गाईड लाइन के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐंटी रैगिग कमेटी होनी चाहिए।कमेटी में अध्यापक,अभिभावक व नान टीचिग फैकल्टी होनी चाहिए।एंटी रैगिग नियमों का उल्लधन करने पर संस्थान की मान्यता रदद हो सकती है।प्रास्पेक्ट पर रैगिग गैर कानूनी हीै इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए।छात्रों को ऐटी रैगिग कमेटी के फोन नंबर और उससे जुडी जानकारी देने के निर्देश होने चाहिए।माननीय न्यायलय के आदेशो की धज्जियां उडाई जा रही है। ताजा घटनाक्रम में बिहार के दरभंगा के मैडिकल कालेज में एक जुनियर छात्रा के साथ रैगिग की शिकायत एमसीआई से की थी उस पर संज्ञान लेते हुए कमेटी ने रैगिग के आरोप में 61 मैडिकल छात्राओं पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 25 नवंबर तक रकम चुकाने के आदेश दिए गए है अगर जुर्माना की रकम जमा न करवाई तो आरोपी छात्राओं को कालेज से निलंबित किया जा सकता है। पूरे देश में हिमाचल का बहुचर्चित अमन काचरु रैगिगं कांड को आज भी लोग नहीं भूले हैं। इतने बडे रैगिग कांड के बाद भी यह रैगिगं का संक्रमण बढता जा रहा है । बीते वर्षो में ऐसे भयानक मामले घटित हो चुके है समाचार पत्रों के अनुसार अक्तुबर माह में कानपुर में भी रैगिग के मामले में 22 छात्रों को निलबित किया था।नोएडा में भी 10 छात्रों पर रैगिग का केस दर्ज किया था। मगर यह मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। गत वर्ष मध्यप्रदेश के भोपाल में रैगिंग से तंग आकर एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली, थी छात्रा के सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने चार लड़कियों व एक अध्यापिका को गिरफतार कर लिया था। रैगिग का यह कोई नया मामला नहीं है इस से पहले कई जघन्य वारदातें हो चुकी है। इतनी वारदातें होने के बाद भी इन घटनाओं पर रोक नहीं लग रही है। रैगिग छात्रों-छात्राओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है। रैगिग की इन वारदातों से छात्र-छात्राएं खौफजदा होते जा रहे हैं।अगर यही हाल रहा तों छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा सकतें है क्योकि इन बारदातों से अभिभावक भी अपने बच्चों को असुरक्षित समझ रहे है। मध्यप्रदेश में घटित इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दिया था देश के शिक्षण संस्थानों मेें प्रतिबन्ध के बाद भी यह मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। बीते हादसों से न तो प्रशासन ने सबक सीखा और न ही छात्रों ने सीख ली। यदि कडे कदम उठाए होते तो आज यह हादसा न होता। यह एक यक्ष प्रशन बनता जा रहा है।रैगिग की यह बीमारी विश्वविद्यालयों ,कालेजों के बाद अब स्कूलों में भी अपने पांव पसार चुकी है यदि इस पर समय रहतें रोक न लगाई तो आने वाले समय में घातक परिणाम भुगतने पडेगें। दंेश में समय-समय पर ऐसे दुखद हादसे होते रहते है मगर यह रुकनें के बजाए निर्बाध रुप से बढतें ही जा रहे हैं।एक समय था कि कालेजो में रैगिग का नाम तक नहीं था मगर पिछले कुछ सालों से रैगिग के आकडों में अप्रत्याशित बढोतरी होती जा रही है। कालेज के कुछ बिगडैल किस्म के छात्र -छात्राएं कालेज का माहौल बिगाडनें में मशगुल रहते है, ऐसे मुठठी भर असमाजिक तत्व छात्रों को अनावश्यक रुप से तंग करतंे है ऐसे उदडं छात्रो को कानून के मुताबिक सजा देनी चाहिए।आज यह रैगिगं भयानक होती जा रही है। बीते वर्ष हिमाचल के कालेजों में भी रैगिगं की वारदाते प्रकाश में आई थी जिसमें दो छात्र रैगिग का शिकार हुए थे हालांकि कालेज प्रशासन ने उन सीनियर लडकों को कालेज से निकाल दिया था पर कालेज से निकालना इसका समाधान नहीं है। केन्द सरकार व विश्वविद्यालय अनुदान आयेग को इन मामलों पर संज्ञान लेना चाहिए क्योकि यदि समय रहते कारगर कदम नहीं उठाए तो हालात बेकाबू हो जाएगें छात्र -छात्राएं रैगिग के डर से प्रवेश नही लेगें।कालेजों में अराजकता पैदा करने वाले तत्वों पर कार्रवाई करनी चाहिए।इनके कारण कई प्रतिभाएं खत्म हो रही है। ऐसे लोगों को सजा दी जाए तथा जुर्माना लगाया जाए। रैगिग का साधरण सा अर्थ एक दूसरे का परिचय जानना होता था मगर अब इसका स्वरुप बदलता जा रहा है। रैगिगं अब यातना बन गई है छात्रों को मानसिक रुप से प्रताडित किया जाता है ,मारपीट की जाती है।आज तक पता नहीं कितने छात्र-छात्राएं रैगिग के कारण असमय मौत के मुह में जा चंुके है। ऐसी भी रैगिग की छात्र पढाई तक छोड देते हैं ।आज तक हजारों छात्र इस बीमारी का शिकार हो चुके है।फिर भी यह प्रवृति रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। जनमानस को एकजुट होकर इसका खात्मा करना होगा ताकि छात्र-छात्राएं निर्भिक होकर अपनी पढाई कर सके। इस बुराई के विरुद्व एक आन्दोलन करना होगा और प्रतिभावान छात्रों को बचाना होगा।रैगिग का समूल नाश करना चाहिए ताकि यह नासूर न बन पाए।

नरेन्द्र भारती, वरिष्ठ पत्रकार, स्तंभकार -09459047744

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