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संध्या सिंह के गीत संग्रह ‘मौन की झंकार’ का लोकार्पण

लखनऊ। सुप्रसिद्ध कवियत्री संध्या सिंह के काव्य संकलन का लोकार्पण आल इंडिया कैफ़ी आज़मी सभागार निशातगंज में लोकप्रिय गीतकार ,डॉक्टर धनञ्जय सिंह की अध्यक्षता और युवा लेखिका रत्ना श्रीवास्तव के प्रबुद्ध एवं सुगठित संचालन में आयोजित हुआ।शरजाह से आई साहित्यकार और हिंदी विकिपीडिया की संचालिका मुख्य अतिथि सुश्री पूर्णिमा बर्मन ने कहा कि संध्या सिंह के गीत समाज एवं मन की गहरी परतों को खोल नारी विमर्श का एक विस्तृत अध्याय लिखते है। “कविता लोक” के द्वारा छंद को स्थापित करने में सतत प्रयासरत जाने माने कवि श्री ओम नीरव जी ने संध्या सिंह की रचनाओं को सरल शब्दों और जटिल विचारों का सम्मिश्रण बताते हुए और काव्य की कोमलता बनाये रखने के लिए अपनी शुभकामनाये दी। प्रमुख वक्ता डॉ अनिल मिश्र ने संध्या सिंह के गीतों को प्रकृति और समाज के बिम्बो के सुंदर सृजन की उपमा दी।गज़लगो ,साहित्यकार डॉ हरिओम ने कहा कि सरल शब्दों में गूढ़ विमर्श देने में संध्या सिंह के गीत सफल रहे है। रचना परिचय आत्मकथ्य में संध्या सिंह न” मौन की झंकार “को अंतर्विरोध के दौर में अपनी रचनात्मक एकाग्रता के प्रस्फुटन की संज्ञा दी।गुजरात से आये हुए विशिष्ट अतिथि वक्ताश्री राम किशोर मेहता ने संध्या सिंह की रचनाओं को मौन की सार्थक मुखरता की उपमा दी।
अध्यक्षीय भाषण में अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के संस्थापक ,कवि डॉ धनंजय सिंह ने कहा कि संध्या सिंह की सांस सांस में कविता बसती है।वह दैनिक जीवन प्रवाह की कवियत्री है।उनके बिम्ब चमत्कृत करते हुए मन मे गहरे पैठ जाते है।इस अवसर पर शहर और देश भर से आये हुए रचनाकार श्री नरेन्द्र भूषण , सुभाष राय , दयानंद पांडे निर्मला सिंह अशोक पांडे अशोक , उमा कान्त पाण्डेय, कैलाश निगम ,नलिन रंजन , शरदिंदु मुखर्जी , गोपाल नारायण श्रीवास्तव मालविका हरिओम , अशोक शर्मा अनीता श्रीवास्तव मधु चतुर्वेदी ,निवेदिता श्रीवास्तव ,आभा श्रीवा

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