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बढ़ते अग्निकांडो से सुलगते प्रश्न ?

हिमाचल प्रदेश में भीषण अग्निकांडों में आज तक अरबों के हिसाब से संम्पतियां राख के ढेरों में बदल चुकी हैं, अग्निकांडों में हजारों लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं। अग्निकांड़ों से कई परिवार तबाह हो चुके है। इन अग्निकांडों से कई प्रशन सुलगते जा रहे हैं कि इनके मुख्य कारण क्या हैं।अधिकांश कांडों में बिजली का शार्ट सर्किट ही सामने आता है मगर कुछ मामलों में लोगों की लापरवाही के कारण भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं।गत वर्षों में भीषण से भीषणतम अग्निकांड हो चुके हैं।हिमाचल में बढ़ते अग्निकांडो से लोगों के आशियाने राख हो रहे है और लोग बेघर होते जा रहे हैं।प्रदेश में प्रतिदिन आगजनी के मामले घटित हो रहे है अग्निकांडो का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है ताजा घटनाक्रम में 30 नवंबर 2017 को बंजार में आगजनी की वारदात में 55 साल का एक व्यक्ति जिन्दा जल गया यह कमरे में खाना बना रहा था कि एकदम आग की चपेट में आ गया उसे बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिला और दर्दनाक हादसे में राख हो गया।आग के कारणो का अभी पता नहीं चल पाया है।पिछले महिने मंडी जिला के बालीचैकी के डाहर में एक भीषण अग्निकांड में 122 लोग बेघर हो गए थे तथा सर्दी में रातें गुजारनी पड़ी थी इस अग्निकांड में 33 परिवार प्रभावित हुए थें।प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को 4 लाख 95 हजार की राहत राशि प्रदान की गई थी। अग्निकांड में 28 घर और 16 गौशालाएं राख में तब्दील हो गई थी।इससे करोडों की जीवन भर की पूजी पल भर में राख के ढेर में बदल गइ र्थी।यह आग दोपहर तीन बजे के आसपास लगी थी।लगभग तीन घंटे बाद दमकल वाहन पुहुचे तब तक लोगों के घर जल चुके थे।गनीमत रही की इस अग्निकांड में जान-माल का नुक्सान नहीं हुआ कोई भी हताहत नहीं हुआ।लोगों की आखों के सामने सब कुछ राख हो गया । बच्चों की किताबें राशन पानी व घर का सारा सामान धूधू कर जल गया अगर गांव में अग्निशमन केन्द्र होता तो आग पर काबू पाया जा सकता था मगर यहां कोई भी स्टेशन नहीं हैं।इससे पहले गत वर्ष 2 दिसंबर 2016 शुक्रवार दोपहर को कुल्लु के खराहल घाटी के गाहर में भीषण अग्निकांड में आठ घर जलकर राख हो गए थे जिससे 22 परिवारों के 92 लोग बेघर हो गए थे। काष्ठकुणी शैली में लकडी से बने घरों में आग तेजी से फैल गई थी और पल भर में लोगों के घर राख के ढेर में तब्दील हो गए थे। और घर का सारा सामान जल गया था दमकल विभाग ने कडी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया था ।लोगों को कडाके की सर्दी व कोहरे में खुले आसमान के तले राते गुजारनी पडी थी। प्रदेश में हुए अग्निकांडा़े में बच्चों से लेकर बुजुर्ग भी जल रहे हैं। वर्ष 2015 के नवबर में कुल्लू की सैंज घाटी के कोटला गांव में आग लगने से लगभग 100 मकान जलकर राख हो गए थे। तथा चार मासूम बच्चे भी लापता हो गए थे बाद में सुरक्षित मिल गए थे।सरकार ने भी काफी मदद की थी और स्वयंसेवी संस्थाएं भी काफी मददगार साबित हुई थी। मगर इस दर्दनाक हादसे के जख्म ताउम्र नहीं भर सकते क्योकि इस भीषण अग्निकांड़ में पूरा गांव जलकर राख हो गया था।इस भीषण अग्निकांड़ में चार मंदिर भी जलकर राख हो गए थे। दीवाली की रात को भी प्रदेश में काफी स्थानों पर आगजनी की वारदातें हुई थी।दीवाली के बाद यह भयंकर आगजनी की घटना बहुत ही दर्दनाक है। अग्निकांडों में ं बेजुवान मवेशी जिन्दा जलकर राख हो रहे हैं। पिछले दिनो नालागढ़ के बद्दी में मकान में आगजनी के कारण एक बच्चा जलकर राख हो गया था। 6 जनवरी 2008 को ऐतिहासिक मलाणा गांव में 150 घर राख हो गए थे। 24 दिसंबर 2011 को रोहड़ू में भी एक गांव जला था जिसमें80 मकान राख हो गए तथा 200 मवेशी मारे गए थे।27 जनवरी 2014 को शिमला में 110 साल पुरानी ब्रिटिश हकुमत की सबसे भव्य हैरीटेज बिल्डिंग गाॅर्टन कैसल आग की भेंट चढ़ गई इस ईमारत में एजी का कार्यालय था इस अग्निकांड में राज्य के 70 हजार पैशनधारकों का रिकार्ड जलकर राख हो गया था गाॅटन कैसल के कुल 266 कमरों मे से अधिकतर कमरे क्षतिग्रस्त हो गए थे।अग्निकांडों में कई ऐतिहासिक धरोहरें राख हो चुकी हैं। हैं।कुछ साल पहले गोहर उपमंडल में आग के कारण पूरा क्योली गांव जल गया था आग एक घर से दूसरे घर में फैलती गई और देखते ही पूरा गांव राख के ढेर में तब्दील हो गया। इस गांव के अधिकांश घर लकडी के बने थे तभी इतना बडा नुक्सान हुआ। 16 नवबर 2013 को शिमला के जाखू के समीप रिच मांउट में एक स्टोर मंे आग लगने से एक व्यक्ति की जलकर मौत हो गई थी। 26 नवबर 2013 को किन्नौर के निचार में आग लगने से दस घर आग की चपेट में जलकर राख हो गए इनमें सात परिवार रहते थे आगजनी में 51 कमरे आग की भेंट चढ़ गए थे। लोागों की मशक्कत की वजह से 20 घर जलने से बच गए। इस आगजनी में आग की चपेट में आने से एक व्यक्ति का हाथ जल गया और दूसरे का सिर फट गया और गंम्भीर चोटें आई थी। कुछ पशु भी जलकर मारे गये।इस आगजनी में लाखों का नुक्सान हुआ था। लोगों ने आग बूझाने के लाख प्रयास किये मगर दस घर सामने ही धू-धू करके जलकर खाक हो गए थे। बंजार उपमंडल की खाबल पंचायत में आग लगने से छह कमरों का मकान जलकर राख हो गया था। हैं।कुछ साल पहले गोहर उपमंडल में आग के कारण पूरा क्योली गांव जल गया था आग एक घर से दूसरे घर में फैलती गई और देखते ही पूरा गांव राख के ढेर में तब्दील हो गया। इस गांव के अधिकांश घर लकडी के बने थे तभी इतना बडा नुक्सान हुआ। ।लोगों को खुले आसमान के तले रात गुजारनी पडी़ थी। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट ही निकलता था यह भंयकर अग्निकांड़ 2001 में हुआ था।सराज के क्योली गांव में हुए अग्निकांड़ में पुरा गांव जल गया था इसमें 50 से अधिक परिवार बेघर हो गए थे। आकडें बताते है कि 2002 से लेकर 2011 तक 8000 अग्निकांड़ हो चुके है और इसमें 40 अरब की संम्पति राख हो चुकी है। इन घटनाओं में 89 लोग जलकर मारे गए जबकि 3876 के लगभग जंगली जानवर व पशु भी मारे गए। 2012 से लेकर नवंबर 2017 में भी इन में कमी नहीे आई है बल्कि इनमें बेतहाशा वृद्वि हो रही हंै । प्रदेश में कई आलिशान मकान व ईमारतें जलकर भस्म हो चुकी हैं। ।सरकारी भवनों से लेकर आम आदमी के घर राख होते जा रहे औद्यौगिक क्षेत्र बद्दी में एक दवा फैक्टरी में आग लगने से चार करोड़ का नुक्सान हुआ था।फायर बिग्रेड कर्मियों ने आठ घटों की मशक्कत के बाद आग की लपटों पर काबू पाया था।गनीमत रही कि कोई जानी नुक्सान नहीं हुआ। हर साल अरबों की संम्पति आगजनी की भेट चढ़ रही है मगर सरकार इसके बचाव में कारगर कदम नहीं उठा रही है केवल माल एक तिरपाल व थोड़ी सी राहत राशि देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर अपना फर्ज निभा रही है लेकिन जिसका आशियाना जलता है उसके जख्म ताउम्र रिसते रहतें हैं।केवल मात्र मकान ही नहीं जलता उसमें हजारों स्मृतियां जलती हैं। प्रदेश में गौशालों में हुए अग्निकांडों में हजारों मवेशी व बैल ,गायें, व घोड़े जल कर मारे जा चुके है। हंालाकि दमकल कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर कुछ सम्पति को बचा लेतें हैं मगर कई दमकल कर्मी भी जान से हाथ धो चुके हैं।कुछ साल पहले गोहर उपमंडल में आग के कारण पूरा क्योली गांव जल गया था आग एक घर से दूसरे घर में फैलती गई और देखते ही पूरा गांव राख के ढेर में तब्दील हो गया। इस गांव के अधिकांश घर लकडी के बने थे तभी इतना बडा नुक्सान हुआ। ।लोगों को खुले आसमान के तले रात गुजारनी पडी़ थी। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट ही निकलता है समझ नहीं आता कि हर बार शार्ट सर्किट के कारण ही आग लगती है, प्रदेश में हर जिले में आगजनी की वारदाते हो रही हैं ज्यादरतर मामले गांव में घटित हो रहे हैं। लोगो को भी चाहिए कि घरों में गल-सड़ चुकी बिजली की तारों को बदलवा देना चाहिए ताकि कोई अप्रिय हादसा न हो सके। पूरी तरह सर्तकता बरतनी चाहिए तथा विभाग को सूचित करना चाहिए। ज्वलनशील पदाथों को घर से दूर रखना चाहिए,और पशुओं का चारा व घास बगैरा भी गौशालाओं से काफी दूर रखना चाहिए क्योकि ऐसी सूखी चीजें जल्दी आग पकडती है, अक्सर देखा गया है कि सरकारी व निजी भवनों में आग बूझाने के यन्त्र ही नहीं होते हैं।स्कूलों व कालेजों में भी ऐसी व्यवस्था कम ही है जबकि स्कूलों में कई भयानक अग्निकांड़ हो चुके हैं। प्रशासन का चाहिए कि प्रत्येक सरकारी व प्राईवेट दफतरों में अग्निशमन यन्त्र उपलव्ध करवाए जाए ताकि तबाही कम हो सके, बिजली विभाग को समय-समय पर बिजली के खम्भों व तारों का निरिक्षण करते रहना चाहिए सरकार को चाहिए कि प्रत्येक गांव में आपदा कमेटियां गठित की जाए तथा उन्हे अग्निशमन का प्रशिक्षण दिया जाए ताकि भविष्य में होने वाली घटनाओं पर काबू पाया पा सके।सरकार द्वारा दिया जाने वाली राहत राशि में वृद्वि करनी चाहिए ताकि गरीब लोग फिर से अपने मकान बना सके मगर यह राशि उंट के मुह में जीरे के समान होती है जिससे आगजनी की भरपाई नहीं हो सकती। प्रदेश के लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी तभी ऐसे अग्निकांड़ रुक सकते हैं।अन्यथा आशियाने जलकर राख होते रहेगें।। सरकार ने जिला मुख्यालयों में तो अग्निशमन केन्द्र स्थापित किये है लेकिन जब तक यह गांव में पहुचते हैं तब तक मकान जलकर राख हो जाते है। सरकार को प्रत्येक बडे़- बडे़ शहरों से लेकर गांव तक छोटे-छोटे केन्द्र खोलने चाहिए ताकि आगजनी की घटनाआंे पर काबू पाया जा सके। सरकार को चाहिए कि प्रत्येक गांव में आपदा कमेटियां गठित की जाए तथा उन्हे अग्निशमन का प्रशिक्षण दिया जाए ताकि भविष्य में होने वाली घटनाओं पर काबू पाया पा सके।

नरेन्द्र भारती,
स्वतंत्र पत्रकार स्तम्भकार

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