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कांग्रेस के लिये भस्मासुर बनते अपने ही नेता

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को नीच कह कर राजनीती के स्तर को धरातल पर ला दिया है। इससे पूर्व 2014 के लोकसभा चुनाव में अय्यर ने मोदी को चाय बेचने वाला कभी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता बोल कर पूरे लोकसभा चुनाव की धारा ही बदल दी थी। मोदी ने लोकसभा चुनाव को अमीर बनाम गरीब का बना दिया था। मणिशंकर अय्यर के मोदी पर किये गये कटाक्ष के कारण लोकसभा चुनाव में भाजपा को जबरदस्त सफलता मिली व कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। इसके अलावा भी अय्यर कई बार मोदी के प्रति हल्की टिप्पणी करते हुये उन्हे सांप,बिच्छू,पानी पुरूष,गन्दा आदमी तक कह चुके हैं।

गुजरात चुनाव से पूर्व कांग्रेस पार्टी ने कभी मणिशंकर अय्यर को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बोलने से रोकने की कोशिश नहीं की,क्योंकि मणिशंकर कांगेस में बड़े नेता रहे हैं। राजीव गांधी उन्हे विदेश सेवा से पार्टी में लेकर आये थे। कांग्रेस राज में अय्यर वर्षो केन्द्र सरकार में प्रभावशाली मंत्री रहे हैं। चूंकि गुजरात में चुनावी प्रक्रिया चल रही है व मणिशंकर के बयान से कांग्रेस बैकफुट पर आ गयी इसलिये मजबूरी वश उन्हे पार्टी से निलम्बित करना पड़ा। कांग्रेस के कई नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कई बार हल्के स्तर की टिप्पणी की मगर कांग्रेस आलाकमान ने उन्हे कभी रोकने का प्रयास नहीं किया।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री व कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने सुप्रीमकोर्ट में 2019 के लोकसभा चुनाव तक रामजन्म भूमि- बाबरी मस्जिद प्रकरण की सुनवाई स्थगित करने की बात कह कर कांग्रेस को शर्मसार ही किया। गुजरात चुनाव में जहां राहुल गांधी मन्दिरो में घूम कर स्वंय को हिन्दुवादी जताने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में उनकी ही पार्टी का एक बड़ा नेता हिन्दु विरोधी बात बात करता है। जबकि सबको पता है कि अयोघ्या में राम मन्दिर बनना हिन्दु अस्मिता से जुड़ा है।

कांग्रेस सरकार में विदेश मंत्री रहे आनन्द शर्मा ने गत 27 नवम्बर को प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुये कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी एक अस्वस्थ मानसिकता के व्यक्ति है। वो एक राष्ट्रीय समस्या है। आनन्द शर्मा कांग्रेस पार्टी से कई बार राज्य सभा सदस्य बनते रहे है व राहुल गांधी के नजदीकी माने जाते है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने तो संसद में मोदी की तुलना गद्वाफी,मुसोलिनी,हिटलर तक से की थी। गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता व केन्द्रीय मंत्री वेणीप्रसाद वर्मा ने मोदी को पागल कुत्ता तक कह दिया था। राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता व जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलामनबी आजाद ने एक बार प्रधानमंत्री मोदी की तुलना गंगू तेली से कर दी थी।

मनमोहन सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री रहे व अब कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवाड़ी ने कहा था कि मुझे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दाउद इब्राहिम से तुलना करने में जरा भी संकोच नहीं होता है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री व कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा था कि जिस प्रकार निमोनिया का वायरस होता है वैसे ही मोदी भी नमोनीटिस नामक एक घातक वायरस है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री व सांसद जयराम रमेश जैसे नेता ने भी मोदी को भस्मासुर कह कर अपने आलाकमान के सामने अपनी विद्वता का प्रदर्शन किया था। कांग्रेस टिकट पर उत्तर प्रदेश से गत विधानसभा चुनाव मे हार का स्वाद चख चुके इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री मोदी को टुकड़े-टुकड़े कर देने की धमकी दी थी। उस बयान के बाद कांग्रेस ने उन्हे उत्तरप्रदेश कांग्रेस का उपाध्यक्ष बना दिया था।

कांग्रेस के प्रवक्ता व पूर्व सांसद राशिद अल्वी ने प्रधानमंत्री मोदी को स्टूपिड प्रधानमंत्री कहा था। कांग्रेस महासचिव व मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मोदी की तुलना रावण से करते हुये मोदी राज को राक्षस राज कहा था। उन्होने प्रधानमंत्री को गाली देने में कोई कसर नहीं रखी। कांग्रेस राज में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शिद ने मोदी को बन्दर कहा। मुम्बई कांग्रेस के अध्यक्ष संजय निरूपम, सांसद राजबब्बर, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने भी मादी पर कई बार घटिया स्तर की टिप्पण की थी।

कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा रहे राहुल गांधी ने सेना द्वारा पाक सीमा पर की गयी सर्जिकल स्ट्राईक के वक्त मोदी पर हमला करते हुये कहा था कि प्रधानमंत्री सैनिको के खून की दलाली कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कई वर्ष पूर्व गुजरात विधानसभा के चुनाव प्रचार में मोदी को जहर की खेती करने वाला मौत का सौदागर कहा था। उस वक्त मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी है जिसने देश पर सबसे ज्यादा समय तक शासन किया । परन्तु गत लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी की आंधी में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। लोकसभा में कांग्रेस मात्र 44 सीटो पर सिमट कर रह गयी। अपनी करारी हार से कांग्रेस नेताओं ने सबक लेकर अपनी गलतियों को सुधारने की बजाय उजुल-फजूल बयान देने लगे जिससे कांग्रेस की लगातार किरकिरी हो रही है। देश के अधिकांश बड़े बकील कांग्रेस पार्टी में हैं। उनमें से कई कांग्रेस से सांसद भी है जो स्वंय को सबसे अधिक ज्ञानवान समझते हैं। ये ज्ञानी वकील नेता अक्सर ऐसा गैर जिम्मेदाराना बयान दे देते है जो कांग्रेस पार्टी के गले की हड्डी बन कर रह जाता है। कांग्रेस पार्टी को अपने बयानवीर नेताओं के फिजुल के बयान देने पर शख्ती से रोक लगानी चाहिये। कांग्रेस को ऐके एन्टोनी, सुशीलकुमार शिन्दे, कमलनाथ, अम्बिका सोनी, भूपेन्द्र हुड्डा, पृथ्वीराज चौहान, एम वीरप्पा मोईली,गिरिजा व्यास,शीला दीक्षित, माधवराव सिंधिया, मुकुल वासनिक,शैलेजा, जितीन प्रसाद, अजय माकन, सुरेश पचौरी, संजय सिंह, रंजिब बिस्वाल, दीपादास मुंशी, सुबोधकान्त सहाय,कुलदीप विश्राई, अभिजीत मुखर्जी जैसे अपने पुराने समझदार नेताओं को आगे करना चाहिये ताकि पार्टी की लगातार बिगड़ती जा रही स्थिति को सही किया जा सके। राहुल गांधी को भी सोच समझ कर बोलना चाहिये क्योंकि उन्हे स्वंय को 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाना है। राहुल गांधी को अपने चारो तरफ साफ सुथरी छवी के नेताओं को लाना चाहिये ताकि जनता में उनकी विश्वसनियता बन सके।

रमेश सर्राफ धमोरा
स्वतंत्र पत्रकार

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