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ईमानदार गार्ड सुरेश भगत को सलाम

पटना। किसी व्यक्ति के यदि एक लाख 80 हजार रुपये सड़क पर गिर जाये तो क्या कोई यह उम्मीद कर सकता है कि वह पैसे उसे मिल जायेंगे। सबका जवाब ना ही होगा लेकिन जिस धरती पर ईमानदारी होगी वहां यह संभव हो सकता है।
ऐसा ही कुछ घटना राजधानी पटना के भीड़-भाड़ वाले इलाके श्रीकृष्णपुरी इलाके में आज देखने को मिला। कोचिंग संस्थान के गार्ड सुरेश भगत को एक लाख 80 हजार रुपये का बंडल बिल्डिंग के बाहर सड़क पर गिरा मिला लेकिन उन्होंने उन रुपयों को तबतक संभाल कर रखा जबतक कि राशि का हकदार उसे ढूंढता हुआ वहां तक नहीं पहुंचा। महीने के साढ़े चार हजार रुपये की तनख्वाह पाने वाले श्री भगत यदि चाहते तो उस राशि को छुपा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
यह वाकया निजी कंपनी में कार्यरत दीपक कुमार के साथ हुआ। उन्होंने बताया कि बैंक से करीब एक लाख 80 हजार रुपये निकालकर जब वह अपने घर पहुंचे तो जैकेट के अंदर की जेब में रखे पैसे नहीं देखकर उनके होश उड़ गये। रुपये बैंक और सड़क पर खड़ी उनकी गाड़ी तक के बीच के रास्ते में ही कहीं गिर गये थे। उन्हाेंने तुरंत बैंक में फोन किया कि शायद उनका पैसा बैंक परिसर में ही गिर गया होगा।
दीपक ने बताया कि बैंक के लोगों ने फोन करने पर बताया कि पैसे बैंक में नहीं गिरे हैं। वह बदहवास पैसे ढूंढने के लिए बैंक से लेकर जहां उनकी गाड़ी खड़ी थी वहां तक दौड़ता रहे और हर किसी से पूछते रहे कि किसी को रुपये मिले हैं क्या। सभी का जवाब था नहीं। वह रुपये मिलने की उम्मीद छोड़ चुके थे तभी एक युवक ने कहा, “घबराइये नहीं आपके रुपये मिल जायेंगे। आप शांत होकर बैठ जाइये। रुपये बिल्डिंग के गार्ड सुरेश भगत को मिले हैं और वह उन्हीं के पास हैं।” थोड़ी ही देर बाद गार्ड सुरेश भगत आते हैं और बताते हैं कि उन्हें पैसे गाड़ी के पास मिले थे लेकिन वहां पर तीन लोग थे और वह पैसा किसका है वह यह नहीं जानते थे। बेहतर यह था कि रुपये जिसके भी होंगे, वह उसे ढूंढता हुआ खुद आयेगा तब उसे लौटा देंगे। उन्होंने बताया कि रुपये को उन्होंने गिना तक नहीं है और उसे वैसे ही रखा है। यह रुपये जो उनके थे ही नहीं उसे गिनने की क्या जरूरत थी।
दीपक ने बताया, “श्री भगत ने मुझे रुपये का बंडल दे दिया और कहा कि गिन लिजिए पूरे हैं न।” मैने कहा, “आप मुझे शर्मिंदा न करें जो व्यक्ति खोये रुपये सुरक्षित रखकर उसे वापस लौटा रहा है वह कुछ रुपये कभी नहीं निकाल सकता। आप इसमें से जितने रुपये चाहे ले लें।” इसपर बड़े दिल वाले श्री भगत ने रुपये लेने से साफ मना कर दिया। वहां मौजूद बैंक कर्मचारियों ने श्री भगत से कहा कि वह खुशी से दे रहे हैं इसलिए उसे स्वीकार करें। बाद में मैने खुशी से कुछ रुपये दिये जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
कहते हैं, दुनिया से ईमानदारी खत्म हो गई लेकिन श्री भगत ने जो किया वह देश के उन रसूखवाले बड़े लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो बैंकों को अरबों रुपये का चूना लगाकर फरार हो गये हैं। श्री भगत ने जो किया वह शायद देश-दुनिया की पहली घटना नहीं होगी लेकिन उस गरीब की ईमानदार कोशिशों ने बेइमानी के इस दौर में एक मिसाल तो जरूर कायम कर दी है।

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