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दरिदों को फांसी की सजा से ही रुकेंगी दरिदंगी की वारदातें ?

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक महिलाएं व नाबालिग बच्चियां असुरक्षित है प्रतिदिन दुष्कर्मो की इबारते लिखी जा रही है। अपराधों की तारीखें बदल रही है ,मगर तस्वीरें नहीं बदल रही है, 8 दिसंबर 2017 को हिसार में दरिदों ने एक मासूम का अपहरण कर रेप के बाद मासूम की हत्या कर दी ।दरिदों ने दरिदगी की हदें लाघ दी और निर्भया कें साथ जो कुकृत्य हुआ था ऐसा ही घिनौना काम दरिदों ने किया। मासूम का शव गोदाम के पास बरामद हो गया।7 दिसंबर को गुडगांव में भी काम से लौट रही एक महिला के साथ कैब में बदमाशा ने छेड़छाड़ की और महिला को नीचे फैंक दिया। गत दिनों मध्यप्रदेश में भी दरिदों ने एक नाबालिग से दुष्कर्म करने के बाद उस लड़की को जला दिया था।चार महिने पहले हिमाचल में भी ने गुड़िया कांड हुआ था। प्रतिदिन दुष्कर्मो की वारदातें घटित हो रही है मगर सरकारें चिरनिद्रा में सोई हुई है।देश में दरिदें अराजकता फैला रहे है। समय रहते इन दरिदों का खात्मा करना होगा। बीते साल बरेली में एक बार फिर बुलंदशहर जैसी गैगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया था एक बार फिर दरिदगी से कायनात कांप उठी थी जब दरिदो ने हाईवे बरेली में हाईवे से गुजर रही एक स्कूल शिक्षिका को मारुती वैन में खीच लिया था और गैगरेप करने के बाद हाईवे पर फैक दिया था । अभी बुलंदशहर की घटना की स्याही भी नहीं सुखी थी की बरेली में दरिदों की दरिदगी का एक और कारनामा सामने आ गया।बीते शुक्रवार को बुलंदशहर में हाईवे पर दरिदों ने बंधक बनाकर मां-बेटी से गैगरेप किया गया था।बुलंदशहर की लोमहर्षक घटना के बाद भी दरिदें बेखौफ होकर वारदातें कर रहे हैं। दरिदगी की यह वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही है।बरेली में एक बार फिर दिल दहला देने वाला कृत्य हो गया मगर सरकारें तमाशा देख रही हैं। राष्ट्रªीय अपराध रिकार्ड व्यूरों केे अनुसार 2010 से 2014 तक देश में दुष्कर्मो के मामलों में इजाफा हुआ है।2010 में 22172 और 2011 में 24206 तथा 2012 में 24923 और 2013 में 33707 हुए तथा 2014 में 36735 दुष्कर्म के मामले हुए थे। 2017 में भी निरंतर वारदातें होती रही । 2017 के जनवरी से लेकर नवबर 11 महिनों में देश में हजारों मामले हो चुके है और बदस्तूर जारी है। गत वर्ष साउथ दिल्ली के वसंत बिहार में एक 25 वर्षिय युवती के साथ एक अमेरिकन कंपनी उबर के कैब के ड्राईवर द्वारा रेप किया गया था। इन वारदातों से विश्व गुरु कहलाने वाले भारत की छवि एक बार फिर कलकित हुई है। ।देश में लड़कियां कितनी महफूज है इन घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है।बेशक 16 दिसंबर 2017 को दिल्ली गैगरेप को पांच साल हो जाएंगे मगर इन पांच सालों में न तो हालात बदले और न ही बलात्कार रुके निरंतर इन खौफनाक व दरिदगी की घटनाओं में इजाफा होता गया ज्यों-ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता गया इसे पुलिस व्यवस्था की लापरवाही करार देना ठीक होगा क्योकि इन दो सालों में हजारों बलात्कार की घटनाएं घटित हुई हैं 16 दिसंबर 2012 की घटना के बाद तो इतने दुष्कर्म हो रहें है कि थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।देश के प्रत्येक राज्य में इन केसों में निरंतर बढोतरी हो रही है यदि इन दरिदों को फांसी हो जाती है तो इन मामलों पर रोक लग सकती है क्योकि ऐसे दरिदें लोगो को एक सबक मिल जायेगा कि गलत काम करने का अंजाम क्या होता है। भेडियों व दरिदों की मानसिकता न बदली है और न बदलेगी इन दरिदों को फांसी ही आखिरी विकल्प है। 2012 से 2017 के 11 महिनों तक दुष्कर्मों का सिलसिला जारी रहा ऐसा कोई दिन न बीता होगा जिस दिन दरिदों ने किसी की इज्जत की नीलामी न लगाई होगी पूरे 365 दिन बैखौफ दरिदों के कारनामें बदस्तूर जारी रहे।गत वर्ष मुम्बई में भी एक महिला फोटोग्राफर से गैंगरेप ने भी हर भारतीय को हिला दिया था। निर्भया के बाद दिल्ली में गुडिया के साथ भी रौंगटे खडे कर देने वाला कुकृत्य हुआ था उसमें भी मनोज नामक आरोपी ने हैवानियत की हदें पार की थी । निर्भया के गुनहगारों के साथ ही इन बलात्कारी को भी तख्ते पर लटका देना चाहिए। बलात्कार की घिनौनी वारदातों के कारण विश्व गुरु की इतनी फजीहत हो रही है कि दुनिया में बदनामी हो गई हैं। कुछ बीमार मानसिकता के लोगो ने भारत की छवि को दागदार किया है जनमानस को अब संकल्प लेना होगा तथा एकजुट होकर ऐसे लोगों का खात्मा करना होगा जो देश के लिए कंलक हैं।फांसी के जितने भी मामले लंबित हैं त्वरित कारवाई करके दरिदों का सर्वनाश करना चाहिए। ताकि आने वाले समय में ऐसे अमानवीय कृत्यो पर लगाम लग सके ।यदि अब भी कानूनों में सख्ती न बरती तो ऐसे दरिदें फिर से इन घिनौनी वारदातों को अंजाम देते रहेगें ।इसलिए अब ऐसे लोगों को समाज से बहिष्कृत करना चाहिए। केन्द्र सरकार को चाहिए कि देश के सार्वजनिक स्थलों पर हर समय सुरक्षा व्यवस्था कायम की जाए। सादी वर्दी में महिला पुलिस तैनात करनी चाहिए। सरकार को बिना समय गंवाए इन दरिदों का खात्मा करना चाहिए। ऐसे दरिदें देश के लिए घातक हैऐसे दरिदें न जाने कैसे वातावरण में रहते होगें ।ऐसे लोगो को समाज की कोई फिक्र नहीं होती कि उनके कृत्यों से पूरा समाज द्रवित होता है । समाज में ऐसे लोग बहुत ही घातक सिद्व हो रहे है । ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने होगे ।ऐसे दुष्कर्म सामाजिक मूल्यों का पतन दर्शातें है कि समाज में विकृत मानसिकता के लोगों का बोलबाला होता जा रहा है ।इन मामलों से इन्सानियत तार-तार हो रही है ।समाज को ऐसे अपराधिक प्रवृति के लोगों की पहचान करनी होगी । यदि अब भी समाज के लोगों ने इन दरिदों को सबक नहीं सिखाया तो फिर से कोई और लड़की दरिदों की दरिदगी का शिकार होगी । अब समाज को जागना होगा ,दरिदों का खात्मा करना होगा ।कानून के रखवालो को भी समाज में घटित इन हादसों पर गहराई से चितंन करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे प्रकरणों पर विराम लग सके । ऐसे लोगो को समाज से बहिष्कृत करना चाहिए। अगर यह प्रवृति बढ गई तो हालात बेकाबू हो जाएगें । पुलिस को भी अपने कर्तव्य का निर्वाह करना होगा ताकि पुलिस की छवि बरकरार रहे और समाज में ऐसे हादसे रूक सके । केन्द्र सरकार को भी इन हादसों पर बिना समय गंवाए इन दुष्कर्मो को रोकने के लिए कारगर कदम उठाने चाहिए ताकि देश में ऐसी वारदातों की पुनरावृति न हो सके । इनका नामोनिशन मिटाना होगा। तभी बहु-बेटियों बेखौफ होकर घूम सकती है ।इन बलातकारियों को सजा ए मौत से ही दुष्कर्मो पर लगाम लग सकती है। अगर अब भी लापरवाही बरती तो हर रोज यह सिलसिला जारी रहेगा तथा चारों तरफ अराजकता फैलेगी ।

नरेन्द्र भारती, वरिष्ठ स्तंभकार, पत्रकार -09459047744

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