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Category: राज शेखर भट्ट

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व्यंग्य: खुल जा सिम-सिम

हर बार चुनाव तो निपट चुके होते हैं, लेकिन इस बात का पता नहीं कि कौन निपटता है और कौन रपटता है। चुनावी कुरूक्षेत्र में सभी योद्धा जुबानी तीर-कमान भी

तीखी मिर्च: ‘मैं भी चैकीदार हूं’ की भेड़ चाल

वर्तमान में राजनीति को भेड़ चाल का चोला पहनाया जा रहा है। एक आगे-आगे चला नहीं कि सारे उसके पीछे, चाहे गड्ढे में न गिर जायें। नेताजी ने बोल दिया

व्यंग्य: अपना काम बनता, भाड़ में जाये जनता

राज शेखर भट्ट लोकतंत्र, अर्थात लोगों के द्वारा नेताओं को चुना जायेगा। वही लोग और नेता मिलकर मंत्र फूंकेंगे। जिससे एक तंत्र, एक आलीशान मकान बनेगा। जिस मकान में छत

व्यंग्य: झूठ के मकड़जाल से सच की हड़ताल

जीवन के सिक्के के केवल दो ही पहलू हैं, एक सच और एक झूठ। लेकिन जीवन झूठ के मकड़जाल में कैद है और सच्चाई मन के एकांत में विलाप कर

व्यंग्य: क्या अब भी बचा है ‘हर-हर मोदी, घर-घर मोदी’

लोकसभा का महल सजता रहता है और चुनावी कुश्ती के अखाड़े खुल जाते हैं। हर नेता सोचता है कि ‘मैं जीतूं, सबको पछाड़ दूं और महाराजा बन जाऊं’। लेकिन सभी

व्यंग्य: सोशल मीडिया ने किया जीवन का पोस्टमार्टम

राज शेखर भट्ट इनसान के जब प्राण-पखेरू उड़ जाते हैं, तब उसकी धरती से विदाई हो जाती है। चर्चाओं में यह भी है कि भैंसे में बैठकर यमराज आते हैं

व्यंग्य: मंच पे तंज कसते हुये राहुल ने बजाये मृदंग

राज शेखर भट्ट एक परिवार के राष्ट्रीय युवा मुखिया उत्तराखण्ड पहुंचे। उनके परिवार के लोग तो बेहद खुशी से झूम रहे थे, जैसे कि धरती पर चांद उतर आया हो।

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