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Category: डॉ नीलम महेंद्र

Total 25 Posts

आखिर साध्वी से परहेज़ क्यों है ?

साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से भाजपा द्वारा अपना उम्मीदवार घोषित करते ही देश में जैसे एक राजनैतिक भूचाल आता है जिसका कंपन कश्मीर तक महसूस किया जाता है। भाजपा के

जनता की अदालत में फैसला अभी बाकी है

कुछ समय पहले अमेरिका के एक शिखर के बेस बॉल खिलाड़ी जो कि वहाँ के लोगों के दिल में सितारा हैसियत रखते थे, उन पर अपनी पत्नी की हत्या का

चुनाव के समय मतदाता को जागरूक करने में लगे राजनैतिक दल

विजय न्यूज़ ब्यूरो देश में एक बार फिर चुनाव होने जा रहे हैं और लगभग हर राजनैतिक दल मतदाताओं को “जागरूक” करने में लगा है। लेकिन इस चुनाव में खास

कविता : नवरात्र में माँ फिर आईं हैं

नवरात्र में माँ फिर आईं हैं प्रकृति ने भी धरती सजाई है शाखों पर नए पत्ते शर्मा रहे हैं पेड़ों पर नए पुष्प इठला रहे है खेतों में नई फसलें

कल तक वो रीना थी लेकिन आज “रेहाना” है

दिन की शुरुआत अखबार में छपी खबरों से करना आज लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन कुछ खबरें सोचने के लिए मजबूर कर जाती हैं कि क्या

वैश्विक राजनीति में भारत की बदलती भूमिका

ये वो नया भारत है जो पुराने मिथक तोड़ रहा है, ये वो भारत है जो नई परिभाषाएं गढ़ रहा है, ये वो भारत है जो आत्मरक्षा में जवाब दे

दिन ब दिन टूटते रिश्ते

हाल ही में जापान की राजकुमारी ने अपने दिल की आवाज सुनी और एक साधारण युवक से शादी की। अपने प्रेम की खातिर जापान के नियमों के मुताबिक, उन्हें राजघराने

आश्रय स्थल में ही आसरा नहीं तो फिर आसरा कहाँ साहेब

ये कैसी तरक्की है यह कैसा विकास है जहाँ इंसानियत हो रही हर घड़ी शर्मसार है,? ये कैसा दौर है ये कैसा शहर है जहाँ बेटियों पर भी बुरी नजर

 नक्सलवाद को हराती सरकारी नीतियाँ

24 अप्रैल 2017 को जब “नक्सली हमले में देश के 25 जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे” यह वाक्य देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, तो

डूबते सूरज की बिदाई नववर्ष का स्वागत कैसे

पेड़ अपनी जड़ों को खुद नहीं काटता, पतंग अपनी डोर को खुद नहीं काटती, लेकिन मनुष्य आज आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ें और अपनी डोर दोनों काटता जा रहा

क्या यह प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अपमान नहीं है

वर्तमान में चल रहे संसद के शीतकालीन सत्र में भारतीय लोकतंत्र की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा माफी की मांग पर सदन की कार्यवाही में

दम तोड़ती इंसानियत का रुदन हम कब सुने पायेंगे साहब

“अपना दर्द तो एक पशु भी महसूस कर लेता है लेकिन जब आँख किसी और के दर्द में भी नम होती हो, तो यह मानवता की पहचान बन जाती है।“

क्या कभी नारी को गुस्सा आया है

आज से पांच साल पहले 16 दिसंबर 2012 को जब राजधानी दिल्ली की सड़कों पर दिल दहला देने वाला निर्भया काण्ड हुआ था तो पूरा देश बहुत गुस्से में था

आखिर क्यों हम अपने बच्चों को नहीं बचा पा रहे

1 दिसंबर 2017,कोलकाता के जीडी बिरला सेन्टर फाँर एजुकेशन में एक चार साल की बच्ची के साथ उसी के स्कूल के पी टी टीचर द्वारा दुष्कर्म। 31 अक्तूबर को मध्यप्रदेश

हदिया जैसी लडकियां लव नहीं जिहाद का शिकार होती हैं

परिवर्तन तो संसार का नियम है। व्यक्ति और समाज के विचारों में परिवर्तन समय और काल के साथ होता रहता है लेकिन जब व्यक्ति से समाज में मूल्यों का परिवर्तन

विपक्ष के बयान सही या विदेशी रिपोर्टें

देश के आम आदमी के मन में इस समय जितने सवाल उठ रहे हैं इतने शायद इससे पहले कभी नहीं उठे। वो समझ ही नहीं पा रहा है कि किस

क्या बीजेपी मप्र में ऐसे जाएगी 300 पार

मध्य प्रदेश के चित्रकूट उपचुनाव में भाजपा ने जिस प्रकार अपनी हार को स्वीकार किया है उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जहाँ एक तरफ काँग्रेस इस जीत से

क्या हार्दिक मान सम्मान की परिभाषा भी जानते हैं?

मैं वो भारत हूँ जो समूचे विश्व के सामने अपने गौरवशाली अतीत पर इठलाता हूँ। गर्व करता हूँ अपनी सभ्यता और अपनी संस्कृति पर जो समूचे विश्व को अपनी ओर

खुशियों का पैमाना बनती जा रही शराब

वैसे तो हमारे देश में अनेक समस्याएँ हैं जैसे गरीबी बेरोजगारी भ्रष्टाचार आदि लेकिन एक समस्या जो हमारे समाज को दीमक की तरह खाए जा रही है,वो है शराब। दरअसल आज

क्या किम जोंग वाकई सनकी है

अमेरीकी विरोध के बावजूद उत्तर कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे हायड्रोजन बम परीक्षण के परिणाम स्वरूप ट्रम्प और किम जोंग उन की जुबानी जंग लगातार आक्रामक होती जा रही

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