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Category: निर्मल रानी

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जवानों-किसानों का भारत या सफेदपोश-भगोड़े-लुटेरों का?

यह देश है वीर जवानों का,अलबेलों का मस्तानों का, फिल्म संगीत से जुड़े गीत के यह बोल हम भारतवासियों को राष्ट्रभक्ति के प्रवाह में दशकों से सराबोर करते आ रहे

चौकीदारो! एक नज़र गौवंश पर भी…

लोकसभा चुनावों का रण प्रारंभ हो चुका है। अनेक राजनैतिक दल मतदाताओं के मध्य तरह-तरह के वादों व आश्वासनों के साथ संपर्क साध रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से इस चुनाव

नोटबंदी:उपलब्धि या महाघोटाला?

8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए पांच सौ व एक हज़ार रुपये के नोटों को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा की

‘कलंकी माननीयों’ से मुक्ति का शुभ अवसर है चुनाव

भारतीय लोकतंत्र के महापर्व अर्थात् लोकसभा चुनाव 2019 का शंखनाद हो चुका है। चुनाव संपन्न होने तक देश के सीधे-सादे व शरीफ मतदाताओं को बहलाने, बहकाने, फुसलाने तथा वरगलाने का

राम राज या जंगलराज?

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम भारतवर्ष की बहुसंख्य आबादी के आराध्य हैं। देश का एक बड़ा हिस्सा भगवान राम की आराधना करता है व उन्हें अपना भगवान मानता है। ऐसे में

बिजली आपूर्ति: ज़ोर का झटका जो धीरे से लगे

आलेख। भारतवर्ष में विद्युत की शुरुआत का इतिहास वैसे तो 24 जुलाई 1879 में कोलकता से संबंधित बताया जाता है जबकि बिजली से होने वाले चमत्कारों अथवा उपयोगों का प्रदर्शन

रेलवे आरक्षण : कितना विश्वसनीय?

भारतीय रेल द्वारा नित नई ऊंचाईयों को छूने का समाचार हमें अक्सर मिलता रहता है। भारतीय रेल के संदर्भ में इससे बढ़कर सुखद प्रचार और क्या हो सकता है कि

उन चिराग़ों को बुझा दो तो उजाला होगा

उत्तर प्रदेश के बुलंद शहर में पिछले दिनों गौमांस की अफ़वाह को लेकर फैली हिंसा में एक जांबाज़ व कर्मठ पुलिस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह की उग्र भीड़ ने हत्या

भारतीयों के और कितने विभाजन?

1947 में भारत-पाक विभाजन के समय जिस प्रकार शरणार्थियों के अनियंत्रित आवागमन के दृश्य दिल्ली से लेकर लाहौर तक के रेलवे स्टेशन पर दिखाई दे रहे थे कमोबेश कुछ वैसा

बिजली आपूर्ति: ज़ोर का झटका जो धीरे से लगे

भारतवर्ष में विद्युत की शुरुआत का इतिहास वैसे तो 24 जुलाई 1879 में कोलकता से संबंधित बताया जाता है जबकि बिजली से होने वाले चमत्कारों अथवा उपयोगों का प्रदर्शन मुंबई

नफरत की खाई पाटने में कानून कितना सक्षम

दलित समुदाय को देश का बड़ा वोट बैंक मानकर की जाने वाली राजनीति का सिलसिला इन दिनों पूरे शबाब पर है। सत्ता के ‘विशेष पारखी’ तथा सत्ता में बने रहने

व्यवस्था को बेनकाब करती वर्षा ऋतु

वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व ही मौसम विभाग द्वारा यह बार-बार बताया जा रहा था कि इस वर्ष मानसून जमकर बरसेगा। हमारे देश के किसानों के लिए खेती-बाड़ी के

जाएं तो जाएं कहां?

धर्म की जीत हो-अधर्म का नाश हो, धर्मस्थानों से इस प्रकार की प्रेरणादायक व आदर्शवादी आवाज़ें कुछ ज़्यादा सुनाई देती हैं। यह उद्घोष हमारे देश के मंदिरों में प्रात: व

स्वामी अग्रिवेश पर हुए जानलेवा हमले के निहितार्थ

भारतीय राजनीति के चेहरे पर पिछले दिनों उस समय फिर एक बदनुमा दाग लगा जबकि झारखंड में कुछ स्वयंभू हिंदुवादी राष्ट्रवादियों द्वारा भगवाधारी बुज़ुर्ग सामाजिक कार्यकर्ता अध्यात्मवादी व राजनीतिज्ञ 79

‘देवी पूजक’ देश के सबसे खतरनाक महिला विरोधी 

‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ जैसी कहावत न केवल हमारे देश की प्राचीन कहावतों में शामिल हैं बल्कि हमारा समाज बहुतायत में इस कहावत को चरितार्थ करता हुआ भी प्राय: दिखाई

न्यू इंडिया का सपना और ज़हरीले खाद्य पदार्थों का धंधा ?

इसमें कोई संदेह नहीं कि खान-पान को लेकर आम आदमी का रुझान शाकाहार की ओर बढ़ता जा रहा है। स्वास्थय के प्रति सजग व्यक्ति दूध,फल व हरी सब्जि़यों की ओर

तालिबानी कृत्य है लेनिन की मूर्ति का ढहाया जाना

अफगानिस्तान में राष्ट्रपति नजीब की सत्ता समाप्त होने के बाद जिस समय क्रूर तालिबानियों ने सत्ता अपने हाथ में संभाली उसके बाद मार्च 2001 में आतंकवादी सोच के नायक मुल्ला

थालियों में ज़हर, सरकारें मौन

एक ओर तो देश की जनता पहले ही मंहगाई की मार से बुरी तरह से जूझ रही है। $खासतौर पर रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले खाद्य पदार्थ,अन्न,दालें,तेल,घी, सब्जि़यां तथा

यह जो अन्नदाता है,क्यों फांसी पर चढ़ जाता है?

हमारे देश में कृषक समाज अथवा किसानों के लिए तरह-तरह के विशेषण व उपमाएं इस्तेमाल की गई हैं। मिसाल के तौर पर यहां किसान को भगवान का दर्जा देते हुए

सरकार के ‘गलत’ फैसले ‘जन-धन’ की बरबादी का कारण

यदि आप देश के किसी भी राज्य के शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करें तो निश्चित रूप से यह दिखाई देगा कि कहीं न कहीं किसी न किसी क्षेत्र

क्या केवल गरीब ही है सबसे बड़ा ‘मुजरिम’?

गत् 70 वर्षों से देश में लोकतंत्र के होने के बावजूद $खासतौर पर सत्ता विरोधी दलों द्वारा यही बताने व जताने की कोशिश की जाती है कि सत्ता में बैठी

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