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Category: तनवीर जाफ़री

Total 38 Posts

मतदान देश के लिए करें धर्म के लिए नहीं

लोकसभा चुनावी महासमर के मध्य देश के तथाकथित ‘राजनेताओं’ के बोल बार-बार उनकी नीयत तथा इरादों को स्पष्ट करते जा रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि 2019 का लोकसभा

पद संवैधानिक और विचार देशद्रोही ?

साधू वेशधारी तथा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर आसीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर अपने बेतुके बोल तथा बदज़ुबानी के लिए चर्चा में हैं। परंतु इस

‘पहले तोलो फिर बोलो’

भारतवर्ष साहित्य के क्षेत्र में एक समृद्ध देश माना जाता है। हमारे देश ने विभिन्न भाषाओं के अनेक अंतर्राष्ट्रीय याति प्राप्त लेखक व साहित्यकार दिए हैं। प्रत्येक भाषा व साहित्य

मानवता के लिए ख़तरा है वैश्विक अतिवाद

न्यूज़ीलैंड के क्राईस्टचर्च शहर में स्थित अलनूर मस्जिद में नमाज़ पढऩे वालों पर हुए हमले में 49 लोगों के मारे जाने के बाद न्यूज़ीलैंड जैसा शांतिप्रिय देश भी आतंक प्रभावित

है इबादत से दुश्मनी जिनको…

हमारे देश में इस विषय पर कई दशकों से लंबी बहस चली आ रही है कि चूंकि धर्म किसी भी व्यक्ति का अत्यंत निजी मामला है लिहाज़ा इससे संबंधित किसी

राफेल: कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है?

आलेख। भारत द्वारा फ्रांस से खरीदे जाने वाले लड़ाकू विमान राफेल को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले की गूंज संसद से लेकर

सुशासन के दावे और चरमराता लोकतंत्र

भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रांड नेता तथा उत्तर प्रदेश के मु यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन एवं राम राज्य लाने के दावों के मध्य गत् दिनों एक बार फिर

महापुरुषों को बांटते यह कलयुग के संत

भारतवर्ष की भूमि निश्चित रूप से इस बात पर गर्व करती है कि जितने महापुरुष,ऋषि-मुनि,संत-फ़क़ीर तथा अवतार इस पावन धरती पर आए उतने शायद दुनिया के किसी भी देश में

‘सैन्य पराक्रम’ देश का गौरव, दल का नहीं

देश के अन्य राजनैतिक दलों की तुलना में भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ही स्वयं को एक अलग पहचान रखने वाले राजनैतिक दल के रूप में प्रचारित करती रही है।

राजनीति ‘नाम परिवर्तन’ की….

अपनी नैनीताल यात्रा के दौरान एक बार हल्द्वानी से पहले एक स्थान पर रुकने का मौका मिला। उस जगह का नाम था ‘गोरा पड़ाव’। ‘गोरा पड़ाव’ नाम के विषय में

जिन पे तकिया था वही पत्ते हवा देने लगे

नई दिल्ली के मुनीरका क्षेत्र में 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया नृशंस सामूहिक बलात्कार व हत्याकांड के बाद देश में जिस प्रकार का जनाक्रोश उमड़ते देखा गया था आज

तू इधर-उधर की बात न कर..

गत् 20 जुलाई 2018 को न केवल लोकसभा में विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर ज़ोरदार चर्चा हुई बल्कि उस दिन सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राहुल

टोपीबाज़ी’ बंद करो

इसमें कोई संदेह नहीं कि भारतवर्ष शताब्दियों से स्वाभिमानियों तथा गरिमामायी लोगों का देश रहा है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों के लोग क्षेत्रीय जलवायु तथा ज़रूरतों के अनुसार अपने सिरों

‘2019’ में देश मांगेगा नोटबंदी का हिसाब

भारतवर्ष का आम नागरिक 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अचानक की गई नोटबंदी की घोषणा संबंधी उस भाषण को कभी नहीं भूल सकता जिसमें उन्होंने देश की

विचारधारा नहीं, उज्जवल राजनैतिक भविष्य का दौर

संगठनात्मक स्तर पर होने वाले वाद-विवाद अथवा मतभेदों को लेकर राजनैतिक दल छोडऩे तथा किसी दूसरे राजनैतिक दल में चले जाने या फिर अपनी ज़मीनी राजनैतिक क्षमता को मद्देजनज़र रखते

महिमामंडन, गांधी के हत्यारे का…

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भारत की अब तक की ऐसी इकलौती श$िख्सयत का नाम है जिसे भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में समान रूप से आदर व सम्मान की

दोनों नकली हो गए, आंसू और मुस्कान ?

सामान्तय: मनोवैज्ञानिकों का मत तो यही है कि किसी भी इंसान के चेहरे पर मुस्कान या हंसी उसी समय आती है जब वह किसी बात को सुनकर प्रसन्न हो या

सराहनीय अदालती टिप्पणी:अधर्म करने वाला धार्मिक नहीं हो सकता

पिछले दिनों जयपुर के एक अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध रखने वाले आठ सदस्यों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई तथा इसके साथ ही प्रत्येक अभियुक्त

‘पत्थरकारिता’में दलाली व चाटुकारिता के बाद अब चोरी का भी तड़का ?

निश्चित रूप से दुनिया के अधिकांश देश ऐसे हैं जो न केवल दिन-प्रतिदिन तरक्की कर रहे हैं बल्कि ऐसे देशों का सामाजिक ढांचा भी परिवर्तित होता जा रहा है। दुनिया

चम्मचों को देखिए तो पतीली से गर्म हैं

चाटुकारिता, खुशामदपरस्ती तथा अपने आका को खुश करने के लिए किसी भी हद तक कुछ भी कर गुज़रने की हौसला हमारे समाज में आसानी से देखा जा सकता है। और

कलयुगी ‘गुरू घंटालों’ के दौर में धर्म-अध्यात्म की शिक्षा ?

कलयुग के जिन लक्षणों की परिकल्पना की गई है लगभग वे सभी लक्षण पृथ्वी पर साफ दिखाई देने लगे हैं। इंसान-इंसान की जान का दुश्मन बना बैठा है। रिश्ते अपना

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