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Category: व्यंग्य

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व्यंग्य : आओ , पिट्ठू बने तोतों की कुछ बातें कर लें

पुलिस-पुलिस कहकर तस्करों को अलर्ट करने वाला तोता तो आखिरकार पकड़ में आ ही गया ! कब तक बकरे की माँ खैर मनाती, एक न एक दिन तो पकड़ में

शादी का ऑनलाइन पैकेज

मामला अच्छा खासा ऑनलाइनी हो लिया है । सामने ही सब्जी मंडी में पड़ी – पड़ी भिंडियां करवट बदल बदलकर आंखें सुजाए बैठी है ; पर कमबख्त कोई खरीदार नहीं

एयर पॉलिटिक्स संग वोटरनामा

… और किसी तरकीब दांवपेच तिकड़म – बाजी आदि के आधार पर मैं एयर पॉलिटिक्स के हवाई जहाज पर सवार हो गया । भारतीय राजनीति का हवाई जहाज एरोड्रम की

घोषणा पत्रों के बस्ते बीच गर्दभदेव!

पिछले कई वर्षों के घोषणापत्र बस्तों में बंधे पड़े थे पार्टी मुख्यालय के पिछवाड़े। एकदम सुर्ख लाल रंग के बस्ते में। खतरे के निशान से ऊपर झरते! वादा पत्रों के

फिर प्रपंचशास्त्री टिकट ले आया

चुनावी टिकट की लगी हुई थी सेल ! मची है चारों ओर रेलम-पेल ! चुनाव में टिकट बांटने का मचा हुआ है एक होलियाना भरी पिचकारी का खेल ! रंग

अथ स्मार्ट डिजिटल मरीजनामा

बहुत दिनों से बीमार पड़ने की हार्दिक इच्छा प्रसव पीड़ा की तरह कुल – कुला रही थी । मैंने बीमारों के शानदार ठाठ देखे हैं । पड़े रहो आराम से

उस दिन के ख्वाब सजाओ जो…..!

यदि कोई हमें भरमाए नहीं तो न ही चैन मिलता है और न ही आँखों में निंदिया रानी झांकती है। बचपन से ही हमने भ्रम में रहने की आदत डाल

भीड़ बटोरने के टोटके

चुनावी त्यौहार में भीड़ का बड़ा महत्व माना जाता है । शास्त्रों में कहा गया है कि एक उच्च कोटि का भीड़ खेंचूं देखते ही देखते अपनी पसंदीदा कुर्सी खेंच

भीड़ बटोरने के टोटके

चुनावी त्यौहार में भीड़ का बड़ा महत्व माना जाता है । शास्त्रों में कहा गया है कि एक उच्च कोटि का भीड़ खेंचूं देखते ही देखते अपनी पसंदीदा कुर्सी खेंच

व्यंग्य : चुनावी गणित का पेपर आउट

महान परीक्षा परंपरा में नियमानुसार पेपर आउट होता है । यह चुनावी गणित का आउट पेपर आपके सामने हाजिर है । मेरे हुजूर ! प्लीज मुलाहिजा फरमाएं ! 1. एक

जूतस्य जूतयो: जूताणाम षष्ठी

उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में आयोजित ‘चरण पादुका साहित्य सम्मेलन’ काफी सुर्खियां बटोर चुका है । बहुत-बहुत धन्यवाद इन महानुभावों का ! जिन्होंने जूते नामक अस्त्र, शस्त्र और

व्यंग्य: खुल जा सिम-सिम

हर बार चुनाव तो निपट चुके होते हैं, लेकिन इस बात का पता नहीं कि कौन निपटता है और कौन रपटता है। चुनावी कुरूक्षेत्र में सभी योद्धा जुबानी तीर-कमान भी

नेता पुकारे चुनाव किनारे !

नेताजी को बड़ी चिंता सता रही थी । चार – पांच साल बाद फिर वही टंटा ! वोटों की खातिर उन्हें घर – घर जाकर भीख मांगनी पड़ेगी । हाय

मगर हाथी सियार गठबंधन कथा

क्रंदनवन के उस तालाब में एक हाथी पानी पीने जाया करता था । वह हाथी उसी परिवार का था जिसके एक बडेरे हाथी को विष्णु ने एक मगरमच्छ से छुड़ाया

व्यंग्य : एजेंडा वही जो वोट दिलाए

वे पार्टी मुख्यालय में गए । उन्होंने गाड़ी को सीधे फव्वारे के नीचे स्नान करने के लिए खड़ा कर दिया । बाहर तेज गर्मी थी । अंदर एयर कंडीशनर में

तीखी मिर्च: ‘मैं भी चैकीदार हूं’ की भेड़ चाल

वर्तमान में राजनीति को भेड़ चाल का चोला पहनाया जा रहा है। एक आगे-आगे चला नहीं कि सारे उसके पीछे, चाहे गड्ढे में न गिर जायें। नेताजी ने बोल दिया

व्यंग्य: अपना काम बनता, भाड़ में जाये जनता

राज शेखर भट्ट लोकतंत्र, अर्थात लोगों के द्वारा नेताओं को चुना जायेगा। वही लोग और नेता मिलकर मंत्र फूंकेंगे। जिससे एक तंत्र, एक आलीशान मकान बनेगा। जिस मकान में छत

व्यंग्य: झूठ के मकड़जाल से सच की हड़ताल

जीवन के सिक्के के केवल दो ही पहलू हैं, एक सच और एक झूठ। लेकिन जीवन झूठ के मकड़जाल में कैद है और सच्चाई मन के एकांत में विलाप कर

व्यंग : इलेक्शन की माउथ स्ट्राइक

होली रंग और मन मिजाज का त्यौहार है। क्योंकि अपना देश भी रंगीला है। यहां की हर बात निराली है। होली और चुनाव में चोली-दामन का साथ है। दोनों उमंग,

व्यंग्य: क्या अब भी बचा है ‘हर-हर मोदी, घर-घर मोदी’

लोकसभा का महल सजता रहता है और चुनावी कुश्ती के अखाड़े खुल जाते हैं। हर नेता सोचता है कि ‘मैं जीतूं, सबको पछाड़ दूं और महाराजा बन जाऊं’। लेकिन सभी

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