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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस संसद मार्ग पर जुटे सैकड़ों लोग

नई दिल्ली। प्रख्यात कार्यकर्ता मेधा पाटकर और शबनम हाशमी सहित, देश भर के सैकड़ों लोग अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाने के लिए मध्य दिल्ली में संसद मार्ग पर एकत्रित हुए। एकत्रित हुए लोगों में सामाजिक आंदोलनों के सदस्य, नागरिक समाज के कार्यकर्ता, नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि, नीलगिरी पहाड़ियों से आए आदिवासी और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे। ये लोग देशभक्तिपूर्ण गीत गा रहे थे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन में नारे लगा रहे थे। इस मौके पर मेधा पाटकर ने कहा कि सभी लोग यहां जश्न-ए-संविधान मनाने के लिए आए हैं। इसका लक्ष्य संविधान की भावना, लोगों के संघर्ष को मजबूती देना तथा मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को दोहराना है।
उन्होंने बताया, यह आयोजन एक संदेश है कि अगर हमारे अधिकार नहीं दिए गए तो ऐसा विरोध होगा जो सरकार को उखाड़ फेंकेगा। हाशमी ने कहा कि, खास तौर पर ऐसे समय पर प्रतिरोध जरूरी है जब गरीबों और जरूरतमंदों की आवाज दबाई जा रही है।
आपको बता दें कि साल के हर दिन की तरह १० दिसम्बर का दिन भी कई घटनाओं के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज है। मानवाधिकारों की दृष्टि से इस तारीख का खास महत्व है, क्योंकि १० दिसंबर के दिन को ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने १९५० में दस दिसम्बर के दिन को मानवाधिकार दिवस घोषित किया था जिसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों का ध्यान मानवाधिकारों की ओर आकर्षित करना था। साल १९४८ में यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली इसको अपनाया और शुरुआत की। आधिकारिक तौर पर साल १९५० में असेंबली ने ४२३ (वी) रेज़्योलुशन पास कर सभी देशों और संबंधित संगठनों को इस दिन को मनाने की सूचना जारी की थी। ४८ देशों ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के साथ इस दिन को मनाया। इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया में सभी लोगों के लिए एक समान मानकों को स्थापित करना था। साथ ही मानवता के खिलाफ हो रहे जुल्म और सितम को रोकने के लिए एक वैश्विक प्रयास था।

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