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अपने संघर्ष से भारत को “बेटर देन नॉर्मल” बना रहे हितेश

> न्यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर से पीड़ित हैं हितेश
> इस अवस्था मे व्यक्ति ने बोल सकता है ना चल सकता है
> हितेश ने संघर्ष कर इस अवस्था पर पाई कामयाबी
> 25 साल की उम्र में आज ग्लोबल स्पीकर के तौर पर जाने जाते हैं
> बेटर दें नॉर्मल अभियान से भारत मे 50 लाख युवाओं को करेंगे प्रेरित

अपने संघर्ष से भारत को “बेटर देन नॉर्मल” बना रहे हितेश

नई दिल्ली। कौन कहता है कि आसमां में छेद हो नही सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों। भारतीय मूल के सिंगापुर निवासी हितेश रामचंदानी पर ये कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। डॉक्टर्स ने जिस हितेश के जन्म के 24 घण्टों में उसकी मौत की घोषणा कर दी थी, आज 25 साल बाद वही हितेश भारत ही नही, दुनिया भर को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।
हितेश रामचंदानी का जन्म 25 वर्ष पहले सिंगापुर में हुआ। हितेश जन्म से ही न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर “सेरेबल पाल्सी” से पीड़ित हैं। दरअसल , जन्म के समय वे अपनी माँ के पेट मे उल्टे थे। एक्सपर्ट डॉक्टर्स ने पेट काटकर उनके जन्म कराने की सलाह दी थी। लेकिन डॉक्टर्स ने उनकी नार्मल डिलीवरी कराई। इस से जन्म के समय उनका सिर माँ के गर्भाशय में 90 सेकंड के लिए फंस गया और उन्हें ऑक्सीजन नही मिली। जैसे तैसे उनका जन्म हुआ, लेकिन वो सेरेबल पालसी के शिकार हो गए।

न्यूरोलॉजीकल डिसऑर्डर से पीड़ित हैं हितेश, इस अवस्था मे व्यक्ति ने बोल सकता है ना चल सकता है

डॉक्टर्स ने उनके पिता श्री गणेश रामचंदानी से कहा कि उनका बेटा 24 घंटे से ज़्यादा नही जी पाएगा। लेकिन काफी मशक्कत के बाद उन्हें जीवित बचाया गया। लेकिन सेरेबल पाल्सी के चलते ये साफ था कि हितेश कभी बोल या चल नही पायेगा।
लेकिन हितेश के माता पिता ने हार नही मानी। उन्होंने हितेश को एक समान्य बच्चे की तरह पाला। उसकी बेहतरी के लिए उन्होंने ऊके लिए हर तरह की थेरेपी और ट्रेनिंग की व्यवस्था की। इसी का नतीजा है कि आज 25 साल बाद हितेश न सिर्फ आम लोगों की तरह जीवन जी रहा है, बल्कि दुनिया भर में युवाओं और सेरेबल पाल्सी से पीड़ित लोगों को “बेटर देन नॉर्मल” अभियान के ज़रिए सामान्य से बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है। यही नहीं, हितेश सिंगापुर की पैरा ओलिम्पिक फुटबॉल टीम के खिलाड़ी भी हैं।

हितेश ने संघर्ष कर इस अवस्था पर पाई कामयाबी

फिलहाल हितेश अपने “बेटर देन नॉर्मल” अभियान के तहत भारत के दौरे पर है। जिसका उद्देश्य कम से कम 50 लाख युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इसके अन्तर्गत वे भारत के विभिन्न राज्यों और शहरों के स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में जाकर मोटिवेशनल स्पीच दे रहे हैं कि जब वो कर सकते हैं, तो कोई भी कर सकता है। अभी तक वे भारत मे करीब 60 स्पीच के जरिये एक लाख से अधिक युवाओं को प्रेरित कर चुके हैं।

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