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आखिर कब तक बेमौत मरते रहेगें स्कूली बच्चे…..?

देश में बढते स्कूली बस हादसे रूकने का नाम नहीं ले रहे है ,प्रतिवर्ष स्कूली बच्चे बेमौत मारे जा रहे हैं मगर ब्यवस्था बहरी बनी हुई है ऐसी खौफनाक त्रासदियां असमय मासूमों को निगल रही है। ताजा घटनाक्रम में शुक्रवार को यमुना-एक्सप्रैस वे पर आगरा में हिमाचल के जिला मण्डी के एक निजि स्कूल से टूअर पर ताजमहल छात्र-छात्राएं देखने गए 102 स्कूली बच्चों की बस पलटने से 57 बच्चंे घायल हो गए बस का टायर फटने से यह हादसा हुआ तथा चालक की दर्दनाक मौत हो गई।हादसे में एक छात्र का दायां हाथ काटना पड़ा तथा रसोईए का पैर काटना पड़ा।हादसे के समय चारांे तरफ चीखों व बिखरे खून से हर आदमी स्तब्ध रह गया।बताया जा रहा है कि बिना परमीशन के ही स्कूल के बच्चों को टूअर पर ले जाया गया था।ऐसे लापरवाही बरतने वालों पर शिंकंजा कसना चहिए ताकि भविष्य में सबक मिल सके।प्रशासन को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।बीरवार को सुबह जिन माता-पिता ने अपने नौनिहालो को खुशी से टूअर पर भेजा था उन्हे इस बात का इल्म नहीे था कि चंद पलों में उनके बच्चों के साथ अनहोनी घटना हो जाएगी।,ऐसे दर्दनाक मंजर को देखककर हर किसी का मन पसीज गया। घटना स्थल पर चारों तरफ बच्चों के बैग ,टिफिन ,सामान ,बिखरा पड¬़ा था। घटनास्थल के पास एक उद्योग के मजदूरों ने व लोगों ने बच्चों को अस्पताल पहंुचकर मानवता का परिचय दिया बच्चे बुरी तरह सहम गए थे कि पल भर में यह सब क्या हो गया एक बच्चे की बाजू कट कर दूर जा गिरी थी।मंजर देखकर हर किसी की आंख ेनम हो गई थी जब लोगों ने छोटे-छोटे बच्चों को खून से लथपथ देखा तो हर कोई मदद के लिए आगे आ गया। कुछ समय पहले ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा गुरदासपुर शहर के नजदीक पटियाल में 12 जनवरी 2016 मंगलवार को अलसुबह घटित हुआ था जब एक निजि स्कूल की बस 40 फुट नीचे नहर में गिर गई थी जिसमें तीन बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 25 बच्चे गंभीर रुप से घायल हो गए थे।।बस में 55 बच्चे सवार थे जबकि इसमें 32 बच्चों के बैठने की क्षमता थी।घटना का कारण किसी गाड़ी द्वारा बस को टक्कर मारी गई थी जिस कारण बस नहर में जा गिरी थी। वर्ष 2015 में हिमाचल के जिला सिरमौर के नाहन में एक स्कूल बस के 150 फुट नीचे गिरने से एक छह साल की छात्रा की मौत हो गई थी और 34 बच्चे घायल हो गए थे। गंभीर अवस्था में दो छात्रो को चंड़ीगढ रैफर कर दिया था। स्कूल बस कोे स्कूल का प्रिसिपल खुद चला रहा था जिसे बस चलानी नहीं आती थी मगर इस प्रिसिपल की लापरवाही के कारण एक बच्ची मौत के आगोश में चली गई थी। स्कूल बस का चालक छुटटी पर होने के कारण यह प्रिसिपल खुद ही चालक बन गया ऐसे लापरवाह प्रिसिपल के खिलाफ गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया था। मगर जो बच्ची इसकी गलती से बेमौत मारी गई उसकी भरपाई कौन करेगा।यह बहुत ही दुखद घटना थी। केजी से लेकर छठी कक्षा तक के लगभग 35 बच्चे इस बस में सवार थे । ऐसे लोगों को आजीवन कारावास देना चाहिए जो जानबूझकर गलतियां करते है यह हादसे नहीें सरासर हत्याएं है।बीते वर्ष 4 मार्च 2013 को भी एक ऐसा ही हादसा हुआ था जिसमें बच्चों की लाशों का अंबार लग गया,था। जालन्धर -नकोदर मार्ग पर ं एक तेज रफतार ट्रक व स्कूली बस में हुई टक्कर से 13 मासूमों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अकाल एकैडमी के बच्चों की अकाल मौत से कई घरों के चिराग बूझ गय थे। आखिर कब तक मौत के मंुह में समाते रहेगें मासूम यह एक यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है हर माता-पिता अपने लाडलो के सामान देखकर रो रहे थे चीखो -पुकार मची हुई थी लोग बदहबास अपने चिरागो को ढंूढ रहे थे लेकिन चिराग चिर निंद्रा में सो चुके थे ,इन बच्चो की उम्र 10 वर्ष थी बस मे 24 बच्चे सवार थे, स्कूली बच्चो की मौत का यह कोई पहला हादसा नहीं है इससे पहले भी हजारों बच्चे काल का ग्रास बन चुके हैं,तेज रफतार के कारण न जाने कितने फूल खिलने से पहले ही मुरझा गये ,गत वर्ष में अंबाला में भी ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ था जिसमें भी दर्जनों बच्चों की मौत हुई थी ।देश में स्कूली बच्चों के हादसों की फेहरिस्त लम्बी होती जा रही है अभिभावकों में खौफ बढता जा रहा है कि स्कूल बसें मौत का ताबूत बनने लगी हैं । इस हादसे मंे जिन्होनें अपने नौनिहाल खेाए है उन्हें उबरने में वर्षों लगेगें ,पिछले कुछ वर्षाें से स्कूली बच्चों को लाने वाले वाहनों के दुर्घटना के मामलों में वृद्वि होती जा रही है अतीत में घटित हादसों से सबक लिया होता तो ऐसे हादसे न होते।चालकों की लापरवाही का खामियाजा बच्चों को जान देकर भुगतना पड रहा है ।आंकडों पर नजर डालें तो इससे पहले बडे-बडे हादसे हो चुके हैं । 23 दिसंबर 1995 को हरियाण के मण्डी डबवाली में भयकर आग से 400 बच्चों की दर्दनाक मौत हुई थी वर्ष 1997 में राजधानी दिल्ली में एक स्कूल बस यमुना नदी में जलमग्न हा गई थी जिसमें 28 बच्चों की मौत हो गई थी जबकि 56 जख्मी हुए थे बस में सवार सभी बच्चों की उम्र 15वर्ष थी । वर्ष 1998 में कोलकाता में बच्चों को पिकनिक पर ले जा रही बस पदमा नदी में गिर गई जिसमें लगभग 53 बच्चे मारे गये थे।अगस्त 2004 में तमिलनाडू के कुम्भ कोणम में स्कूल में आग लगने से 90 नौनिहालों की मौत हुई थी 1 अगस्त 2006 को हरियाणा के सोनीपत के सतखुंबा में स्कूली बस नहर में गिर गई थी इस हादसे में 6 मासूमों की मौत हो गई थी । 30 मई 2006 को श्रीनगर में पिकनिक पर गये बच्चों की नाव का संतुलन बिगडने से 22 बच्चों की मौत हो गई थी । 26 जनवरी 2008 को गणतन्त्र दिवस समारोह मे शामिल होने जा रहे बच्चों की बस रायबरेली के मुंशीगंज में ट्रक से भिडी जिसमें 5 बच्चे मारे गये और 10 घायल हो गये थे 16 अप्रैल 2008 को गुजरात के वडोदरा जिले में नर्मदा नदी में स्कूली बस पलटी जिसमें 44 बच्चे मारे गये ।14 अगस्त 2009 को कर्नाटक के मंगलौर में फाल्गुनी नदी में स्कूली बस गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। 2 फरवरी 2009 को पंजाब के फिरोजपुर जिले में स्कूली बस टेªन से टकरा गई जिसमें 3 बच्चों की मौत हुई थी 20 मई 2009 में जालन्धर में ही एक स्कूली बस व टेªन में टक्कर के कारण 7 बच्चों की मौत हुई थी । 20 अगस्त 2009 को मुम्बई में एक स्कूल बस में आग लगने से 20 विद्यार्थी झुलस गये थे बस में 25 बच्चे सवार थे। दिल्ली के वजीरावाद हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्कूली बसों से छात्रों की सुरक्षा के लिए कई कानून बनाए थे मगर इसके बाद भी इन दुर्घटनाओं पर रोक नहीं लग सकी लगता है इन नियमों को लागू करने में खामियां रही हैंेेेेे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के मुताबिक चालक कोे भारी वाहन चलाने का पांच साल का अनुभव होना चाहिए तथा दो बार चालान होने पर चालक को सेवा से हटाया जाए ,अधिकतम रफतार 40 किमी प्रति घंटे हो , बस में फस्र्ट एड बाक्स के साथ आग बुझाने का यंत्र उपलब्ध होना चाहिए ।मगर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरासर धज्जियां उडाई जा रही हैं। इस तरह के हादसे स्कूल प्रबंधन की खामियों को उजागर करते हैंेे। स्कूल प्रबंधन अप्रशिक्षित चालको को रखते हैं , ऐसे लापरवाह चालकों का लाईसैंस रद्द करके सजा देनी चाहिए । यातायात पुलिस को भी ऐसे तेज गति से वाहन चलाने वालों को सबक सिखाना चाहिए अब भले ही सरकारें व स्कूल प्रबंधन लाखों रूपयों का मुआवजा दे लेकिन मुआवजे का मरहम उनके चिरागों को वापस नहीं कर सकता ।इस हादसे से सबक न सीखा तो भविष्य में मासूम मरते रहेगें ,नन्हे चिराग बूझते रहेगे ।सरकार को भी चाहिए कि लापरवाह स्कूल प्रबंधको के स्कूलों की मान्यता खत्म करके प्रबंधको को सजा दी जाए।

नरेन्द्र भारती , पत्रकार एवं स्तम्भकार- 09459047744

 

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