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आज भी पेट्रोमैक्स की रोशनी में होता है रामलीला का मंचन

बनारस के रामनगर की रामलीला पूरे देश में प्रसिद्ध है
पेट्रोमैक्स की रोशनी में 1835 से हो रही है रामलीला
सैकड़ों वर्ष बाद भी रामलीला का वही स्वरूप कायम
बनारस । बनारस के रामनगर की रामलीला भारत और दुनिया में जानी जाती है। वर्तमान में भी यह रामलीला पेट्रोमैक्स और लैंप की रोशनी के बीच में संपन्न होती है। 1835 में काशी नरेश महाराजा उदित नारायण सिंह के द्वारा इस रामलीला का मंचन शुरू कराया गया था उसके बाद से लेकर आज तक इस रामलीला के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया गया
इस रामलीला को देखने के लिए 10000 से ज्यादा दर्शक यहां पर पहुंचते हैं। रामलीला देखने के लिए दर्शक अपने घर से टाट पटृटी, चटाई इत्यादि लेकर यहां पहुंचते हैं। विजयादशमी के दिन रावण वध धनुष यज्ञ राजगद्दी और लंका दहन के दिन दर्शकों की संख्या लगभग 20000 तक पहुंच जाती है। यह रामलीला पूरे 31 दिनों तक सतत चलती है। आसपास के सैकड़ों मील के लोग एक ना एक दिन इस अवधि में रामलीला देखने जरूर पहुंचते हैं।
परंपरा के अनुसार बनारस महाराज रोज हाथी पर सवार होकर लीला स्थल तक जाते थे लेकिन उन्होंने अपने जीवन में कभी भी रावण का वध अपने सामने होते हुए नहीं देखा। यहां परंपरा है एक राजा दूसरे राजा का कभी वध होते हुए नहीं देखता है।

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