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आतंक से लड़ने को दुनिया एक साथ आए

दुनिया में बढ़ते इस्लामिक और वैश्विक आतंकवाद ने एक बार फ़िर दुनिया की सबसे बड़ी तागत अमेरिका और उसकी खुफिया संगठन एफबीआई को चौका दिया है। मंगलवार दोपहर बाद न्‍यूयॉर्क के लोअर मैनहटन में साइकिल परिपथ पर हुए लोन बुल्फ हमले में जहाँ निर्दोष आठ अमेरिकी नागरिकों को मौत की नीड सुला दिया वहीँ दुनिया में सबसे सुरक्षित देश कहलाने वाले अमेरिका की सुरक्षा सवालों के घेरे में है। हमले में 12 लोग घायल भी हुए हैं । लोन बुल्फ हमले की साजिश रचने वाला आतंकी उजबेकिस्‍तान का सैफुल्लो सैपोव है । पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जब वह ट्रक से कूदा तो ‘अल्‍लाह हो अकबर’ चिल्‍ला रहा था। यह हमला वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर से महज दस किमी दूर है । आतंकी ने किराए की ट्रक लिया था। उसने स्कूली वैन से भी टक्कर मारी जिसमें दो मासूम बच्चे हुए हैं । जबकि साइकिल पथ पर चल रहे आठ लोगों की कुचलने से मौत हो गई । ट्रक रुकने के बाद हमलावर दोनों हाथों में गन लेकर उतरा , लेकिन यह नकली थी , अगर असली बंदूक होती तो हादसा और भयावह होता , जिसकी कल्पना तक नहीँ की जा सकती थी । लेकिन पुलिस ने उसे मार गिराया। लोन बुल्फ करने वाला आतंकी 2010 में अमेरिका आया था और उसके पास फ्लोरिडा का ड्राइविंग लाइसेंस था। वह न्यूजर्सी में दस सालों से रह रहा था।

मैनहटन में हुए इस आतंकी हमले के बाद अमेरिका के साथ पुरी दुनिया सख़्ते में है । क्योंकि बगदादी के गुर्गों ने दुनिया भर में आतंकी तवही मचाने के लिए जो रास्ता तैयार किया है, उससे निपट पाना आसान नहीँ है । दुनिया भर में लोन बुल्फ हमले बढे हैं । जुलाई 2016 में फ्रांस के नीस में हमले में 86 लोग मारे गए थे । इसके बाद लंदन , बर्लिन और दूसरे शहरों में इस तरह के आतंकी हमले हुए हैं । सीरिया , इराक और अफगानिस्तान में आईएएसआई के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की नीति खुद अमेरिका के लिए भारी पड़ने लगी है । अमेरिका की कमान सम्भालने के बाद से ही ट्रम्प इस्लामिक आतंकवाद को लेकर सख़्त हैं। अमरीका प्रवेश पर सात इस्लामिक देशों के खिलाफ प्रतिबंध लगाकर उन्होंने अपनी नीति साफ कर दिया था। लेकिन उनके इस आदेश पर सिएटल की निचली अदालत ने प्रतिबंध लगा दिया था। उदारवाद संगठनो ने इसकी तीखी निंदा की थी।

हालांकि अमेरिका जैसे सुरक्षित देश में यह पहला हमला नहीँ है। दर्जन भर से अधिक आतंकी हमले हो चुके हैं । वर्ल्डट्रेड सेंटर पर 9/11 को हुए हमले में तीन हजार लोगों की मौत हुई थी । अमेरिका इस हमले को लेकर बेहद गम्भीर है। ट्रम्प ने आतंक के खिलाफ अपनी नीति साफ करते हुए कहा है कि मध्यपूर्व में हम आतंकी साजिश को कामयाब नहीँ होने देंगे । यह हमला इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ ट्रम्प की मुहिम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है । क्योंकि अमेरिका जैसे सुरक्षित देश में बाहर से आतंकवादियों का घुसना मुशिकल ही नहीँ नामुमकिन भी है । इसलिए अलकायदा और बगदादी के लड़ाके सम्बन्धित मुल्कों में ही अपनी फौज तैयार करने में जूटे हैं । यह हमला उसी की एक बानगी है । क्योंकि अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने पहले ही यह बात कह चुकी है कि ट्रम्प चरमपंथी संगठनों के निशाने पर हैं । अमेरिका में ओबामा शासन के अंत और ट्रम्प के उदय के बाद आतंक के खिलाफ काफी बदलाव देखने को मिला है। उसकी निगाह में आतंकवाद अच्छा और बुरा नहीं हो सकता है। आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद है। इस्लामिक आतंकवाद के पोषक पाकिस्तान के खिलाफ एक के बाद एक त्वरित अमेरिकी सीनेट के फैसले से स्थितियां बदल गयी हैं। इससे यह साबित हो गया है कि आतंकवाद पर अमेरिका की नीति दूसरे देशों से पूरी तरह अलग, खुली और पारदर्शी है। इस पर कोई आशंका नहीं दिखाई जा सकती।

जिसकी वजह से आईएसआई, अलकायदा और आतंक का पोषण करने वाला पाकिस्तान और चीन यह बात पचा नहीँ पा रहा है । भारत जहाँ आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का भरोसा जीतने में कामयाब हुआ है । वहीँ दुनिया के अधिकांश मुल्कों को वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ एक मंच पर लाने में भी कामयाबी मिली है । जिसकी वजह है कि आज अमेरिका, ब्रिेटेन और फ्रांस, इज़राइल से अच्छा सहयोग मिल रहा है। अमेरिका ने कश्मीर में आतंकवाद की जड़ हिजबुल मुजाहिदीन को अंतरर्राष्टीय आतंकवादी संगठन घोषित कर यूएन में भारत की राह आसान किया है। लेकिन चीन संयुक्तराष्ट संघ में भारत के उस प्रस्ताव का बार-बार वीटो का प्रयोग कर विरोध कर रहा है जिसमें अजहर मसूद को अतंर्राराष्टीय आतंकवादी घोषित करने की बात की गई है। इस बार भी वह अड़ंगा लगा कर इस प्रस्ताव को यूएन में खरिज कराने पर तुला है , जबकि चीन को छोड़ वीटो के सभी देश भारत की दलील पर सहमत हैं । अभी कुछ महींने पहले संबंधित आतंकी संगठन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को अमेरिका ने ग्लोबल आतंकी घोषित किया था। इसके साथ ही अमेरिका ने की आर्थिक मदद पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। हाफिज सईद को अमेरिका पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुका है। ऐसी स्थिति में भारत वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत और अमेरिका
एक नया माहौल बनाने में कामयाब हुए हैं । यह हमारी सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत है। अमेरिकी सरकार पाकिस्तान को दुनिया भर में दहशतगर्दी और आतंक फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहरा चुकी है । वह पाकिस्तान को आतंकवाद पर दोगली नीति खत्म करने की कई बार चेतावनी भी दे चुका है। यही वजह रही कि पाकिस्तान को आतंक की फसल उगाने वाले देशों की सूची में डाल दिया गया है। अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अंतरराष्टीय मंच पर बेनकाब हुआ है। भारत दुनिया को यह बताने में कामयाब हुआ है कि कश्मीर में आतंवाद की असली जड़ पाकिस्तान है। लेकिन पाकिस्तान पर क्या इस कार्रवाई से कोई फर्क पड़ने वाला है। पड़ोसी मुल्कों में आतंक की आपूर्ति नीति पर क्या वह प्रतिबंध लगाएगा। उसके नजरिए में क्या कोई बदलाव आएगा। लेकिन आतंक के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान और चीन के खिलाफ भारत को एक बड़ा और विश्वसनीय सहयोगी मिला है। अमेरिका ने पाकिस्तान को साफ कहा कि वह अपनी खुफिया एजेंसी आईएसआई के जरिए अफगानिस्तान में फैलाए गए हुक्कानी, तहरीके तालिबान आतंकी संगठनों पर रोक लगाए। पाकिस्तान कश्मीर में 40 सालों से आतंकवाद से छद्म युद्ध लड़ रहा है। क्योंकि पाकिस्तान भारत से सीधी जंग में कभी जीत नहीं सकता लिहाजा वह आतंकियों का सहारा लेता है। वहां कोई सरकार रहे लेकिन कश्मीर नीति में कोई बदलाव नहीं आता है।अब पाकिस्तान की धरती से लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद और हुक्कानी नेटवर्क के दिन लदने वाले हैं। क्योंकि अमेरिकी सीनेट ने पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य मदद पर जहां शर्तों के साथ पूर्व में ही प्रतिबंध लगा चुकी है। दोनों देशों के संबंधों के बीच कूटनीतिक जीत है। भारत-अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्तों ने एक मिशाल कायम की है। अमेरिका पाकिस्तान को साफ शब्दों में कहा था कि आतंक पर दोहरी नीति नहीं चलेगी। पाकिस्तान को खुद की धरती से आतंकी शिविरों को हरहाल में नष्ट करना होगा। 
लेकिन अमेरिका में हुआ लोन बुल्फ अटैक भारत की चिंता बढ़ा दिया है । क्योंकि अमेरिका के मुकाबले यहाँ इस तरह के हमले बेहद आसान और कम खर्चीले हैं । क्योंकि इस तरह के लोन बुल्फ हमलो में आतंकी संगठनो को मामूली पैसे खर्च करने पड़ते हैं। अकेला आतंकी मिशन को कामयाब करता हैं । कम आतंकियों की मौत होती है । बाहर से आतंकियों को भेजने और पकड़े जाने का जोखिम नहीँ रहता है । अपनो के बीच का आदमी काम कर जाता है और लोगों को किसी प्रकार की कोई आशंका नहीँ होती। घटना के बाद स्थिति और हमले का पता चलता है । अब तक जितने हमले इस तकनीक से हुए हैं उनमें आईएसआई का हाथ रहा है । हालांकि जिस तरह से दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवाद अपनी जड़े जमा रह है , उससे कोई देश सुरक्षित नहीँ है । बावजूद आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए कोई वैश्विक नीति नहीँ बन पा रहीं। जबकि दुनिया का ऐसा कोई मुल्क नहीँ है जो आतंक की विभीषिका न झेल रहा हो । लेकिन भारत दुनिया को यह समझाने में कामयाब रहा है कि आतंक किसी का दोस्त नहीँ हो सकता , वह न अच्छा- बुरा नहीँ होता है। वह सिर्फ आतंक होता है। दुनिया को इस चुनौती से निपटने के लिए एक मंच पर आना चाहिए ।

प्रभुनाथ शुक्ल

लेखकः स्वतंत्र पत्रकार हैं

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