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उत्तर पश्चिम रेलवे में शत प्रतिशत ई-टेंडरिंग पारदर्शिता बढ़ने के साथ एवं राजस्व में भी वृद्धि

जयपुर। डिजिटल इण्डिया अभियान को अधिक बल देने की दिषा में उत्तर पश्चिम रेलवे के भण्डार विभाग द्वारा विशेष पहल की है। भण्डार विभाग की शत प्रतिशत टेण्डर प्रक्रिया ई-टेण्डरिंग के माध्यम से की जा रही है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री तरूण जैन के अनुसार सभी वेण्डरों को टेण्डर में अधिक पारदर्शिता एवं समान अवसर प्रदान करने के उदेश्य से बोलिया एवं ऑफर केवल ऑनलाइन ही स्वीकार किये जा रहे है।
उन्होंने बताया कि ई-टेण्डरिंग से टेण्डरों को अत्याधिक प्रचार-प्रसार मिला जिसके परिणाम स्वरूप टेण्डरों में काफी प्रतिष्ठित प्रतिस्पर्धात्मक बोलिया प्राप्त हुई जिसके कारण रेलवे के कीमती राजस्व में काफी बचत हुई है। ई-टेडरिंग से रेलवे में सामग्री की आपूर्ति काफी कुषलता और प्रभावी तरीके से करने में सहायता मिली है टेंडर प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से आपूर्ति को कारगर बनाने में भी सहायता मिली है।
उपरोक्त के अलावा ई-टेडरिंग से होने वाले पांच प्रमुख लाभ निम्न प्रकार हैः-
आपूर्तिकर्ताओं की बोलियां ऑनलाइन मैनेज करना
ऑनलाइन की ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से आप इस प्रणाली को सुव्यवस्थित कर सकते हैं ई-टेंडरिंग प्रणाली स्वतः बोलियां आमंत्रित करती है तथा आई हुई बोलियों को सुव्यिवस्थित करती हैं इसका अर्थ यह हुआ कि आपूर्ति के लिए जिम्मेदार लोग अब अपना ध्यान खरीद पर दे सकते हैं ना कि इस पर कि उनका प्रस्ताव सही समय पर प्रविष्ट हो गया है।
एक अच्छी ई-टेंडरिंग प्रणाली वही होती है जिसमें निविदाकर्त्ता आसानी से अपने प्रस्ताव अपलोड कर सके तथा दस्तावेजों को आसानी से डाउनलोड कर सके प्रणाली द्वारा प्राप्त प्रस्तावों को आप सुव्यवस्थित कर सकते हैं तथा उनके तुलनात्मक समीक्षा कर आवष्यक प्रस्ताव प्राप्त कर सकते हैं।
स्वचालित ई-निविदा प्रक्रिया
पूर्व योग्यता प्रष्नावली से और निविदा (आईटीटी) के मूल्यांकन, बातचीत और पुरस्कार के लिए आमंत्रण से ई-निविदा प्रक्रिया को स्वचालित करके मदद करता है। यह आसान बनाता है कि अधिक संभावित बोलीदाताओं को आमंत्रित करें और सर्वोत्तम मूल्य निर्धारण प्राप्त करने के लिये रिवर्स नीलामी जैसे वार्ता मॉडल चलाने के लिए बहुत आसान है।
पूर्ण लेखा-परीक्षण तथा खुफिया प्रक्रिया
आईआरईपीएस पर डेटा केंद्रित का अर्थ है कि हम जो भी निविदा प्रक्रिया चलाते है वह प्रक्रिया के बारे में खुफिया जानकारी प्रदान करता है और पूर्ण ऑडिट ट्रेल प्रदान करता है। इसका मतलब है कि आपके पास क्या और सबमिट कब प्रस्तुत किया गया, उसकी दृष्यता होगी। हालांकि इसका मतलब यह भी है कि आप अपनी निविदा प्रक्रियाओं की प्रभावषीलता में अंतदृष्टि प्राप्त करेंगे।
कम लागत और टिकाऊ, पर्यावरणीय रूप से अनुकूल निविदाएं केवल बोलीदाताओं का डाक खर्च ही नहीं बचेगा किन्तु ई-टेंडरिंग से कई प्रतियों की छपाई और पोस्टिंग की आवष्कताओं को कम करके एक छोटा सा पर्यावरणीय संदेष छोड़ता है।
खरीद करने की अवधि में कमी लाना
ई-निविदा का एक लाभ खरीद करने की अवधि में कमी है जो यह प्रदान करता है। परम्परागत खरीद में पीक्यूक्यू (च्फफ) के लिए लंबा विलंब, निविदा दस्तावेजों को परिपत्रित करना, प्रष्नों पूछताछ के दौर तथा लंबी खोजबीन (पता लगाने) सम्मिलित हैं।
विषेष रूप से यह अनुमानित किया जाता है कि (ई-टेंडरिंग) ई-निविदा प्रक्रिया खरीद अवधि को 30 प्रतिषत कम करती हैं। लीड़ समय कम करने से अभिप्राय ऊपरी खर्च आदि में कमी से है। डाटा केंद्रित ई-निविदाकरण का तात्पर्य अधिक परिषुद्ध जवाब दे ही तथा अधिक प्रभावपूर्ण मूल्यांकन की दक्षता से है जिसका अर्थ न्यूनतम लागत तथा बेहतर परिणाम है।

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