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उत्साह

उत्साह

तुम्हारा उत्साह
जैसे तम के वक्ष पर
प्रकाश की एक किरण
वियावान जंगल में कुलांच भरता एक
हिरण
उदासी को चीरता एक तीर
जेठ की दुपहरी पर ज्यों
बादलों की अमृत धार
क्या नाम दूँ उसे/जो मुर्दों के लिए
संजीवन बूटी है
और बुजुर्गों की दुआ की तरह
प्रभावकारी भी
सुप्त प्राणों में भरता प्राण
असहायों को मिलता त्राण
आश्यकता है/बचा कर रखने की
जो भविष्य का संबल बने
नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक
हताशा निराशा के लिए दीप
उनके लिए उत्साह, ही तो सहारा है
किनारा भी है और मंजिल का
दीप भी
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डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना
“कव्यांगन”, पुरानी गुदरी, महाबीर चौक
बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार – 845438
09431601682

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