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एक बार फिर कांग्रेस की हार का कारण बनेंगे अय्यर!

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय़्यर ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के संबंध में एक ऐसा बयान दे दिया था जिसने कांग्रेस की हार में एक अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने मोदी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा था कि 21वीं शताब्दी में वह (नरेंद्र मोदी) प्रधानमंत्री बन पाएंऐसा कतई मुमकिन नहीं है लेकिन यदि वह यहां (कांग्रेस अधिवेशन में) आकर चाय बेचना चाहें तो हम उनके लिए जगह बना सकते हैं।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचपन में चाय बेचा करते थे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने इस बात का कई बार जिक्र किया था। उनके इसी चाय बेचने को आधार बनाकर अय्यर ने मोदी पर तंज कसते हुए उक्त बात कही थी। उनके इस बयान के बाद भाजपा ने विरोधस्वरूप चुनाव प्रचार का एक नया सेगमेंट चाय पर चर्चा शुरू कर दी थी। यह सेगमेंट इतना हिट हुआ कि कांग्रेस पूरी तरह से सियासी पिच से रनआउट हो गई। इस चुनाव में उसे अब तक की सबसे बड़ी पराजय का सामना करना पड़ा। लगभग छः दशक तक देश पर शासन करने वाली पार्टी अपने सदस्यों की संख्या 60 तक भी नहीं पहुंचा पाई। वर्तमान लोकसभा में उसके महज 44 सदस्य ही प्रवेश पा सके।

बहरहाल, चाय वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता‘ कहकर राजनीतिक बवाल खड़ा करने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने अब एक बार फिर अपना मुंह खोला है। इस बार भी निशाना पीएम मोदी ही हैं। उन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले पीएम मोदी को नीच व्यक्ति करार दे दिया। अप्रत्यक्ष रूप से पीएम मोदी के लिए नीच‘ जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा, ‘मुझको लगता है कि ये आदमी बहुत नीच किस्म का है। इसमें कोई सभ्यता नहीं है।

अय्यर ने पीएम मोदी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देने के दौरान यह टिप्पणी की थी जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बाबा अंबेडकर को नहीं जानते हैंबाबा भोले को जानते हैं। दरअसलदिल्ली में अंबेडकर प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित एक भवन के उद्घाटन समारोह में पीएम ने जवाहर लाल नेहरू पर भी डा. भीमराव अंबेडकर के साथ पक्षपात करने और उनकी भूमिका को कम करके दिखाने का आरोप लगाया था।

गुजरात में साख की लड़ाई लड़ रही भाजपा ने अय्यर के इस बयान को बगैर देर किये लपक लिया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अय्यर के इस बयान को गुजरात की अस्मिता से जोड़ते हुए कांग्रेस के सामने मुश्किलें खड़ी करनी शुरू कर दी। अय्यर के इस गैरजरूरी बयान से बैकफुट पर आई कांग्रेस ने नुकसान से बचने के लिए इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए अय्यर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलम्बित कर बीजेपी की तरफ झुकती जनता की सहानुभूति को संतुलित करने और आपत्तिजनक भाषा व्यवहार को दंडित करने का त्वरित निर्णय कर देश में एक अच्छा संदेश देने का प्रयास किया है।

अय्यर ने भी हिंदी की कम जानकारी होने की बात कहकर माफी मांगी लेकिन जो नुकसान होना था हो चुका था। देखना दिलचस्प होगा कि चाय वाले बयान के जरिये लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस की हार की इबारत लिखने वाले अय्यर का नीच वाला बयान क्या गुल खिलाता है।

बहरहाल, गुजरात में 2002 के दंगों के बाद से ही नरेंद्र मोदी आलोचकों के निशाने पर रहे हैंलेकिन जाने-अनजाने उन पर किए गए हर हमले के बाद वे पहले से ज्यादा मजबूत बनकर उभरे हैं। उन्हें विवादास्पद और समाज को बांटकर ध्रुवीकरण करने वाला नेता करार दिया गया लेकिन इससे उन्हें नुकसान के बजाय फायदा ही हुआ है। लगातार 13 साल तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के बाद वे पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री हैं और अगले आम चुनाव में भी अब तक उनके सामने कोई नजर नहीं आ रहा है। बावजूद इसके कि इस दौरान नोटबंदी व जीएसटी जैसे सख्त फैसलों को लेकर कुछ खास हलको में उनकी आलोचना भी हुई है।

इससे इतर मोदी पर सबसे पहले तीखे हमले की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से हुई थी। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मोदी को मौत का सौदागर’ कहा था। भारत में किसी वरिष्ठ राजनेता के खिलाफ इतनी तीखी टिप्पणी इससे पहले कभी नहीं की गई थी। उस चुनाव में मोदी और अधिक मजबूत बनकर उभरे थे। इससे कोई सबक न लेते हुए 2014 के आम चुनाव में प्रचार के दौरान सोनिया ने एक कदम और आगे बढ़कर मोदी पर जहर की खेती’ करने का आरोप चस्पा कर दिया। कच्छ से कामरूप व कश्मीर से कन्याकुमारी तक मोदी मोदी के शोरशराबे में कांग्रेस अध्यक्षा के ये आरोप बेअसर रहे। उल्टे कांग्रेस के हर तल्ख बयान को अपनी हाजिरजवाबी के जरिए उसी की तरफ मोड़ देने में सिद्धहस्त मोदी उसी को कठघरे में खड़ा करने में कामयाब रहे हैं। न केवल कामयाब रहे हैं बल्कि कांग्रेस के ये बयान उसी के लिए  आत्मघाती साबित हुए हैं।

बद्रीनाथ वर्मा

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