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एयर इंडिया के खिलाफ सर्वाधिक शिकायत, ओटीपी में इंडिगो आगे

नयी दिल्ली। सरकारी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया का प्रदर्शन यात्रियों की शिकायत के मामले में अक्टूबर में एक बार फिर सबसे खराब रहा जबकि समय पर उड़ान भरने यानी ओटीपी के मामले में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पहले स्थान पर रही।

नागर विमानन महानिदेशालय के आँकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में विमान सेवा कंपनी कंपनियों के खिलाफ कुल 656 शिकायतें आईं। इस महीने यात्रियों की संख्या एक करोड़ चार लाख के पार रही। इस प्रकार प्रति एक लाख यात्री 6.3 शिकायत आई। शिकायतों के औसत और संख्या दोनों के मामले में एयर इंडिया का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। उसके खिलाफ प्रति एक लाख यात्री 17 की दर से 228 शिकायतें आईं।

जेट एयरवेज और जेट लाइट के खिलाफ प्रति लाख 13 की दर से 227 शिकायत दर्ज की गई। प्रति एक लाख यात्री गो एयर के खिलाफ सात, ट्रू जेट के खिलाफ पाँच, स्पाइस जेट के खिलाफ तीन, एयर एशिया और इंडिगो के खिलाफ दो-दो और विस्तारा के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की गई।

अक्टूबर में हवाई यात्री विमान सेवा कंपनियों की ग्राहक सेवा से खासे असंतुष्ट दिखे। कुल शिकायतों में ग्राहक सेवा को लेकर 30.5 फीसदी शिकायत दर्ज की गई। बाइस फीसदी शिकायत बैगेज से संबंधित, 16 फीसदी उड़ान से संबंधित, 8.1 फीसदी रिफंड से संबंधित और 7.5 फीसदी कर्मचारियों के व्यवहार के बारे में रहीं।
निजी ऑपरेटरों द्वारा संचालित देश के चार बड़े महानगरों दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद के हवाई अड्डों पर समय पर उड़ान भरने के मामले में इंडिगो का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। उसकी 83.9 फीसदी उड़ानें समय पर रवाना हुईं।
किफायती विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट 83.3 प्रतिशत ओटीपी के साथ इस मामले में दूसरे स्थान पर रही जबकि एयर इंडिया 77.2 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रही। विस्तारा की 75.6 फीसदी उड़ानें, गो एयर की 73.1 फीसदी और जेट एयरवेज तथा जेटलाइन की 64 प्रतिशत समय से रवाना हुईं।
बड़ी विमान सेवा कंपनियों में एयर इंडिया की ही सबसे ज्यादा उड़ानें भी रद्द हुईं। उसकी कुल 1.38 प्रतिशत उड़ानें रद्द हुईं। हालाँकि, छोटी विमान सेवा कंपनियों में जूम एयर की 8.06 फीसदी और ट्रू जेट की 6.34 फीसदी उड़ानें रद्द हुई हैं। जेट की 1.10 फीसदी, विस्तारा की 0.48 फीसदी, स्पाइस जेट की 0.33 फीसदी, जेट एयरवेज की 0.25 फीसदी, इंडिगो की 0.24 फीसदी और गोएयर की 0.07 फीसदी उड़ानें रद्द हुईं। इस मामले में राष्ट्रीय औसत 0.50 प्रतिशत रहा यानी अक्टूबर में हर दो सौ उड़ानों में एक रद्द हुई है।
उड़ानें रद्द होने की सबसे बड़ी वजह तकनीकी कारण रहे हैं। विविध कारणों से 27.3 फीसदी और खराब मौसम की वजह से 15.3 फीसदी उड़ानें रद्द हुईं। 5.7 फीसदी उड़ानों के रद्द होने की वजह परिचालन से संबद्ध रही जबकि वाणिज्यिक कारणों से विमान सेवा कंपनियों ने 4.9 फीसदी उड़ानें रद्द कीं।

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