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एसपीएस की टीम ने बचा ली 5 माह की गर्भवती महिला की जिंदगी

लुधियाना। शादी के 20 साल बाद भी जब औलाद नहीं हुई तो वीरपाल ने आईवीएफ के जरिए मां बनने का सोचा। उसने इसके लिए जरूरी ट्रीटमेंट भी लिया और भगवान ने उसकी झोली में एक दो नहीं बल्कि पूरे 5 भ्रूण डाल दिए। लेकिन यह मोलर प्रेगनेंसी बन गई और पांच में से 3 भ्रूण डेड हो गए। पांच माह के भ्रूण डेड होते ही उसकी अपनी जिंदगी खतरे में आ गई। एचबी केवल 4 ग्राम रह गया। कई अस्पतालों ने जब उसका केस करने से मना कर दिया तो पिछले हफ्ते उसके परिवार के लोग उसे एसपीएस हॉस्पिटल ले आए। जहां डॉक्टरों ने इसे बड़े चैलेंज के रूप में लेते हुए रिस्क लेकर सर्जरी की और वीरपाल की जान बच गई। पांच माह पहले वीरपाल कौर की प्रेगनेंसी रिपोर्ट जब पॉजिटिव आई तो पूरा परिवार खुश था, लेकिन जैसे-जैसे प्रेगनेंसी का समय बढ़ा, उसे कई कांप्लिकेशन्स होने लगी। क्योंकि उसका पेट तरबूज का आकार लेने लगा था, लिहाजा उन्होंने डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने अबनॉर्मल प्रेगनेंसी कहते हुए ट्रीटमेंट से मना कर दिया। इसके बाद कई बड़े अस्पतालों व डॉक्टरों के पास गए, मगर किसी ने भी इस हाई रिस्की केस को करने की हामी नहीं भरी। पिछले हफ्ते परिवार के लोग उसे एसपीएस अस्पताल ले आए। जहां सीनियर गाइनीकोलॉजिस्ट डॉ. वीनस बांसल ने इसे एक चैलेजिंग केस के रूप में स्वीकार किया। उसका एचबी केवल 4 ग्राम और ह्यूमन क्रोनिक गौनडोट्रोपिन (एचसीजी) बेटा लेवल लाखों में पहुंच चुका था। इस केस में हल्की सी गलती मरीज के लिए घातक साबित हो सकती थी। इस कारण डॉ. वीनस ने जनरल सर्जन डॉ. प्रफुल्ल आर्य, एनास्थिस्ट डॉ. रितुल, हेमोटोलॉजिस्ट डॉ. नारंग, इनटेंसिविस्ट डॉ. गुरप्रीत सिंह व डॉ. समता और गाइनीकोलॉजिस्ट (रेजिडेंट्स) डॉ. जसप्रीत और डॉ. भाविका के साथ टीम बनाकर केस की स्टडी की। सबसे बड़ी चुनौती इस केस को सही तरीके से डायगनोस करना था। डॉ. बख्शी व डॉ. विक्रम मुत्नेजा ने मोलर की सही स्थिति पता लगाने में मदद की। डॉ. रितुल ने बताया कि ट्रोफॉब्लास्टिक इंबोलिज्म की वजह से इस केस में बहुत बड़ा रिस्क था। क्योंकि मोलर प्रेगनेंसी की कोशिकाएं ब्लड सर्कूलेशन में जाकर जीवन के लिए खतरा बन चुका था। डॉ. गुरप्रीत और डॉ. समता को सर्जरी के बाद आईसीयू में देखभाल के लिए अलर्ट रखा गया। इसके बाद सर्जरी कर उसके पेट में पल रहे पांचों भ्रूण निकाल दिए गए। डॉ. वीनस ने बताया कि फर्टिलाइजेशन के तुरंत बाद कुछ गलत होने के कारण मोलर प्रेगनेंसी बन गई। जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती थी। अब वीरपाल कौर बिल्कुल सेफ है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। डॉ. वीनस के मुताबिक एसपीएस हॉस्पिटल में सभी डॉक्टर एक टीम के रूप में काम करते हैं और सभी की स्पेशलाइजेशन मरीजों की बेहतरी के काम आती है। यहां पर सभी आधुनिक सुविधाएं होने की वजह से हम लोग रिस्की केसों को भी सफलतापूर्वक हैंडल कर लिया जाता है।

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