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ऑड-ईवन: NGT की फटकार के बाद केरीवाल सरकार ने दायर की पुनर्व‌िचार याच‌िका

नई दिल्ली। ऑड-ईवन फॉर्मूला दिल्ली में लागू हो पाएगा या नहीं यह फिलहाल साफ नहीं है लेकिन दिल्ली सरकार इससे महिलाओं को छूट देने की मांग लेकर एनजीटी पहुंची है। केजरीवाल सरकार ने अपील की है कि ऑड-ईवन फॉर्मूले से महिलाओं के अलावा दोपहिया वाहनों को भी राहत दी जाए। फिलहाल इस पर सुनवाई जारी है। इससे पहले एनजीटी की तरफ से दिल्ली सरकार को एक बार फिर से फटकार लगी। खबरों के अनुसार सरकार ने एनजीटी की शर्तों के चलते सोमवार से राजधानी में प्रस्तावित ऑड-ईवन फॉर्मूले को लागू नहीं किया। सरकार ने एनजीटी की शर्तों के कारण ऐसा किया और इन शर्तों को लेकर रिव्यू पिटिशन लगाने की बात कही थी। सोमवार को जब ऐसा करने की बारी आई तो दिल्ली सरकार इसमें लेट हो गई जिसे लेकर एनजीटी ने उसे कड़ी फटकार लगाई। एनजीटी ने पूछा है कि क्या सरकार ने मीडिया में रिव्यू पीटिशन को लेकर बयान क्यों दिया जबकि अब तक ऐसी कोई याचिका नहीं लगी है। हालांकि दोपहर बाद सरकार ने अपनी याचिका लगा दी।

इससे पहले शनिवार को दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि दोपहिया वाहनों और महिलाओं को छूट ना दिए जाने से ऑड-ईवन को लागू करने में दिक्कत आएगी, क्योंकि हमारे पास पर्याप्त बसें नहीं हैं। दिल्ली सरकार सोमवार को इस संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अपील करेगी। वहीं, शनिवार सुबह एनजीटी ने केजरीवाल सरकार को कहा कि इस बार ऑड-ईवन फॉर्मूले में किसी को छूट नहीं मिलनी चाहिए, जबकि सरकार महिलाओं को और दोपहिया चालकों को इस नियम से छूट देना चाहती थी। केजरीवाल सरकार के इस फैसले को गलत बताते हुए एनजीटी ने इस योजना के तहत केवल आपातकालीन वाहनों को ही छूट देने की बात कही।

एनजीटी द्वारा योजना को सशर्त मंजूरी दिए जाने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दोपहर को अपने निवास पर आपात बैठक बुलाई। इसमें अधिकांश मंत्रियों व अधिकारियों ने फिलहाल फैसला वापस लेने का सुझाव दिया। इससे पहले सत्ता पक्ष के विधायक भी सरकार से फैसला रद्द करने की मांग अलग-अलग तरीके से कर चुके थे।

यातायात की गंभीर समस्या होगी पैदा –

एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में लगभग लाख दोपहिया वाहन रोजाना चलते हैं। अगर इतनी बड़ी तादाद को ऑड-ईवन के दायरे में लाया गया तो राजधानी में यातायात की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।

सुरक्षा संबंधी समस्याएं होंगी पैदा –

इसके अलावा महिलाओं को भी ऑड-ईवन के दायरे में लाने पर उनके साथ सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। दिल्ली सरकार फिलहाल इस तरह की कोई परेशानी मोल लेना नहीं चाहती है।

4400 और बसों की होगी जरूरत –

दिल्ली में अभी करीब चार हजार डीटीसी की बसें चलती हैं। 10 बसें कलस्टर सेवा के अंतर्गत चलती हैं। इन बसों में करीब 35 लाख लोग रोज सफर करते हैं। औसतन एक बस यात्रियों को सफर कराती है। दोपहिया बंद होने से करीब 35 लाख लोग रोज पैदल होंगे। इस हिसाब से 4400 और बसों की फौरन जरूरत होगी। ऐसा नहीं होने पर एक बस में औसतन 1700 लोग सफर करेंगे। इससे बस में चढ़ने वालों की भीड़ बढ़ेगी। भीड़ बढ़ने से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की समस्या खड़ी हो सकती है।

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