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कई वर्षों बाद नवरात्रि महा योग में

पालकी पर विराजमान होकर आयेगी महामाया,चरणायुध से होगा प्रस्थान, भरेगी सबकी झोलिया

सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तु ते ॥

शारदीय नवरात्रि 21 सितंबर गुरूवार से प्रारंभ
पं अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक अश्वनी मासे शुक्ल पक्षे हस्त नक्षत्र युक्त , शुक्ल योग बालव करण, सूर्य ,चंद्रमा इस समय कन्या राशि मे स्थित है कई वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है नव दिन की है नवरात्रि ,

इस बार पूरे नव दिन होगी मां की आराधना भगवति,जगत जननी , पराम्बा, राज राजेश्वरी, आद्यशक्ति , मां दुर्गा देवी पालकी पर विराजमान हो कर आयेंगी और चरणायुध से प्रस्थान होगा ।
अपने सभी भक्तों की मुरादे पूर्ण करेंगी मां शेरावाली

नवदिवस …
नौ दिनों तक चलने वाली पूजा में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने से जातक को हर मुश्किल से छुटकारा मिल जाता है।

घटस्थापना का यह है शुभ मुहूर्त :
! चौघड़िया !
शुभ- 06:16 – 07:47 शुभ
चर- 10:49 – 12:20 शुभ
लाभ- 12:20 – 13:51 शुभ
अमृत- 13:51 – 15:21 शुभ
शुभ- 16:52 – 18:23 शुभ
अभिजीत मुहुर्त — 11.36 से 12.24 बजे तक है।

चौघड़िया, रात में
अमृत- 18:23 – 19:52शुभ
चर – 19:52 – 21:22शुभ

अभिजीत मुहुर्त — 11.36 से 12.24 बजे तक है।

चौघड़िया, रात में
अमृत- 18:23 – 19:52शुभ
चर – 19:52 – 21:22शुभ

अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक यह भी मान्यता है कि नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा समय शुरू हो जाता है इसलिए अगर जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाते है तो वो पूरे दिन किसी भी समय कलश स्थापित कर सकते है क्योंकि मां दुर्गा कभी भी अपने भक्तों का बुरा नहीं करती हैं।

मां के 9 रूपो की पूजा…

  1. 21 गुरुवार सितम्बर 2017 : मां शैलपुत्री की पूजा
  2. 22 शुक्र : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
  3. 23 शनि : मां चन्द्रघंटा की पूजा
  4. 24 रवि : मां कूष्मांडा की पूजा
  5. 25 सोम : मां स्कंदमाता की पूजा
  6. 26 मंगल : मां कात्यायनी की पूजा
  7. 27 बुध : मां कालरात्रि की पूजा
  8. 28 गुरु : मां महागौरी की पूजा
  9. 29 शुक्र : मां सिद्धदात्री की पूजा
  10. 30 शनि : दशमी तिथि, दशहरा

स्वंयम इन रंगों के वस्त्रों को धारण कर के पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
एवं माता को फल मिठाई ,16 श्रंगार भी चढ़ाये जाते है

  • प्रतिपदा : लाल
  • द्वितीया : रायल ब्लू
  • तृतीया : पिला
  • चतुर्थी : हरा
  • पंचमी : ग्रे
  • षष्टी : नारंगी
  • सप्तमी : सफेद
  • अष्टमी : गुलाबी
  • नवमी :आसमानी नीला

अखंड दीपक का महत्व:-
अखंड ज्योत कई घरों में मंदिरों में आज भी चारो नवरात्री में जलाई जाती है पं अंकित मार्कण्डेय के अनुसार दुर्गा पूजा में अखंड ज्योत का अपना ही महत्व है। इससे पॉजीटिव एनर्जी आने के साथ ही कई तरह की नेगेटिव एनर्जी के प्रवेश का रास्ता भी बंद हो जाता है ।

दुर्गा पूजा में अखंड ज्योत:
– मां की कृपा: मां के सामने अंखड ज्योति जलाने से उस घर में हमेशा से मां की कृपा बनी रहती हैं।
– बुरा साया नहीं: नवरात्र में अखंड ज्योति से पूजा स्थल पर कभी भी बुरी चीजों का साया नहीं पड़ता है।
– घी या तेल का अखंड दीप: नवरात्र में घी या तेल का अखंड दीप जलाने से मन मस्तिष्क में कभी भी नकारात्मक सोच हावी नहीं होती है और चित्त,मन खुश और शांत रहता है।
– स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा: नवरात्र में अंखड दीप जलाना स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है क्योंकि घी और कपूर की महक से इंसान की श्वास और नर्वस सिस्टम बढ़िया रहता है।
– कलह से बचाव: घर में सुगंधित धूप हवन , दीपक , की महक से चित्त शांत रखता है जिसके चलते घर में झगड़े नहीं होते, वातावरण शांत रहता है।

घर पर नवरात्रि में…दुर्गा पाठ का विशेष महत्व
-प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में जाग कर माता रानी का पूजन एवं पाठ करना चाहिए
-अपने घर पर विद्वत ब्राह्मणों द्वारा देवी पाठ(सप्तशती)करवाना चाहिए
-अपनी किस भी मनोकामना के लिए दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ सम्पुटित मन्त्र लेकर पाठ ब्राह्मण द्वारा करवाने से सभी मनोकामनॉए पूर्ण होती है
– चहेतो तो प्रतिदिन माता रानी के समक्ष पूजन, अभिषेक ,हवन पूरे नवदिन किया जा सकता है

कुमारी पूजन : प्रतिदिन घर पर देवी पूजन के साथ कन्या पूजन करना चाहिए

वैदिक सनातन धर्म

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