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कई वर्षों बाद सर्वार्थ सिद्धि योग में शरद पूर्णिमा 16 कलाओं से युक्त चन्द्रमा की चांदनी में होगा माहारास,लक्ष्मी जी बरसाएगी धन, करे लक्ष्मी पूजन

पं अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक
शारदीय नवरात्र के बाद आने वाली आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। चंद्रमा पूरे वर्ष में केवल शरद पूर्णिमा की तिथि में ही अपनी षोडश कलाओं को धारण करता है। इस बार शरद पूर्णिमा गुरुवार 5 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी। ऐसा कई वर्षों में पहली बार हो रहा है, जब शरद पूर्णिमा और गुरुवार का संयोग बना है।जोकि स्वयं ब्रह्म का प्रतीक है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है, इसलिए इस दिन का विशेष महत्व शास्त्रो में बताया गया है। इसी दिन कोजागरी व्रत भी मनाया जाता है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। भगवान श्रीकृष्ण और शरद पूर्णिमा का संबंध सोलह की संख्या से भी जुड़ता है। भारतीय चिंतन में सोलह की संख्या पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है। श्रीकृष्ण सोलह कलाओं से युक्त संपूर्ण अवतार माने जाते हैं। इसी तरह, शरद पूर्णिमा को भी सोलह कलाओं से युक्त संपूर्ण पूर्णिमा कहा जाता है। महारास को शरद पूर्णिमा के दिन घटी सबसे बड़ी आध्यात्मिक घटना माना जाता है।

और शरद पूर्णिमा षोडश कलाओं से युक्त चन्द्रमा का विस्तृत्र वर्णन
श्रीमदभागवत” के दशम स्कंध में 29 वें अध्याय से 33 वें अध्याय तक रासेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण की रासलीला का वर्णन किया गया है. “भागवत” के ये पाँच अध्याय “रासपंचाध्यायी” के नाम से विख्यात हैं. ये पाँच अध्याय उसके प्राण माने जाते हैं. “भागवत” वर्णित भगवान् की यह रासलीला शरद पूर्णिमा की धवल चाँदनी में रासेश्वरी श्रीराधाजी तथा गोपिकाओं के साथ सम्पन्न हुयी थी. पं अंकित मार्कण्डेय के मुताबिक “भागवत” में उल्लिखित इस रासलीला का एक रूपांतर हमें महाकवि जयदेव के “गीत गोविन्द” में भी उपलब्ध होता है, जो वसंत काल में हुआ था. सूरदास आदि परवर्ती भक्त-कवियों की रचनाओं में उपर्युक्त दोनों परम्परायें एक दूसरे में गुंथकर एक हो गयी हैं. “रास” शब्द का मूल रस है और रस स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण ही हैं. यथा- “रसो वै सः “. जिस दिव्य क्रीड़ा में एक ही रस अनेक रसों के रूप में होकर अनन्त-अनन्त रस का समास्वादन करें, एक रस ही रससमूह के रूप में प्रकट होकर स्वयं ही आस्वादन-आस्वादक, लीलाधाम और विभिन्न आलम्बन एवं उद्दीपन रूप में क्रीड़ा करे- उसका नाम “रास” है.

ग्रहो के केन्द्रस्थ में…
कथनानुसार जिसप्रकार केंद्र में स्थित सूर्य के चारों ओर समस्त ग्रह-उपग्रह चक्कर लगा रहे हैं तथा सूर्य की आकर्षण-शक्ति इन्हें परस्पर सम्बद्ध रखकर गिरने नहीं देती, उसीप्रकार रासलीला में केन्द्रस्थ श्रीकृष्ण सूर्य की और श्रीराधिका सहित अन्य गोपिकाएँ ग्रह-उपग्रहों की संज्ञा पाते हैं. धर्मशास्त्र में वर्णित कथाओं के अनुसार देवी देवताओं के अत्यंत प्रिय पुष्प ब्रह्मकमल केवल इसी रात में खिलता है. इस रात के इस पुष्प से मां लक्ष्मी की पूजा करने से भक्त को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

वैज्ञानिक भी मानते हैं…..
की शरद पूर्णिमा की रात स्वास्थ्य व सकारात्मकता देने वाली मानी जाती है क्योंकि चंद्रमा धरती के बहुत समीप होता है। आज की रात चन्द्रमा की किरणों में खास तरह के लवण व विटामिन आ जाते हैं। पृथ्वी के पास होने पर इसकी किरणें सीधे जब खाद्य पदार्थों पर पड़ती हैं तो उनकी क्वालिटी में बढ़ौतरी हो जाती है।
शरद पूर्ण‌िमा की रात चन्द्रमा सोलह कलाओं से संपन्न होकर अमृत वर्षा करता है इसल‌िए इस रात में खीर को खुले आसमान में रखा जाता है और सुबह उसे प्रसाद मानकर खाया जाता है।शास्त्रो के अनुसार इससे रोग मिट जाते है और स्वास्थ्य ठीक रहता है

गाय के ही दूध का महत्व…
शरद पूर्णिमा को देसी गाय के दूध में दशमूल क्वाथ, सौंठ, काली मिर्च, वासा,अर्जुन की छाल चूर्ण, तालिश पत्र चूर्ण,वंशलोचन, बड़ी इलायची पिप्पली इन सबको आवश्यक मात्रा में मिश्री मिलाकर पकाएं और खीर बना लेंI खीर में ऊपर से शहद और तुलसी पत्र मिला दें, अब इस खीर को साफ बर्तन में रात भर पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे ऊपर से जालीनुमा ढक्कन से ढक कर छोड़ दें और अपने घर की छत पर बैठ कर चंद्रमा को अर्घ देकर,अब इस खीर को रात्रि जागरण कर के प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) सेवन कराए I

रोगियों के लिए अमृत…
खीर के सेवन से रोगी को सांस और कफ दोष के कारण होने वाली तकलीफों में काफी लाभ मिलता है I उक्त खीर को स्वस्थ व्यक्ति भी सेवन कर सकते हैं ,बल्कि इस पूरे महीने मात्रा अनुसार सेवन करने साइनोसाईटीस जैसे उर्ध्वजत्रुगत (ई.एन.टी.) से सम्बंधित समस्याओं में भी लाभ मिलता हैI कई आयुर्वेदिक चिकित्सक शरद पूर्णिमा की रात दमे के रोगियों को रात्रि जागरण के साथ कर्णवेधन भी करते हैं, जो वैज्ञानिक रूप सांस के अवरोध को दूर करता हैI तो बस शरद पूर्णिमा को पूनम की चांदनी का सेहत के परिप्रेक्ष्य में पूरा लाभ उठाएं बस ध्यान रहे दिन में सोने को अपथ्य माना गया है।

आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं,
‘पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।’
अर्थात रसस्वरूप अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं। (भगवत गीताः15.13) वर्णित

यदि जातक की कुंडली (जन्म पत्रिका) मे चन्द्रमा खराब हैं तो करे यह उपाय
जातक को चन्द्रमा से पीड़ित या खराब होने अथवा कमजोर होने पर समस्या रहती है , इन उपायो से समस्या का समाधान होगा

  • पूर्णिमा के दिन बुरा नारियल,शकर तथा घी मिलाकर गाय को खिलायें । 5 पूर्णमासी तक गाय को खिलाये
  • 5 पूर्णमासी तक केवल शुक्ल पक्ष में प्रत्येक 15 दिन गंगाजल तथा गाय का दूध चन्द्रमा उदय होने के बाद चन्द्रमा को अर्घ्य दें । अर्घ्य दे
  • जब चाँदनी रात हो, तब जल के किनारे जल में चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को हाथ जोड़कर दस मिनट तक खड़ा रहे और फिर पानी में मीठा प्रसाद चढ़ा देवें, घी का दीपक प्रज्जवलित करें । 

उक्त प्रयोग घर में भी कर सकते हैं, पीतल के बर्तन में पानी भरकर छत पर रखकर या जहाँ भी चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब पानी में दिख सके वहीं पर यह कार्य कर सकते हैं

धनदायक प्रयोग
मोती शंख पर केसर से स्वास्तिक बनाएं 108 अक्षत लेकर एक एक अक्षत महालक्ष्मी मंत्र बोलकर चढ़ाएं…फिर उस अक्षत को लाल कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी या कैश बॉक्स में रखें।

  • मंत्र है- ॐ श्रीं ॐ , ॐ ह्रीं ॐ महालक्ष्मये नम :। चावल चंद्रमा का प्रतीक और शंख लक्ष्मी स्वरुप है। ये उपाय आप रात 9 बजे से लेकर आधी रात 12:30 तक कर सकते हैं।
  • घर में लक्ष्मी के स्थायी निवास के लिये, पूर्णिमा की शाम से लेकर सुबह तक अखंड दीप जलायें। चंद्रलोक में मां लक्ष्मी दीप रुप में विराजमान हैं। अखंड दीप की रोशनी से मां लक्ष्मी खिंची चली आयेंगी।
  • लक्ष्मी के तांत्रिक उपाय में आप छोटे नारियल की पूजा करके उसे पूजा स्थान पर स्थापित करें। अष्ट लक्ष्मी पर 8 कमल चढ़ाकर महालक्ष्मी अष्टकम पढ़ने से भी मां लक्ष्मी निर्धनों के जीवन में प्रवेश करती हैं।
  • दक्षिणावर्ती शंख से मां लक्ष्मी का अभिषेक करें और धूप,दीप ,फूल से पूजा करें, दक्षिणावर्ती शंख भी पूर्णिमा के दिन ही प्रकट हुआ था। श्रीसूक्त का पाठ करने से भी मिलता है धन।
  • पूर्णिमा को लक्ष्मी सहस्त्रनाम, लक्ष्मी अष्टोत्र नावामली ,सिद्धिलक्ष्मी कवच, श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त, महालक्ष्मी कवच, कनकधारा के पाठ से भी आपको मां लक्ष्मी की कृपा मिलेगी।
  • पूर्णिमा को आंवला की पूजा से भी लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है। चांदनी रात में रखे आंवले में औषधीय शक्ति भी आती है।
  • शरद पूर्णिमा पर महालक्ष्मी को खीर, छुहाड़े की खीर, मेवे की खीर का भोग लगायें। गाय के दूध में महालक्ष्मी का वास है, इसीलिये उन्हें खीर बहुत प्रिय है।
  • ॐ ऐं क्लीं सौमाये नम: का जाप करे
  • चन्द्रमा से प्रार्थना करे
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