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कचरा निपटान और पानी की कमी है स्वच्छ भारत मिशन की राह में रोड़ा

स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर की थी. उनकी इच्छा है कि 2019 में बापू की 150वीं जयंती पर स्वच्छ भारत की सौगात देकर उन्हें श्रद्धांजलि दी जा सके. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन के पास हाथों में झाड़ू से सफाई करके स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी. उन्होंने इस अभियान को जन आंदोलन बनाते हुए देश के लोगों का आह्वान किया था और कहा था “ना गंदगी करेंगे, ना करने देंगे”. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत अभियान महत्वपूर्ण जन आंदोलन बन चुका है. स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत केंद्र सरकार का 2019 तक 10 करोड़ शौचालय निर्माण करने का लक्ष्य है. यह अभियान क्रमश: दो श्रेणियों ये श्रेणियां हैं- स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) और स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) में बंटा हुआ है. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 02 अक्तूबर 2014 के बाद 01 अक्तूबर 2017 तक 4,98,13,131 शौचालयों की निर्माण किया जा चुका है और 2,55,640 गांव स्वच्छ भारत मिशन के तहत एवं 4,464 गांव नमामि गंगे के तहत और देश के कुल 211 जिले खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं. इस सबके बावजूद कचरा निपटान प्रबंधन और पानी की कमी स्वच्छ भारत मिशन की सबसे बड़ी चुनौती है. शहरों से निकलने वाले लाखों टन कचरे के निपटान की समुचित प्रणाली अब तक विकसित नहीं हो पायी है, जिसके कारण शहर कचरे के ढेर में तब्दील हो रहे हैं और गत माह ही कचरे का पहाड़ ढहने से दिल्ली में हुई दुर्घटना किसी से छिपी नहीं है. इसके अलावा गांवों और पिछड़े इलाकों में पानी की भारी कमी को चलते शौचालयों के अनियमित इस्तेमाल की खबरें आम बात है. सरकार का कहना है कि इसके लिए उसने निगरानी तंत्र विकसित किया है लेकिन पानी की समुचित व्यवस्था के बिना शौचालयों की नियमित इस्तेमाल और रख-रखाव असंभव है.
तीन साल पहले जब इस अभियान हुई थी उस समय केवल 10 में से 4 घरों में शौचालय थे लेकिन मौजूदा समय में दस घरों में से करीब 6 घरों (61.72 प्रतिशत) में शौचालय हैं. स्वच्छ भारत अभियान लांच होने के बाद अबतक 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है. यह बढ़ोतरी शौचालय बनवाने के लिए सरकारी सहायता मिलने से संभव हुई है. अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन लांच करने के बाद से लेकर अब तक (निर्धारित लक्ष्य से आधे समय में) भारत में करीब 4 करोड़ शौचालय बनाए जा चुके हैं. स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण शुरू होने के तीन साल के अंदर राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का दायरा 38.72 फीसदी से बढ़कर 64 फीसदी से ज़्यादा हो गया है. पांच राज्यों के दो लाख से ज़्यादा गांव खुले में शौच की प्रथा खत्म हो चुके हैं. लेकिन दिल्ली के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. दिल्ली में स्वच्छ भारत मिशन के तहत पिछले तीन वर्षों में 47 निजी, 16968 सामुदायिक एवं सार्वजनिक शौचालय बने हैं और 6164 निर्माणाधीन हैं. लेकिन बिहार और तेलंगाना अभी स्वच्छ भारत मिशन की दौड़ में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं और अभी कई जिलों में यहाँ आधे से भी कम काम हुआ है.
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के अनुसार सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, उत्तराखंड और हरियाणा सहित 6 प्रदेश खुले में शौच मुक्त राज्यों की सूची में शामिल हो गए हैं. मोदी सरकार बनने के बाद शौचालय बनवाने की गति तेजी से बढ़ी है. 2012-13 और 2013-14 हर साल 50 लाख से कम शौचालय बने हैं लेकिन स्वच्छ भारत मिशन के बाद तेजी से शौचालय बनने शुरू हुए हैं और 2016-17 में 2 करोड़ से ज्यादा शौचालय बने हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच के कारण महिलाओं और बच्चों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. गंदगी के अलावा लोग बीमारियों का शिकार होते हैं. स्कूलों में शौचालय न होने के कारण लड़कियां स्कूल जाने से कतराती हैं.
स्वच्छ भारत मिशन के तहत आवासीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत घरेलू तथा सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करना है. पर्यटन स्थलों, बाजारों, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशनों जैसे प्रमुख स्थानों पर भी सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस कार्यक्रम खुले में शौच, अस्वच्छ शौचालयों को फ्लश शौचालय में परिवर्तित करने, मैला ढोने की प्रथा समाप्त करने, नगरपालिका कचरा (अपशिष्ट) प्रबंधन और स्वस्थ एवं स्वच्छता से जुड़ीं प्रथाओं के संबंध में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना आदि शामिल है. कचरा (अपशिष्ट) प्रबंधन की दृष्टि से विभिन्न नगरपालिकाओं में कम्पोस्ट खाद तैयार करने की अनुमानित क्षमता 54 लाख टन क्षमता है लेकिन अभी यह 15 लाख टन ही बन रही है. कचरा निपटान के लिए 145 कम्पोस्ट प्लांट हैं और 200 निर्माणाधीन हैं. हाऊसिंग एण्ड अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक ठोस अपशिष्ट से बिजली उत्पादन की क्षमता 600 मेगावाट है लेकिन अभी केवल केवल से 92 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है. कचरा निपटान प्रबंधन प्रणाली की क्षमता में पिछले तीन वर्षों में केवल 6 प्रतिशत का सुधार हुआ है कि और यह 16 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हुई है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत 81,000 शहरी वार्डों से डोर-टू-डोर कचरा इकट्ठा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है लेकिन अभी तक केवल 41,000 वार्डों से ही कचरा इकट्ठा किया जा रहा है और महानगरों की हकीकत यह है कि कहीं-कहीं कचरा इकट्ठा करने वाली गाड़ियाँ तीन-तीन दिनों में आती हैं, जिससे बड़े शहरों की कचरा निपटान प्रणाली लचर नजर आती है और ऐसा भ्रष्टाचार के कारण हो रहा है. कचरा निपटान प्रबंधन प्रणाली स्वच्छ भारत मिशन के लिए एक चुनौती है. कचरा निपटान प्रबंधन प्रणाली की मजबूती के बिना स्वच्छ भारत की परिकल्पना साकार नहीं हो सकती है.
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य सम्पूर्ण भारत को खुले में शौच से मुक्त बनाना है. अभियान के तहत देश में लगभग 11 करोड़ 11 लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख चौंतीस हज़ार करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान किया गया है. बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ग्रामीण भारत में कचरे का इस्तेमाल उसे पूंजी का रुप देते हुए जैव उर्वरक (खाद और बिजली) और ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित करने के लिए अभियान को युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर ग्रामीण आबादी, स्कूल शिक्षकों और छात्रों के बड़े वर्गों के अलावा प्रत्येक स्तर पर इस प्रयास में देश भर की ग्रामीण पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को जोड़े जाने का प्रावधान किया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का सकारात्मक असर दिखने लगा है। स्वच्छ भारत अभियान के बाद देशभर में साफ-सफाई की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। सफाई को लेकर लोगों की सोच बदल रही है.स्वच्छ भारत के कारण भारत यात्रा और पर्यटन इंडेक्स में अब 40वें स्थान पर पहुंच गया है जबकि 2015 में 52वें और 2013 में 65वें स्थान पर था.
बड़ा हस्तियों, गैर सरकारी संगठनों, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और आम जनता के इसमें शामिल होने से इस अभियान का दायरा 2014 के 38.72 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 62 प्रतिशत हो गया है. ‘स्वच्छ सर्वेक्षण-2017’ के परिणामों से पता चलता है कि स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत किये जा रहे प्रयासों से शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता पर सकारात्मक असर पड़ा है.
भारत के लिए गंगा का न सिर्फ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है, बल्कि देश की करीब 40 प्रतिशत जनसंख्या किसी न किसी रूप में आर्थिक रूप से इसपर निर्भर है. स्वच्छ भारत अभियान के तहत नमामि गंगे परियोजना गंगा की सफाई का बड़ा अभियान है. मोदी सरकार ने 2019-20 तक गंगा की सफाई का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए चालू वित्त वर्ष में 2154 करोड़ रुपये का राशि आवंटित की है.

विजय शर्मा
डब्ल्यू जेड 430 ए, नानकपुरा, हरि नगर
दिल्ली-110064

 

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