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करनाल संसदीय क्षेत्र अभी अटकलों में ही अटका पडा है कि कौन कौन होंगेकरनाल के चुनावी दंगल में?

>> रोज रोज हो रही है भाजपा मे नये नये नामों की चर्चा, चाहवानोंं की लम्बी लिस्ट है भाजपा में <<
>> काग्रेंस शायद भाजपा के प्रत्याशी की इंतजार मे है<<
>> जजपा नही खोल रही है पत्ते<<

विजय न्यूज़। नितिन वालिया
करनाल। हरियाणा मे करनाल संसदीय क्षेत्र महत्वपुर्ण होने के कारण सभी की निगाहें यहीं अटकी है कि करनाल से कौन कौन होंगे चुनावी दंगल मे ? करनाल से
लोकसभा चुनाव लडऩे को लेकर जंहा भाजपा में असमंझस की स्थिति बरकरार है तो वंही भाजपा,कांग्रेस, जजपा व आम आदमी पार्टी की टिकट पर भी अभी स्थिति साफ नहीं है कि पाटीयां करनाल से किसे लोकसभा चुनाव के लिए अपना लोकसभा उम्मीदवार बनाएगी?
ब्राह्मण और पंजाबी समुदाय की माने जाने वाली करनाल सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर टिकट देना
चाहती है लेकिन बात पहले आप – पहले आप वाली स्थिति पर आकर रुक गई है। खबर आ रही है कि कांग्रेस आलाकमान ने करनाल नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर का बायोडाटा मांगा है। चर्चा है कि हरियाणा कांग्रेस के एक बड़े नेता पूर्व डिप्टी मेयर को चुनाव लड़वाना चाहते है। जबकी पिछले इतिहास मे जायें तो इस सीट पर लगभग 10 बार ब्राह्मण सांसद ही काबिज रहा है। पार्टियां ब्राह्मण समाज को दरकिनार कर कोई रिस्क भी लेना नही चाहती। क्यंोकि अब की बार लहर जैसी स्थिति भी नजर नही आ रही है। ऐसा मानना है राजनितिक पंडितों का। वहीं दुसरी तरफ ब्राह्मण समाज ने ऐलान कर दिया है कि जो ब्राह्मण समाज को
एहमियत देगा, समाज उसके साथ खडा रह सकता है। हो सकता है पार्टियां पिछले इतिहास को मद्देनजर रख कर चलें।
काग्रेंस,भाजपा व थोडे ही दिनों मे हरियाणा की राजनीति मे जगह बनाने वाली जजपा तथा आम आदमी पार्टी के पास अभी कोई ठोस व्यक्ति नजर नही आ रहा बस कयासों पर ही गाडी अटकी पडी है। भाजपा मे टिकटाथियों की भले ही लाईन लगी हो, मगर भाजपा किसी को नाराज करके भी चलना नही चाह रही है। कई नामों की चर्चा दिनेश कौशिक, वेदपाल,शशी मेहता,मेनका गांधी,पाटिल आदि के नामों के कयास भी लगे, अब पानीपत से एक नाम का बाजार भी गर्म है। भाजपा के पिछले सांसद से भी जनता व चर्चानुसार अन्दुरनी रूप से कार्यकर्ता भी खुश नही है। उनके गुमशुदा के पोस्टर अक्सर सोशल मिडिया पर वायरल होते रहें हैं।
जो जगजाहिर हैं। भाजपा से आये दिन कोई न कोई नये नाम की चर्चा होती रहती है। जबकी लोगों की मांग स्थानिय व्यक्ति की उठ रही है। क्योकि फ्लाईट से
उतर कर सांसद यहां नजर नही आते। प्रमुख दो पार्टीयों की बात करें तो कागं्रेस का कोई नाम अभी तक सामने नही आया है। कहने को कागं्रेस के पास करनाल से 4 बार सांसद रहे पं चिंरजी लाल शर्मा के पुत्र कुलदीप शर्मा का नाम भी चर्चा मे रहा है। जो कागे्रंस मे अपनी एक पैठ रखते हैं। मगर क्या काग्रेस भी यहां से पंजाबी कार्ड खेल सकती है ये देखना रहेगा। चर्चानुसार व सूत्रों की माने तो करनाल से एक पंजाबी नेता ने अपना बायोडाटा एक बड़े कांग्रेस नेता के कहने पर आला कमान को भेजे जाने की चर्चा है जिसपर गम्भीरता से विचार किया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस भी भाजपा के मुकाबले 2019 के लोकसभा चुनावों में एड़ी
चोटी का जोर लगाना चाहती है। पूर्व सांसद अरविंद शर्मा शायद यही सोच कर भाजपा मे शामिल हुए थे कि उन्हे करनाल से चांस मिल सकता है। क्योकि करनाल से वे लगातार दो बार सांसद रह चुके है। मगर उन्हे रोहतक का रूख पार्टी कराने पर तुली है। जबकी उनकी पहली पंसद करनाल है। देखना रहेगा कि इस मामले मे ऊंट किस करवट बैठता है। क्योकि भाजपा के पास ब्राह्मण के रूप मे करनाल से अरविंद शर्मा ही एक बडा चेहरा है।
दूसरी तरफ यदि भाजपा भी पंजाबी समुदाय से मुख्यमंत्री की पहली पसंद संजय भाटिया या पूर्व सांसद अश्वनी चोपड़ा की पत्नी किरण चोपड़ा को टिकट देती
है तो मुकाबला न केवल कड़ा होगा बल्कि मोदी नाम के आसरे भाजपा इस सीट को जीतने का पुरजोर प्रयास करेगी क्योंकि ऐसी संभावना है कि मुख्यमंत्री खुद
करनाल सीट पर मेयर चुनाव की तरह फील्डिंग लगाएँगे ताकि कोई भी कैच छूट न सके।
वंही आज एक समारोह में जब पत्रकारों ने पूर्व डिप्टी मेयर से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लडऩे की अटकलों पर बात की तो उन्होंने भी तस्वीर को धुन्धला ही रहने दिया और कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ऐसा माना जा रहा है कि यदि भाजपा किसी बड़े चेहरे को करनाल से टिकट नहीं देती तो पहली बार एक उम्मीदवार को पानीपत सीट से चुनाव लड़वाया जाता है तो ऐसे में कांग्रेस एक ऐसे नाम को आगे लाकर टिकट देगी जो करनाल से हो और जिसके लिए आम जनता वोट देने को भी तैयार लग रही हो। हालांकि भाजपा के मुकाबले किसी भी और उम्मीदवार के लिए चुनावी जीत को पार लगाना इतना आसान नहीं होगा ये सभी जानते है लेकिन राजनिति सम्भावनाओ का खेल है। बरहाल ये देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस व भाजपा किसे मैदान मे उतारती है या ये समीकरण केवल अफवाह बनके चर्चा तक सीमित रह जाएंगे? वहीं सवाल ये भी है कि यदि पूर्व डिप्टी मेयर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ते है और भाजपा पानीपत से किसी नाम पर मोहर लगा उसे लोकसभा चुनाव का टिकट देती है तो क्या करनाल की जनता पानीपत के उम्मीदवार को वोट देगी या करनाल से स्थानिय उम्मीदवार को अपनी पहली पसंद के रूप में चुनेगी? सवाल कई है लेकिन फिलहाल जवाब लेने के लिए अभी अगले कुछ दिनों का इंतजार जनता को करना होगा।

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