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करोना संक्रमण ने बदली वातानुकूलित जीवन शैली और ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति

करुणा संक्रमण से पूरे विश्व में हाहाकार मचा दिया है। लाखों निरी ह लोगों का अमूल्य जीवन ही छीन लिया lकिसी परिवार का पिता,भाई, बहन, एक मात्र कमाने वाला पति ही कॉल कवलित होकर इस भव संसार से दूर हो गए ।कॅरोना संक्रमण से मनह स्थिति, आत्म संयम तथा आत्म बल तो टूटा ही है,साथ ही जिन लोगों ने निजी अस्पतालों में अपनी सेवाएं ली हैं वे आर्थिक रूप से भी काफी कमजोर,विपन्न हो गए है। मेरे एक परिचित मित्र जो सिर्फ पति-पत्नी ही थे, दुर्भाग्य वश उनकी कोई संतान न थी, पति को करोना होने से उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लगभग 25 दिन भर्ती रहने के बाद मित्र नहीं रहे, पर अस्पताल वालों ने उनकी विधवा को कहीं का ना छोड़ा, उनसे लगभग 15 से 17लाख रुपए वसूल लिए गए। अब पत्नी अकेली है, और सारी जमा पूंजी भी चली गई। ऐसे में उनका जीवन यापन ही दुरूह हो गया है। कुछेक डॉक्टर, निजी अस्पताल के मालिक, मेडिकल स्टोर के संचालको, ऑक्सीजन के सिलेंडर वालों ने इस विपदा,आपदा के समय को धन कमाने का अवसर मानकर जनता जनार्दन को पूरी तरह से लूटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। जिसे जहां अवसर मिला उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ धन कमाने में अपनी ऊर्जा तथा शक्ति लगा दी थी। पर दूसरी तरफ यह भी सच है कि सरकारी प्रयासों के अलावा निजी संस्थानों, समितियों, एन,जी,ओ व धार्मिक सभा, समितियों के लोगों ने पूरी लगन निष्ठा तथा सेवा भाव से कोविड-19 के संक्रमित लोगों की हर संभव मदद करने की कोशिश भी की है ।और कई लोग सेवा सुश्रुषा के दौरान अपनी जिंदगी से भी हाथ धो बैठे थे।ऐसे करोना योद्धाओं के अच्छे कर्मों से ही इस भयानक महामारी और संक्रमण से युद्ध किया जा सका है।इसके अलावा पूरा विश्व भारत की मदद करने आगे आ गया है। जो लोग करोना संक्रमण से बच गए हैं, उनमें भी शारीरिक, मानसिक कमजोरी आ जाने की वजह से साइड इफेक्ट की तरह ब्लैक,यलो,वाइट् के शिकार भी हुए है। कुल मिलाकर भारत में ही लाखों लोगों की जानें गई, और करोडो लोग संक्रमित भी हुए। पर पिछले एक साल से जब से कोविड-19 संक्रमण ने देश में दस्तक दी है तब से भारत में ही नहीं पूरे विश्व में ऐसो आराम और पर्यावरण में भारी परिवर्तन हुआ है। covid-19 के संक्रमण में यह कहा गया था,कि मरीजों को ठंड से बच कर रहना चाहिए या उन्हें ठंड से बचाना चाहिए, अन्यथा संक्रमण के और बढ़ने की पूरी संभावना होगी। ऐसे में हिंदुस्तान में दिल्ली से लेकर गांव तक तमाम सरकारी कार्यालयों के सेंट्रल एसी या कमरों में लगे ऐसी पर गर्मियों में भी रोक लगा दी गई थी, इसके अलावा बाजार, मॉल ,सिनेमाघरों, तथा पर्यटन क्षेत्र, होटल, शराब दुकाने, बार आदि के बंद होने से लोगों की आवाजाही काफी कम हो गई थी, जब व्यक्ति घर से निकलेगा ही नहीं तो मोटर वाहन का इस्तेमाल भी एकदम कम हो गया था। जिससे हवा में कार्बन डाई ऑक्साइड तथा वायु प्रदूषण की स्थिति एकदम बदल गई। पर्यावरण वैज्ञानिको ने इस दौरान वायुमंडल का सत्यापन कर यह बात कही थी कि वायुमंडल में प्रदूषण 20% तक कम हो गया है।जोकि ग्लोबल वार्मिंग के लिए सीधा सीधा असर कारक फेक्टर होता है। और विश्व का तापमान कार्बन डाइऑक्साइड तथा वातानुकूलित मशीनों के चलने से छोड़ी गई गैस से जितना वातावरण प्रदूषित होता है, उससे काफी कम पाया गया। ग्लोबल वार्मिंग के लिए वैश्विक स्थिति मैं काफी सुधार भी आया संक्रमण काल में लोगों की फिजूलखर्ची भी एकदम कम हो गई। ये अलग बात है कि देश का भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ है। और मुद्रा स्फीति काफी बढ़ गई है, सकल उत्पाद में कमी आई है। कुल मिलाकर करोना संक्रमण से वातावरण अत्यंत शुद्ध होकर पारिवारिक खर्चों में कमी हुई है। जिससे मनुष्य को इस बात की सीख मिल गई है कि कम खर्च,कम पेट्रोल, कम एसी,कम उत्पादन से भी जीवन सुचारू रूप से चलाया जा सकता है। अनावश्यक आधुनिकता की दौड़ में या अपने आप को बेवजगह ज्यादा आराम से स्थिति में रखने से केवल बीमारियों का आमंत्रण ही है। और इस दौरान धार्मिक सौहाद्रता, भाईचारे को भी काफी महत्वपूर्ण बल मिला ।यह तथ्य इस संक्रमण काल के दौरान सामने आया की मृत्यु अटल है, किंतु जीवन संघर्षों का नाम है।और इसीलिए मिलजुल कर प्यार ,मोहब्बत,भाईचारे में ही जिंदगी के स्वर्णिम पलों का सच्चा आनंद है। क्योंकि जिंदगी एक बार ही मिलती है, उसे जी भर के जीना ही सच्चा जीवन है।

 

संजीव ठाकुर

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