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कविता : अपने मुँह मियां मिट्ठू

कर  रहा  हर  वक्त  अपनी  वाहवाही,
कभी  किसी  की  सुनता  नही  भाई।
संपन्न  है  जो , खड़ा  है  उनके  पास,
कभी जरूरतमंद के काम आया क्या??
अपने  ही  मुँह  बनता  मिया  मिट्ठू,
करता हर वक्त मुर्गे की तरह कुकडु कु,
कभी जरूरतमंद की जरूरत में किसी
के  काम  आया  क्या??
सुबह से शाम तक यूँही बकवास करता है,
कभी इधर,कभी उधर समय पास करता है।
कभी किसी की दर्द भरी बाते सुनकर,
किसी के सर को काँधे से लगाया क्या??
पैर  हमेशा  रहते  है  जिसके  जमीन  पर,
पता  नही  क्यों  हवा  में  उड़ता  रहता  है,
हमेशा  दिखाता  है  कितना  सहयोगी  है,
जरूरत पर किसी के कभी ना काम आया।।
नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश ).
मोबाइल 09582488698
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