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कविता : “आओ दिवाली मनायें”

“आओ दिवाली मनायें”

आओ दिवाली मनायें,
किसी अँधेरे घर में करें उजियारा,
बुझते दीपक को फिर रोशनायें

बांटलें गम किसी दुखिए के,
मिल खुशियों के दीप जलायें।

करें दूर अंतर्विकारों का प्रदूषण
शुद्ध विचारों के दीप जलायें।

छोड़ जाति-पाती, रहें प्यार से
कोमी एकता के दीप जलायें।

करें सत्कार सर्वधर्मों का,
मानव धर्म का दीप जलायें।

करें सम्मान नारी जाति का,
इंसानियत का दीप जलायें।

कहे “कंत”,आओ दिवाली मनायें,
अपने अंतर मनमें भी दी पजलायें
इसी अभिलाषा से “महरम” दिवाली मनायें

दास दविन्द्र “महरम”
मोहाली (पंजाब)

 

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