न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

कविता : “कंत जन्मदिन”

 

 

“कंत जन्मदिन”

“कंत” जन्मदिन आया-२
खुशियों की लेके बहार,
चाँद और तारों के साथ,
दिन यह मुबारक आया।

सचखंड का नजारा आया,
देवी देवते भी देखे बहार,
माँ “माया कौर” के साथ,
चाँद जमीं पर उतर आया।

संगतों का टोला भर आया,
बोलें “कंत” मुबारकबाद,
ढ़ोलकी चिमटों के साथ,
“सतगुरु दर्शन” का सरमाया।

“कंत” मसीहा बन आया,
दुःखियों के दुःख हरता,
लौटा ना कोई खाली हाथ,
रोतों को हँसाने आया।

“कंत” जियो हजार साल,
“महरम” की यही अरदास,
मिल सब संगत के साथ,
प्यार मिलता रहे तुम्हारा।

दास दविन्द्र “महरम”
मोहाली (पंजाब)

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar