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कविता : तू जलाना एक दीया

तू जलाना एक दीया

प्रिये जलाना तू एक दीया उनके नाम
आये हैं जो वतन के काम।
कफन बांधकर माथे पे
जो न्योछावर कर गए अपने प्राण।
प्रिये जलाना तू एक दीया उनके नाम
जो हैं भारत माँ की शान।
रात-रात भर जागकर
देते हैं हमें चैनों-आराम।
प्रिये जलाना तू एक दीया उनके नाम
करता तिरंगा जिन्हें सलाम।
सहकर गोलियां सीने पर
करते रोसन हमारी शाम।
प्रिये जलाना तू एक दीया उनके नाम
जिनके मन में बसे हैं राम।
देश को जिन्होंने अभेद बनाया
पवन पुत्र सा सीना तान ।
प्रिये जलाना तू एक दीया अमर जवानों के नाम।।

मुकेश सिंह
सिलापथार,असम
मो०-9706838045

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