न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

कविता : तेरी बंसी कान्हा

बंसी तेरी मधुर है कान्हा
पर जानें छेड़े कौन सी तान?
बजती जब जब मुरली प्यारी
तन से निकल जात हैं प्राण।

गैया तेरी नांचे छमछम
मेघ उमड़ घुमड़ कर आए।
पनघट पे खड़ी गोपियां सारी
तेरी मुरली की धुन में खो जाएं।

राधा रानी तेरी दिवानी
तेरी बांसुरी पे मरती है।
गोकुल के हर कण कण का
तेरी बंसी निद्रा हरती है।

तेरे राग बिन सुना है जग
तुझ बिन अशांत खड़ी है कृष्णा
तू बड़ा मतवाला केशव
जग में भरी है तेरे प्रेम की तृष्णा।

मुकेश सिंह
सिलापथार, असम
09706838045
[email protected]

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar