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कविता : दीप जलायें

दीप जलायें

आओ मिलकर दीप जलायें
सुख शान्ति हर ओर फैलाये
दुनिया को जगमग कर जाये
मिलकर ऐसा गीत हम गाये
भाईचारा हो वही धुन बजाये
अपनी अलग पहचान बनाये
दीवाली को हम साथ मनाये
आओ मिलकर दीप जलाये
इतिहास को फिर से दोहराये
शांति अहिंसा का पाठ पढ़ाये
बौद्ध गाँधी का मार्ग अपनाये
विश्व शांति का दूत बन जाये
आओ मिलकर दीप जलायें
प्रदूषण से धरा को बचाये
बिन पटाखा दीवाली मनायें
बच्चों को एक दिशा दिखाये
आओ मिलकर दीप जलायें
खुशहाली हो हमसब चाहे
आतंक से देश को बचाये
रौशनी से भेदभव को मिटायें
आओ मिलकर दीप जलाये
सबका जीवन हो प्रकाशमय
अंधेरा जग से छट जाये
आओ मिलकर दीप जलायें
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डॉ मनोज कुमार
नरेंद्र मोहन हॉस्पिटल मोहन नगर
गाजियाबाद 9818763794

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